24 घंटे पहले सड़क पर साथ, फिर लंच में अचानक दूरी! क्या कांग्रेस-सपा के बीच छिड़ गई अंदरूनी जंग?
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सियासी गलियारों में एक बार फिर इंडिया (INDIA) गठबंधन के अंदरूनी तालमेल को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा बुधवार को विपक्षी गठबंधन के सांसदों के लिए दोपहर के भोज (लंच) का आयोजन किया गया। जनपथ स्थित मशहूर 'सागर रत्ना' रेस्तरां में आयोजित इस महत्वपूर्ण लंच कार्यक्रम से समाजवादी पार्टी के नेता पूरी तरह नदारद दिखे। अब तक मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, अखिलेश यादव की पार्टी का एक भी सांसद या वरिष्ठ प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल होने नहीं पहुंचा, जिसने विपक्षी एकता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह सियासी लंच ऐसे वक्त में आयोजित किया गया जब महज 24 घंटे पहले विपक्ष ने दिल्ली की सड़कों पर बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया था। मंगलवार को इंडिया गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन से निर्वाचन आयोग मुख्यालय तक पैदल मार्च निकाला था, जिसे पुलिस ने संसद मार्ग पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया था। विरोध में सड़क पर ही धरना शुरू हो गया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने गठबंधन के 10 सांसदों सहित करीब 260 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। हालांकि बाद में सभी को रिहा कर दिया गया।
उस विरोध प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेता कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिखे थे। बाद में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन परिसर के बाहर धरने पर डटे रहे, जहां से करीब आठ घंटे बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर छोड़ा। मंगलवार के हंगामे के बाद इंडिया गठबंधन के सभी सांसदों को बुधवार को भी राष्ट्रीय राजधानी में ही रुकने के निर्देश दिए गए थे।
मल्लिकार्जुन खरगे की मेजबानी में रखे गए इस लंच को विपक्षी दलों के बीच आगामी संसद सत्र और आंदोलन की भावी रूपरेखा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा था। ऐसे संवेदनशील मौके पर समाजवादी पार्टी के तमाम सांसदों का सागर रत्ना रेस्तरां न पहुंचना राजनीतिक पंडितों को चौंका रहा है। चर्चा तेज है कि क्या सीट शेयरिंग या चुनावी रणनीति को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच कोई नई असहजता पनप रही है, या फिर यह महज संवाद की कोई चूक है।