सगे दादा ने पोते की चिता के लिए नहीं दी 2 गज जमीन! 5 दिन तक पन्नी में लिपटा रहा शव, जानें पूरा मामला

सगे दादा ने पोते की चिता के लिए नहीं दी 2 गज जमीन! 5 दिन तक पन्नी में लिपटा रहा शव, जानें पूरा मामला

लखनऊ के माल क्षेत्र से पारिवारिक संपत्ति को लेकर ऐसा प्रकरण सामने आया है जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया। आदमपुर गांव में 26 वर्षीय जयप्रकाश की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार पांच दिनों तक नहीं हो सका। परिवार का आरोप है कि पैतृक जमीन को लेकर चल रहे विवाद के कारण उन्हें खेत में अंतिम संस्कार करने की अनुमति नहीं दी गई।

घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम गांव पहुंची। अफसरों ने दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की। जब विवाद का समाधान नहीं हुआ तो गुरुवार शाम पुलिस की मौजूदगी में खेत में ही जयप्रकाश का अंतिम संस्कार कराया गया।

पिता को जमीन नहीं मिलने का परिवार का दावा

मृतक के छोटे भाई आशीष के मुताबिक उनके दादा शिवमंगल के चार बेटे हैं। उनका आरोप है कि उनके पिता कृपाशंकर को पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं दिया गया। परिवार का दावा है कि शिवमंगल ने बाकी तीन बेटों के नाम जमीन का दान विलेख कर दिया।

आशीष ने बताया कि करीब पांच दिन पहले जयप्रकाश की मौत हुई थी। परिवार जब अंतिम संस्कार के लिए खेत पहुंचा तो दादा और चाचाओं ने वहां लकड़ियां डालने का विरोध किया। उनका कहना था कि संबंधित जमीन में परिवार का कोई हिस्सा नहीं है।

इसके बाद शव को घर के बरामदे में बर्फ और पन्नी की मदद से सुरक्षित रखा गया। परिवार ने जमीन के दान विलेख को रद्द करने और पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा दिए जाने की मांग उठाई है।

दादा ने पोते को जमीन नहीं देने की बताई वजह

दूसरी ओर जयप्रकाश के दादा शिवमंगल ने परिवार के आरोपों से अलग अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पहले उन्होंने खेत में लगे यूकेलिप्टस के पेड़ करीब नौ लाख रुपये में बेचे थे। इस रकम से जयप्रकाश के लिए कपड़े की दुकान और मेडिकल स्टोर शुरू कराया गया था।

शिवमंगल का कहना है कि जयप्रकाश दोनों कारोबार ठीक से नहीं चला सका और रकम खर्च हो गई। उनके मुताबिक वह नियमित रूप से कोई काम भी नहीं करता था। बाद में जयप्रकाश दिल्ली चला गया और वहां मजदूरी करने लगा।

इसी दौरान उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। शिवमंगल ने जमीन नहीं देने के पीछे जयप्रकाश के कथित आचरण को वजह बताया।

पांच दिन तक गांव में चर्चा का विषय रहा मामला

पैतृक संपत्ति के विवाद और अंतिम संस्कार को लेकर परिवार के बीच बढ़ा तनाव कई दिनों तक गांव में चर्चा का विषय बना रहा। मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप किया। आखिरकार पांच दिन बाद पुलिस की मौजूदगी में मृतक का अंतिम संस्कार कराया गया।