मथुरा के बरसाना में श्रीजी का भव्य जन्मोत्सव, ब्रह्म मुहूर्त में महाअभिषेक के साथ गूंजे जयकारे
ब्रज भूमि की पावन और अलौकिक धरा से इस वक्त भगवान श्री कृष्ण की प्रियतमा और प्रेम की अधिष्ठात्री श्री राधारानी के प्रकटोत्सव को लेकर एक बेहद भव्य, भक्तिमय और मन को मोह लेने वाली खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित राधा रानी की पवित्र नगरी बरसाना (Barsana) में इस वर्ष राधा अष्टमी (Radha Ashtami 2026) का पर्व पूरी श्रद्धा, धूमधाम और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के मुख्य आकर्षण के रूप में आज सुबह ब्रह्म मुहूर्त के पावन बेला में राधारानी के प्रगट्य उत्सव पर उनका भव्य महाअभिषेक किया गया, जिसे देखने के लिए देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु बरसाना के ऐतिहासिक राधारानी मंदिर में पहुंचे हैं। संपूर्ण ब्रजमंडल इस समय 'राधे-राधे' और 'श्री राधा रानी की जय' के जयकारों से पूरी तरह गूंज उठा है और चारों तरफ उत्सव का माहौल बना हुआ है। आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च, गूगल डिस्कवर की यूजर-फ्रेंडली और आकर्षक शैली, तथा एसईओ और एईओ मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए इस विस्तृत और भक्तिमय आलेख में हम आपको बरसाना के इस ऐतिहासिक जन्मोत्सव की पूरी अंदरूनी और भव्य कहानी से रूबरू करा रहे हैं।
क्या है बरसाना में राधा अष्टमी के इस पावन पर्व का पूरा धार्मिक महत्व और कैसे शुरू हुआ जन्मोत्सव
सनातन धर्म और हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा रानी के प्रकट होने का पावन दिन माना जाता है, जिसे बरसाना और वृंदावन समेत पूरे ब्रज क्षेत्र में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार, द्वापर युग में बरसाना के वृषभान की लाड़ली श्री राधाजी का जन्म इसी दिन हुआ था, और उनके प्रकटोत्सव को मनाने के लिए बरसाना के प्रसिद्ध श्री जी मंदिर को देश-विदेश से मंगाए गए फूलों और रंग-बिरंगी आधुनिक विद्युत लाइटों से दुल्हन की तरह सजाया गया है। पर्व की पूर्व संध्या से ही बरसाना की गलियों में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था, जो हाथों में ध्वजा, निशान और प्रसाद लेकर नाचते-गाते मंदिर की ओर बढ़ रहे थे। इस अलौकिक उत्सव की गूंज केवल बरसाना तक सीमित नहीं है, बल्कि मथुरा, वृंदावन, गोकुल और नंदगांव के हर एक मंदिर में राधा नाम की धूम मची हुई है।
ब्रह्म मुहूर्त में दूध, दही, घी और शहद से हुआ महाअभिषेक, अलौकिक श्रृंगार देख मंत्रमुग्ध हुए भक्त
राधा अष्टमी के इस महापर्व का सबसे मुख्य और आध्यात्मिक क्षण आज सुबह ब्रह्म मुहूर्त के समय आया, जब बरसाना के श्रीजी मंदिर के गर्भ गृह में विराजमान श्री राधारानी के विग्रह का पारंपरिक रूप से महाअभिषेक किया गया। सेवायतों और आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दूध, दही, घी, शहद, बूरा और विभिन्न प्रकार के औषधीय जड़ी-बूटियों के महातीर्थों के जल से राधारानी का अभिषेक संपन्न हुआ। इसके बाद, मां राधा को अत्यंत कीमती और नए वस्त्रों, स्वर्ण आभूषणों तथा सुगंधित फूलों के गजरे से भव्य रूप से श्रृंगारित किया गया। जब पट खोले गए और गर्भगृह में सजी राधारानी के अलौकिक स्वरूप के दर्शन भक्तों को हुए, तो पूरा मंदिर परिसर 'राधे-राधे' के उद्घोष से गूंज उठा और कई श्रद्धालुओं की आंखें खुशी और भक्ति के आंसुओं से नम हो गईं।
देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालु, ब्रज की गलियों में उड़े गुलाल और संगीत की स्वरलहरियां
बरसाना की ऐतिहासिक पहाड़ियों और सीढ़ियों पर इस वक्त पैर रखने तक की जगह नहीं बची है क्योंकि देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी इस्कॉन (ISKCON) और अन्य संप्रदायों के विदेशी भक्त भी राधा रानी के इस जन्मोत्सव के साक्षी बनने के लिए बरसाना पहुंचे हैं। बरसाना की तंग गलियों में पारंपरिक समाज गायन, बधाई गीत, ढोल-मंजीरों की थाप और फूलों की होली का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों द्वारा जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया गया है, जहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जा रहा है। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा भी भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को दर्शन करने में कोई असुविधा न हो।
उत्तर प्रदेश और ब्रज क्षेत्र के अन्य मंदिरों में भी विशेष उत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
बरसाना के अलावा मथुरा के बांके बिहारी मंदिर, इस्कॉन मंदिर, नंदगांव के नंद बाबा मंदिर और रावल (जो राधा रानी का जन्मस्थान माना जाता है) में भी राधा अष्टमी के अवसर पर विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भजन संध्या का आयोजन किया गया है। रातभर चले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देश के जाने-माने भजन गायकों ने राधा-कृष्ण के प्रेम और उनकी लीलाओं का गुणगान करके श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस पावन अवसर पर व्रत रखने और श्री राधा रानी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व माना गया है, जिससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।