तहसील के चक्कर लगाना बंज; यूपी सरकार का ऐसा मास्टरस्ट्रोक, घर बैठे चुटकियों में होगा जमीन का बंटवारा
उत्तर प्रदेश में पैतृक और संयुक्त भूमि के बंटवारे को लेकर वर्षों तक चलने वाले विवादों और तहसील के अंतहीन चक्करों से अब आम जनता को बड़ी राहत मिलने जा रही है। राजस्व विभाग ने सह-खातेदारों के बीच जमीन के विभाजन (कुर्रा बंटवारा) की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए एक अत्याधुनिक डिजिटल पोर्टल की शुरुआत की है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब जमीन के हिस्सेदारों को शुरुआती शिकायत या आवेदन दर्ज कराने के लिए सरकारी दफ्तरों और कचहरी के चक्कर काटने की मजबूरी नहीं रहेगी।
आवेदन से लेकर लेखपाल-तहसीलदार की रिपोर्ट तक सब ऑनलाइन
नई पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था के तहत जमीन बंटवारे से जुड़ा कोई भी सह-खातेदार घर बैठे अपना वाद ऑनलाइन दर्ज करा सकेगा। आवेदन सबमिट होते ही संबंधित क्षेत्र के लेखपाल और तहसीलदार को डिजिटल माध्यम से नोटिस व जांच सौंपी जाएगी, जिन्हें अपनी धरातलीय रिपोर्ट भी सीधे पोर्टल पर ही अपलोड करनी होगी। सबसे खास बात यह है कि आवेदक अपने मोबाइल या कंप्यूटर से रियल-टाइम ट्रैकिंग कर सकेंगे कि उनकी फाइल वर्तमान में किस अधिकारी की टेबल पर लंबित है और उस पर क्या प्रगति हुई है।
राजस्व संहिता की धारा 116 के वादों का त्वरित निस्तारण
राजस्व विभाग द्वारा तैयार किया गया यह विशेष पोर्टल मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की 'धारा 116' (खाते के विभाजन का वाद) के तहत आने वाले मामलों पर केंद्रित है। अदालतों और तहसीलों में लंबित मुकदमों में सबसे बड़ा हिस्सा सह-खातेदारों के बीच आपसी सहमति न बनने और जमीन के भौतिक बंटवारे का होता है। इस पोर्टल का प्राथमिक उद्देश्य इन लंबित वादों को चरणबद्ध तरीके से समयबद्ध सीमा में आगे बढ़ाना और पूरी कानूनी प्रक्रिया से बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना है।
GIS तकनीक और नक्शे से जुड़ेगा हर एक भूखंड
जमीन की पहचान और सीमाओं को लेकर होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए पोर्टल में भौगोलिक सूचना प्रणाली यानी जीआईएस (GIS) तकनीक का समावेश किया गया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत राजस्व अभिलेखों, कम्प्यूटरीकृत खतौनी और डिजिटल भू-नक्शों को एक साथ तकनीकी रूप से लिंक किया जा रहा है। जीआईएस मैपिंग के जरिए जमीन की वास्तविक भौगोलिक स्थिति, चौहद्दी और मौके की बनावट को पोर्टल पर ही आसानी से देखा और समझा जा सकेगा, जिससे सीमा विवादों की गुंजाइश खत्म होगी।
खतौनी में 6 दशमलव स्थानों तक दर्ज होगा सटीक रकबा
राजस्व विभाग ने नई सरलीकृत खतौनी में एक बड़ा तकनीकी सुधार करते हुए भूमि के क्षेत्रफल को 6 दशमलव स्थानों (Six Decimal Places) तक दर्ज करने की व्यवस्था लागू की है। इस सूक्ष्म गणना का सबसे बड़ा फायदा छोटे भूखंडों और सीमांत किसानों को मिलेगा, जहां एक-एक इंच या सेंटीमीटर जमीन को लेकर विवाद खड़े हो जाते थे। रकबे की इतनी बारीक और सटीक प्रविष्टि होने से वास्तविक मिल्कियत पूरी तरह स्पष्ट रहेगी और जमीन संबंधी कार्यों के लिए नागरिकों की तहसील प्रशासन पर निर्भरता काफी हद तक घट जाएगी।