बिजली कटौती के बीच आई राहत की खबर, UP में बिजली की किल्लत हुई कम
उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए उमस और गर्मी के बीच बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में रात के समय हो रही अघोषित बिजली कटौती का असर अब तेजी से कम होने लगा है।
बीते 48 घंटों के भीतर राज्य के कई प्रमुख थर्मल पावर स्टेशनों की तकनीकी खराबी के चलते बंद पड़ी इकाइयों ने दोबारा पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर दिया है। इन बंद यूनिटों के सक्रिय होने से उत्तर प्रदेश के पावर ग्रिड को 2,500 मेगावाट (MW) से भी अधिक अतिरिक्त बिजली की आपूर्ति मिलने लगी है, जिससे आपूर्ति संकट काफी हद तक संभल गया है।
अनपरा, ओबरा और हरदुआगंज समेत कई थर्मल प्लांटों में उत्पादन बहाल
राज्य के ऊर्जा विभाग से प्राप्त विवरण के अनुसार, अनपरा, हरदुआगंज और ओबरा ताप विद्युत गृहों की इकाइयों के दोबारा चालू होने से लगभग 1,500 मेगावाट बिजली का उत्पादन तुरंत बहाल हो गया। इसके ठीक बाद घाटमपुर और जवाहरपुर पावर प्रोजेक्ट की एक-एक यूनिट ने भी ग्रिड को बिजली देना शुरू कर दिया। शुक्रवार को घाटमपुर की एक और यूनिट के साथ-साथ रोजा थर्मल पावर प्लांट की बंद पड़ी यूनिट से भी बिजली उत्पादन शुरू होने की पूरी संभावना है। इन दोनों यूनिटों के लाइन पर आते ही राज्य की कुल बिजली उपलब्धता में लगभग 1,000 मेगावाट का और बड़ा इजाफा दर्ज किया जाएगा।
ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में घटेगी रात की लोड शेडिंग
बिजली की उपलब्धता में 2,500 मेगावाट की सीधी बढ़ोतरी का सबसे सकारात्मक असर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों, तहसीलों और छोटे कस्बों पर नजर आने लगा है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के अधिकारियों का कहना है कि उत्पादन स्तर में लगातार हो रहे सुधार से अगले एक से दो दिनों के भीतर रात के वक्त की जाने वाली इमरजेंसी लोड शेडिंग लगभग न के बराबर रह जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन चुनिंदा पॉकेट्स में रात के वक्त मजबूरीवश लोड कम किया जा रहा था, वहां दिन के समय अतिरिक्त आपूर्ति देकर बिजली की भरपाई की जा रही है।
कोयला खदानों में जलभराव से बिगड़ा था उत्पादन का संतुलन
विगत दिनों देश के कई खनन क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण कोयला खदानों में पानी भर गया था, जिससे थर्मल प्लांट्स को होने वाली कोयले की नियमित रैक सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई थी। कोयले की कमी और कुछ प्रमुख उत्पादन इकाइयों में अचानक आई तकनीकी खराबी के चलते उत्तर प्रदेश में बिजली की कुल मांग और वास्तविक आपूर्ति के बीच लगभग 3,000 मेगावाट का विशाल अंतर (गैप) पैदा हो गया था। इसी वजह से देहात के इलाकों में देर रात तक घंटों बिजली गुल रहने की समस्या खड़ी हो गई थी। अब अधिकांश बंद इकाइयों के ग्रिड से दोबारा जुड़ जाने के बाद बिजली व्यवस्था पूरी तरह सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ रही है।