यूपी के गन्ना किसानों को बड़ी राहत: अब घर बैठे चेक करें पर्ची और रकबा, पेराई से पहले जारी होगा प्री-कैलेंडर

यूपी के गन्ना किसानों को बड़ी राहत: अब घर बैठे चेक करें पर्ची और रकबा, पेराई से पहले जारी होगा प्री-कैलेंडर

उत्तर प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों के लिए आगामी पेराई सत्र से पहले विभाग ने एक पारदर्शी और बेहद सुविधाजनक डिजिटल व्यवस्था लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। अब किसानों को अपनी गन्ना आपूर्ति, सट्टा रकबे और संभावित पर्चियों का ब्योरा जानने के लिए गन्ना समितियों और मिल कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन करते हुए किसानों के खेतों का रकबा, अनुमानित उत्पादन और संभावित आपूर्ति पर्चियों का पूरा डेटा सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक कर रहा है।

केनयूपी पोर्टल पर सबसे पहले दिखेगा प्री-कैलेंडर

चीनी मिलों में पेराई का पहिया घूमने से पूर्व आधिकारिक पोर्टल caneup.in पर अंतिम सट्टा कैलेंडर जारी किया जाता है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अंतिम कैलेंडर से ठीक पहले विभाग 'प्री-कैलेंडर' लाइव कर रहा है। इस प्री-कैलेंडर के जरिए किसान अपने नाम दर्ज कुल कृषि भूमि, गन्ने का रकबा, अनुमानित उत्पादन क्षमता और मिलने वाली कुल पर्चियों की संभावित संख्या का घर बैठे मिलान कर सकेंगे।

रिकॉर्ड में गलती सुधारने का मिलेगा सीधा अवसर

प्री-कैलेंडर जारी करने का मुख्य उद्देश्य रिकॉर्ड को त्रुटिहीन बनाना है। यदि किसी किसान को अपने रकबे, गन्ने की किस्म, उत्पादन अनुमान या पर्चियों की गणना में किसी भी तरह की विसंगति अथवा गलती नजर आती है, तो वह तय समयसीमा के भीतर ऑनलाइन व ऑफलाइन निर्धारित प्रक्रिया अपनाकर संशोधन का दावा कर सकता है। विभागीय स्तर पर इन आपत्तियों का त्वरित निस्तारण करने के बाद ही फाइनल आपूर्ति कैलेंडर तैयार किया जाएगा।

मोबाइल पर आएगा सीधा SMS, 11 नवंबर से रौजागांव मिल में पेराई संभव

अयोध्या स्थित रौजागांव चीनी मिल में आगामी पेराई सत्र की शुरुआत 11 नवंबर के आसपास होने की पूरी उम्मीद है। मिल संचालन शुरू होने से लगभग 15 दिन पूर्व किसानों के लिए आधिकारिक आपूर्ति पर्चियां जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। जैसे ही किसी किसान की पर्ची जारी होगी, उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर तत्काल एसएमएस (SMS) के माध्यम से पूरी सूचना भेज दी जाएगी।

ई-गन्ना ऐप पर कोड या नाम से खोजें अपना पूरा कैलेंडर

डिजिटल प्रक्रिया को और अधिक सुलभ बनाने के लिए किसान 'ई-गन्ना' (e-Ganna) मोबाइल ऐप का भी सहारा ले सकते हैं। किसान ऐप में अपना किसान कोड दर्ज करके पर्चियों की संख्या और पूरे कैलेंडर का ब्योरा सेकंडों में देख सकते हैं। यदि किसी किसान को अपना कोड याद नहीं है, तो वह अपने जिले, ब्लॉक, चीनी मिल और गांव के नाम के जरिए भी अपना रिकॉर्ड सर्च कर सकता है। इस आधुनिक व्यवस्था से किसानों को अपनी फसल की कटाई और आपूर्ति की पूर्व योजना बनाने में मदद मिलेगी और समय रहते सभी गड़बड़ियां दूर हो सकेंगी।