नौकरी के नाम पर खुला बैंक खाता और रातों-रात बन गया 41 करोड़ का मालिक, जानिए कैसे एक मजदूर फंसा बड़ी साजिश में
आधुनिक बैंकिंग और डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर ठगों ने अब समाज के सबसे कमजोर और गरीब तबके को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले से सामने आई एक झकझोर देने वाली घटना ने यह साबित कर दिया है कि किस तरह रोजगार की तलाश में भटक रहे भोले-भाले ग्रामीणों के दस्तावेजों का दुरुपयोग करके बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा है।
एक आम दिहाड़ी मजदूर जो रोज सुबह अपने परिवार का पेट पालने के लिए काम की तलाश में निकलता है, उसके पास जब अचानक आयकर और जीएसटी विभाग के करोड़ों रुपये के नोटिस पहुंचते हैं, तो पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसकना लाजिमी है।
दिल्ली में नौकरी का झांसा और दस्तावेजों का खेल
इस पूरी साजिश की शुरुआत करीब तीन साल पहले हुई थी जब मीरजापुर के पड़री थाना इलाके के लोकापुर गांव का रहने वाला यह सीधा-साधा मजदूर काम की तलाश में देश की राजधानी दिल्ली गया था। वहां किसी अज्ञात गिरोह या बिचौलियों ने उसे एक निजी कंपनी में नौकरी लगवाने का भरोसा दिया। इस प्रक्रिया के नाम पर उसके जरूरी दस्तावेज ले लिए गए और यह कहकर एक नया बैंक खाता खुलवाया गया कि इसी खाते में उसकी तनख्वाह आएगी। नौकरी तो कभी नहीं मिली लेकिन उस खाते की पासबुक और नियंत्रण चालाकी से उन्हीं लोगों ने अपने पास रख लिया। मजदूर थक-हारकर वापस अपने गांव लौट आया और वक्त के साथ यह बात आई-गई हो गई।
आयकर और जीएसटी विभाग के नोटिस से खुला राज
साजिश का असली चेहरा तब सामने आया जब तीन साल बाद अचानक सरकारी विभागों की गाड़ियां और नोटिस मजदूर के दरवाजे पर पहुंचे। आयकर विभाग और माल एवं सेवा कर यानी जीएसटी विभाग द्वारा भेजे गए इन पत्रों में दर्ज था कि इस खाते के जरिए लगभग 41 करोड़ रुपये का भारी-भरकम वित्तीय लेन-देन किया गया है। रोजाना चंद रुपयों की मजदूरी करने वाले परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम की बात सुनना ही किसी बड़े सदमे से कम नहीं था। यह साफ तौर पर एक बड़ा कॉरपोरेट फ्रॉड या मनी लॉन्ड्रिंग का मामला प्रतीत होता है जहां किसी और की काली कमाई को सफेद करने के लिए इस गरीब के खाते का इस्तेमाल किया गया।
न्याय की गुहार और प्रशासनिक जांच की मांग
स्थानीय स्तर पर शुरुआती सुनवाई न होने के बाद अब पीड़ित परिवार ने जिले के शीर्ष पुलिस अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है। मजदूर ने लिखित शिकायत सौंपकर मांग की है कि इस पूरे रैकेट की गहराई से जांच की जाए ताकि उन चेहरों को बेनकाब किया जा सके जिन्होंने उसके नाम पर करोड़ों का यह काला कारोबार किया है। यह मामला देश भर के उन तमाम लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो नौकरी या मदद के नाम पर अपने दस्तावेज और बैंक खाते अनजान लोगों के हाथों में सौंप देते हैं।