कानपुर कोडीन सीरप खुलासा, 5000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, 32 फर्जी फर्मों से 1.12 करोड़ सीरप की सप्लाई

कानपुर कोडीन सीरप खुलासा, 5000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, 32 फर्जी फर्मों से 1.12 करोड़ सीरप की सप्लाई

उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर से ड्रग्स और अवैध दवाओं की तस्करी को लेकर अब तक का सबसे सनसनीखेज और विशालकाय कानूनी खुलासा हुआ है। कानपुर पुलिस और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने नशीली कोडीन कफ सीरप (Codeine Cough Syrup) के अवैध कारोबार के खिलाफ अदालत में 5,000 पन्नों की बेहद विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस की इस मुस्तैद तफ्तीश में यह हैरान करने वाला सच सामने आया है कि तस्करों ने सिर्फ कागजों पर चलने वाली 32 फर्जी फार्मा फर्मों (Fake Pharmaceutical Firms) का एक मायाजाल तैयार किया था। इस नकली नेटवर्क के जरिए देश भर में 1 करोड़ 12 लाख से अधिक कोडीन आधारित नशीली सीरप की बोतलें खपाई गईं, जिसकी बाजार में कीमत अरबों रुपये आंकी जा रही है। एआई सर्च और सुरक्षा एजेंसियों की नजर में यह हाल के दिनों का सबसे बड़ा मेडिकल ड्रग रैकेट माना जा रहा है।

कागजी कंपनियों का मायाजाल: ऐसे दिया गया करोड़ों के काले खेल को अंजाम

कानपुर पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, इस गिरोह के मास्टरमाइंडों ने ड्रग्स विभाग और टैक्स इनवॉइस से बचने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपनाया था। उन्होंने गरीब और सीधे-साधे लोगों के दस्तावेजों (जैसे आधार और पैन कार्ड) का गलत इस्तेमाल करके 32 ऐसी दवा कंपनियां रजिस्टर्ड कराईं, जिनका जमीन पर कोई अस्तित्व ही नहीं था। इन फर्जी फर्मों के नाम पर बड़ी-बड़ी फार्मा कंपनियों से भारी मात्रा में कोडीन सीरप का स्टॉक ऑर्डर किया जाता था। एक बार जब यह स्टॉक कानपुर और आसपास के गोदामों में पहुंच जाता, तो इसे वैध दुकानों पर भेजने के बजाय सीधे तौर पर नशे के सौदागरों और ब्लैक मार्केट (Black Market) में सप्लाई कर दिया जाता था।

5,000 पन्नों की चार्जशीट में दर्ज हैं पुख्ता डिजिटल और फॉरेंसिक सबूत

  • कड़ी धाराओं में केस दर्ज: पुलिस ने कोर्ट के समक्ष आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act), धोखाधड़ी (420), फर्जी दस्तावेज तैयार करने (467, 468, 471) और आपराधिक साजिश रचने (120B) के तहत पुख्ता चार्जशीट तैयार की है।

  • सैकड़ों डिजिटल ट्रांजैक्शन खंगाले: इस विशालकाय चार्जशीट में आरोपियों के बैंक खातों के स्टेटमेंट, व्हाट्सएप चैट्स और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) को मुख्य सबूत बनाया गया है। जांच टीम ने पाया कि 1.12 करोड़ सीरप बोतलों की बिक्री से कमाए गए करोड़ों रुपये को दर्जनों बेनामी खातों में ट्रांसफर किया गया था।

  • मास्टरमाइंड और बड़े डीलर नामजद: इस रैकेट से जुड़े मुख्य आरोपियों और बड़े थोक दवा डीलरों को नामजद कर उनके खिलाफ गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए गए हैं, जिससे इनका बचना अब नामुमकिन माना जा रहा है।

लोकल ऑप्टिमाइजेशन और स्वास्थ्य पर मंडराता बड़ा खतरा

कानपुर का नयागंज और आसपास के थोक दवा बाजार पहले भी कई बार जांच के घेरे में आ चुके हैं, लेकिन इस बार का खुलासा बेहद डरावना है। यह नशीली सीरप युवाओं, खासकर छात्रों और दैनिक मजदूरों को कौड़ियों के दाम पर नशे के विकल्प के रूप में बेची जा रही थी। कोडीन का अत्यधिक सेवन सीधे तौर पर सेंट्रल नर्वस सिस्टम और किडनी को फेल कर देता है। कानपुर पुलिस कमिश्नरेट इस मामले में शामिल सभी 32 फर्जी फर्मों के जीएसटी नंबर और ड्रग लाइसेंस निरस्त करने के लिए शासन को रिपोर्ट भेज चुकी है। कोर्ट में इतनी मजबूत और 5,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब बहुत जल्द इस बड़े ड्रग सिंडिकेट के अपराधियों को कड़ी सजा मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

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