मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से निकाला! 24 घंटे में बदला पूरा फैसला
उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त सबसे बड़ा भूचाल आ गया जब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह बेदखल करने का ऐलान कर दिया। आगामी चुनावी तैयारियों के बीच बसपा की इस अंदरूनी खींचतान ने न सिर्फ पार्टी संगठन की चूलें हिला दी हैं, बल्कि प्रदेश के सियासी समीकरणों को भी पूरी तरह गर्मा दिया है। एक दिन पहले रखी गई शर्त पूरी होने के बावजूद मायावती के इस अप्रत्याशित कदम ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है।
ससुर के संन्यास के तुरंत बाद आकाश आनंद की छुट्टी
सियासी ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब मायावती ने आकाश आनंद के सामने यह शर्त रखी थी कि यदि उनके ससुर और वरिष्ठ नेता अशोक सिद्धार्थ राजनीति छोड़ देते हैं, तो आकाश को पार्टी में जिम्मेदारियां और पद वापस दिए जा सकते हैं। इस शर्त पर अमल करते हुए अशोक सिद्धार्थ ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का औपचारिक ऐलान भी कर दिया। मगर इसके ठीक 24 घंटे के भीतर मायावती ने नया पैंतरा चलते हुए साफ कर दिया कि अब आकाश आनंद को भी बहुजन समाज पार्टी के तमाम दायित्वों और प्राथमिक सदस्यता से 'आजाद' किया जाता है।
'फैसला लेने में बहुत देर कर दी', अशोक सिद्धार्थ पर तीखा प्रहार
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सिलसिलेवार बयानों के जरिए बसपा सुप्रीमो ने अशोक सिद्धार्थ के फैसले पर कड़ा रुख अपनाया। मायावती ने दो टूक कहा कि संन्यास का फैसला भले ही दुरुस्त हो, लेकिन इसे लेने में बहुत देर कर दी गई। अगर अशोक सिद्धार्थ यह कदम वक्त रहते उठा लेते, तो न तो बहुजन आंदोलन को झटका लगता और न ही आकाश आनंद के सामने लगातार ऐसी विकट परिस्थितियां खड़ी होतीं। समय रहते यह कदम न उठाए जाने के कारण ही पार्टी नेतृत्व को संगठन सुधार के नाम पर कड़े और सख्त फैसले लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
'दामाद के भविष्य से ज्यादा अपनी राजनीतिक अभिलाषाओं की फिक्र'
अशोक सिद्धार्थ की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मायावती ने तंज कसा कि अगर उन्हें अपने दामाद आकाश आनंद के सियासी भविष्य और बहुजन मिशन की जरा भी परवाह होती, तो वे बहुत पहले ही मार्ग प्रशस्त कर देते। मायावती के अनुसार, सही समय पर संन्यास न लेना यह साफ संकेत देता है कि उनकी नीयत में खोट था और उनकी निजी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अब भी हावी थीं। इस देरी ने साबित कर दिया कि मिशनरी सोच की जगह निजी हितों को प्राथमिकता दी जा रही थी।
आकाश पर बरसीं मायावती: करियर से बड़ा हुआ ससुर का मोह
भतीजे आकाश आनंद के रवैये पर गहरी नाराजगी जताते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि आकाश को अपने सियासी करियर और बहुजन मिशन से ज्यादा अपने ससुर के प्रति अंधा लगाव है। आलम यह रहा कि आकाश ने पार्टी के उस आधिकारिक पोस्ट को रिपोस्ट तक नहीं किया, जो उनके राजनीतिक सुधार और भलाई के लिए जारी किया गया था। मायावती ने साफ शब्दों में रेखांकित किया कि दोनों नेताओं को बहुजन समाज के संघर्षों से ज्यादा अपने पारिवारिक और निजी स्वार्थ प्यारे हैं, जबकि वे यह भूल गए कि बसपा संगठन ने ही उन्हें फर्श से उठाकर अर्श तक की बुलंदी दी थी।
पहले पद छीना, अब पार्टी से पूरी तरह किया आजाद
मायावती ने स्पष्ट किया कि जब किसी नेता के लिए पार्टी विचारधारा और करोड़ों कार्यकर्ताओं के हितों से बड़ा परिवारवाद और निजी रिश्ते बन जाएं, तो वह बहुजन आंदोलन का नेतृत्व करने के काबिल नहीं रह जाता। पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह पहले आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर के अहम पद से हटाया गया था, ठीक उसी तरह अब उन्हें बसपा से पूरी तरह मुक्त किया जाता है। आकाश आनंद अब अपनी राजनीतिक दिशा चुनने के लिए पूरी तरह आजाद और स्वतंत्र हैं।