राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद भी लोग शर्मिंदा नहीं, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी- दोषियों के लिए होना चाहिए मृत्युदंड का कानून!

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद भी लोग शर्मिंदा नहीं, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी- दोषियों के लिए होना चाहिए मृत्युदंड का कानून!

अयोध्या (Ayodhya) के भव्य राम मंदिर में प्रभु रामलला के चरणों में आने वाले चढ़ावे की चोरी के मामले ने अब कानूनी रूप से भी बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। करोड़ों राम भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाने वाली इस घिनौनी वारदात पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक टिप्पणी की है। माननीय न्यायालय ने मंदिर परिसर की सुरक्षा और आरोपियों के आचरण पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा है कि देश के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक राम जन्मभूमि में इस तरह की हरकत करने के बाद भी दोषियों के चेहरे पर कोई शर्मिंदगी नहीं है। अदालत ने तल्ख लहजे में कहा कि ऐसे संगीन और धार्मिक आस्था को चोट पहुंचाने वाले अपराधियों के लिए कानून में 'मृत्युदंड' (Death Penalty) जैसी कठोरतम सजा का प्रावधान होना चाहिए।

जनभावना और आस्था का अपमान, हाईकोर्ट ने क्यों दिखाई इतनी तल्खी?

अदालत के सामने जब इस चोरी कांड से जुड़ी आंतरिक जांच रिपोर्ट और सुरक्षा व्यवस्था में हुए हालिया बदलावों (जैसे 36 कर्मियों को हटाना) का विवरण पेश किया गया, तो जस्टिस की बेंच अपने गुस्से को रोक नहीं सकी। हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि अयोध्या राम मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की अटूट श्रद्धा का केंद्र है। सदियों के संघर्ष के बाद बने इस पावन मंदिर के खजाने और चढ़ावे पर बुरी नजर डालना और सेवा के नाम पर अंदर घुसकर हेराफेरी करना एक अक्षम्य अपराध है। कोर्ट ने कहा कि जब अपराधियों में लोकलाज और भगवान का खौफ ही खत्म हो जाए, तो वहां केवल सख्त से सख्त कानून ही एक नजीर पेश कर सकता है।

'दोषियों के मन से खत्म हो चुका है कानून का डर' - अदालत

हाईकोर्ट का कड़ा रुख: अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर विशेष चिंता जताई कि सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी के बावजूद आरोपियों ने इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया। न्यायालय ने टिप्पणी की, 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पवित्र परिसर के भीतर तैनात कुछ सेवादार और कर्मी ही रक्षक से भक्षक बन गए। इतनी बड़ी हेराफेरी पकड़े जाने के बाद भी दोषियों के व्यवहार में कोई पश्चाताप या शर्मिंदगी दिखाई नहीं दे रही है। यह दर्शाता है कि उनके मन से कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है, जिसके लिए सिर्फ जेल भेजना काफी नहीं है।'

सुरक्षा व्यवस्था और एसबीआई की नई प्रणाली को लेकर भी दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने इस मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा 36 पुराने संदिग्ध कर्मचारियों को हटाए जाने के फैसले को सही ठहराया। इसके साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शासन और अयोध्या पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया है कि मंदिर के काउंटिंग रूम (Counting Room) में लागू की गई नई 'पॉकेटलेस यूनिफॉर्म', बायोमेट्रिक चेकिंग और 360-डिग्री सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था की हर हफ्ते समीक्षा की जाए। कोर्ट ने साफ किया कि रामलला के दरबार में आने वाले एक-एक पैसे का हिसाब पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यूपी और देश भर के राम भक्तों में कोर्ट की टिप्पणी की चर्चा

इलाहाबाद हाईकोर्ट की इस बेहद कड़क टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश (UP) के अयोध्या, लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी समेत पूरे देश के श्रद्धालुओं और संतों में इसकी भारी चर्चा हो रही है। संतों और स्थानीय नागरिकों ने कोर्ट के इस रुख का पुरजोर स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि भगवान के घर में चोरी करने वालों के साथ किसी भी तरह की हमदर्दी नहीं दिखाई जानी चाहिए। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए पुलिस प्रशासन से अब तक की गई गिरफ्तारियों और बरामदगी की पूरी स्टेटस रिपोर्ट (Status Report) तलब की है।

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