गाजियाबाद के जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार निलंबित, मंत्री नितिन अग्रवाल के निर्देश पर कार्रवाई

गाजियाबाद के जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार निलंबित, मंत्री नितिन अग्रवाल के निर्देश पर कार्रवाई

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा प्रशासनिक भ्रष्टाचार, कार्य में लापरवाही और राजस्व नुकसान के खिलाफ चलाए जा रहे 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) अभियान के तहत एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज कार्रवाई सामने आई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के सबसे महत्वपूर्ण जिले गाजियाबाद में तैनात जिला आबकारी अधिकारी (District Excise Officer) संजय कुमार को शासन द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। यह कार्रवाई प्रदेश के आबकारी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल (Nitin Agarwal) के सीधे और कड़े निर्देशों के बाद अमल में लाई गई है। गाजियाबाद जैसे हाई-प्रोफाइल और भारी राजस्व देने वाले जिले के शीर्ष आबकारी अधिकारी पर गिरी इस गाज के बाद से पूरे प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों और आबकारी महकमे में हड़कंप मच गया है। शासन स्तर से मिली जानकारी के मुताबिक, संजय कुमार पर राजस्व संग्रह में गंभीर कोताही, अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने में असफलता और पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं।

मंत्री नितिन अग्रवाल का कड़ा संदेश: भ्रष्टाचार और लापरवाही करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे

आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने इस पूरी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार आबकारी विभाग में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या सरकारी राजस्व की चोरी को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। मंत्री नितिन अग्रवाल ने गाजियाबाद जिले से लगातार मिल रही शिकायतों और विभागीय समीक्षा बैठकों में पाई गई खामियों का कड़ा संज्ञान लेते हुए अपर मुख्य सचिव (आबकारी) को विभागीय जांच बैठाने और अधिकारी को तत्काल सस्पेंड करने के आदेश जारी किए थे। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी जारी करते हुए कहा कि चाहे अधिकारी कितना भी रसूखदार क्यों न हो, यदि वह शासन की प्राथमिकताओं और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दावों पर खरा नहीं उतरता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

गाजियाबाद में क्यों गिरी आबकारी अधिकारी संजय कुमार पर गाज? जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी

गाजियाबाद जिला दिल्ली-एनसीआर से सटा होने के कारण आबकारी राजस्व (Excise Revenue) और अवैध शराब की तस्करी के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है। पिछले कुछ समय से शासन को शिकायतें मिल रही थीं कि जिले में आबकारी दुकानों के अनुज्ञापन, ओवररेटिंग और अवैध शराब के अंतरराज्यीय नेटवर्क पर नकेल कसने में स्थानीय आबकारी तंत्र पूरी तरह से विफल साबित हो रहा था। विभागीय जांच और गोपनीय रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आई कि लक्षित राजस्व संग्रह (Revenue Collection Target) को पूरा करने में भी लापरवाही बरती गई। इसके अलावा, दिल्ली से सटे सीमावर्ती इलाकों में आबकारी नियमों के उल्लंघन और अवैध शराब की दुकानों के संचालन की लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई न किए जाने को लेकर जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई थी।

जांच समिति का गठन और निलंबन के दौरान मुख्यालय से संबद्ध किए गए निलंबित अफसर

शासन द्वारा जारी आधिकारिक निलंबन आदेश के अनुसार, निलंबित जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई (Disciplinary Action) शुरू कर दी गई है। निलंबन की इस अवधि के दौरान संजय कुमार को प्रयागराज स्थित आबकारी आयुक्त कार्यालय (Excise Commissioner Office) से संबद्ध (Attach) कर दिया गया है। शासन ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक वरिष्ठ आईएएस/आईपीएस स्तर के अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया है, जो तय समयसीमा के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संजय कुमार को केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा। गाजियाबाद में अस्थायी रूप से कार्यभार संभालने के लिए शासन द्वारा नए अधिकारी की तैनाती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

दिल्ली-एनसीआर के सीमावर्ती जिलों में आबकारी तस्करों और लापरवाह अफसरों पर कसेगा शिकंजा

संजय कुमार पर हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद गाजियाबाद, नोएडा (गौतम बुद्ध नगर), हापुड़ और मेरठ समेत पूरे एनसीआर क्षेत्र के आबकारी चेकिंग दस्तों और अधिकारियों में भारी खलबली मच गई है। आबकारी विभाग के सूत्रों का कहना है कि मंत्री नितिन अग्रवाल के इस कड़े रुख के बाद अब एनसीआर के अन्य जिलों में भी आबकारी दुकानों की अचानक औचक जांच (Surprise Inspection) और स्टॉक वेरिफिकेशन का काम तेज कर दिया गया है। दिल्ली और हरियाणा से होने वाली शराब की तस्करी को रोकने के लिए चेक पोस्टों पर कड़ाई बढ़ाने और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। शासन के इस सख्त कदम से यह साफ संदेश गया है कि आने वाले दिनों में और भी कई अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार का 'जीरो टॉलरेंस' मॉडल: जनता और विभागीय तंत्र में बड़ा संदेश

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे इस अभियान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि राज्य सरकार अपने प्रशासनिक तंत्र को पूरी तरह से पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आम जनता और आबकारी कारोबारियों के बीच इस कार्रवाई का मिला-जुला असर देखा जा रहा है। जहां एक ओर ईमानदार व्यापारियों और आम नागरिकों ने मंत्री नितिन अग्रवाल के इस कदम का स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर आबकारी माफिया से सांठगांठ रखने वाले सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट में क्या बड़े खुलासे होते हैं और गाजियाबाद के नए जिला आबकारी अधिकारी के रूप में किसे इस चुनौतीपूर्ण सीट की कमान सौंपी जाती है।