ऐन वक्त पर अखिलेश यादव ने बदले 2 उम्मीदवार, MLC चुनाव में सपा के इस सीक्रेट दांव से BJP खेमे में खलबली
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 11 विधान परिषद (एमएलसी) सीटों पर होने जा रहे चुनाव ने सूबे का सियासी पारा चढ़ा दिया है। स्नातक और शिक्षक कोटे की इन सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा की ओर से खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी कमान संभाल रखी है।
गोरखपुर और बरेली के बाद बुधवार को वाराणसी में एमएलसी प्रत्याशियों के समर्थन में उनकी लगातार तीसरी बड़ी जनसभा आयोजित हुई। 23 तारीख को होने वाले मतदान से पहले मुख्यमंत्री अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी ताबड़तोड़ प्रचार करेंगे। दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी ने भी ऐन वक्त पर दो उम्मीदवार बदलकर साफ संकेत दे दिया है कि वह इस मुकाबले को किसी भी कीमत पर हल्के में नहीं ले रही है। अखिलेश यादव लगातार रणनीतिक बैठकें कर रहे हैं और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी हर जिले में पसीना बहा रहे हैं।
इस चुनाव को 2027 के विधानसभा संग्राम का सेमीफाइनल और लिटमस टेस्ट माना जा रहा है, जिसके पीछे तीन बड़े सियासी कारण हैं। पहला बड़ा कारण मतदान का जरिया है; यह चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराया जा रहा है। यदि भाजपा यहां बाजी मारती है तो वह विपक्ष के ईवीएम संबंधी दावों की हवा निकाल सकती है, जबकि सपा की जीत उसके आरोपों को आगामी चुनावों तक नई धार देगी।
दूसरा पहलू इसका विशिष्ट मतदाता वर्ग है, जिसमें केवल शिक्षक और स्नातक शामिल हैं। समाज की वैचारिक दिशा तय करने वाले इस प्रबुद्ध वर्ग का जनादेश विजेता दल को बौद्धिक समर्थन का दावा करने की ताकत देगा। तीसरा और सबसे निर्णायक कारण इसका भौगोलिक दायरा है। भले ही सीटें 11 हों, लेकिन इनका विस्तार पश्चिम से पूरब तक उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों को कवर करता है, जिससे यह चुनाव सीधे तौर पर पूरे प्रदेश के जनमानस का मिजाज तय करेगा।
इस दंगल में स्नातक कोटे की 5 सीटें (लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी) और शिक्षक कोटे की 6 सीटें (लखनऊ, आगरा, वाराणसी, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद) शामिल हैं।
इनमें लखनऊ खंड स्नातक क्षेत्र के तहत 9 जिले (लखनऊ, हरदोई, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, बाराबंकी, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर) आते हैं, जबकि वाराणसी खंड स्नातक क्षेत्र 8 जिलों (वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और बलिया) के मतदाताओं को अपने दायरे में समेटे हुए है। पिछली बार भाजपा ने इनमें से छह सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित सपा इस बार इस मनोवैज्ञानिक बढ़त को छीनकर सत्ताधारी दल को बैकफुट पर धकेलने की फिराक में है।