गाजियाबाद में 9 बड़े बिल्डरों की संपत्ति होगी नीलाम
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के प्रमुख औद्योगिक और आवासीय केंद्र गाजियाबाद (Ghaziabad) से घर खरीदारों (Homebuyers) के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। गाजियाबाद जिला प्रशासन ने सालों से अपने सपनों का आशियाना मिलने का इंतजार कर रहे और बिल्डरों की धोखाधड़ी का शिकार हुए हजारों आम नागरिकों के पक्ष में एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला लिया है। जिला प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करने वाले और डिफॉल्टर घोषित किए गए शहर के 9 बड़े बिल्डरों की संपत्तियों को कुर्क कर उनकी नीलामी (Property Auction) करने का कड़ा आदेश जारी कर दिया है। इस नीलामी प्रक्रिया से मिलने वाली करोड़ों रुपए की धनराशि को सीधे उन पीड़ित होमबॉयर्स के बैंक खातों में रिफंड के तौर पर ट्रांसफर किया जाएगा, जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई इन प्रोजेक्ट्स में निवेश की थी। प्रशासन के इस कड़े रुख से पूरे रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मच गया है और लंबे समय से न्याय की आस लगाए बैठे खरीदारों में एक नई उम्मीद जग गई है।
आखिर क्यों उठाया गया यह सख्त कदम और कौन-कौन से बिल्डर आ चुके हैं जिला प्रशासन के रडार पर?
गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में पिछले एक दशक के दौरान रियल एस्टेट बूम के नाम पर कई ऐसे फर्जी और लापरवाह बिल्डर सामने आए जिन्होंने फ्लैट खरीदारों से करोड़ों रुपए वसूलने के बाद भी समय पर प्रोजेक्ट पूरे नहीं किए और न ही तय समय सीमा के भीतर कब्जा दिया। जब खरीदारों ने अपने पैसे वापस मांगे, तो इन बिल्डरों ने टालमटोल करना शुरू कर दिया और जिला प्रशासन के आरसी (RC - Recovery Certificate) आदेशों की भी लगातार अवहेलना करते रहे। इन डिफॉल्टर बिल्डरों के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट (DM) ने कड़ा रुख अपनाया और प्रशासन की विशेष टीमों को उन सभी 9 बिल्डरों की संपत्तियों को चिन्हित करने का निर्देश दिया जो लंबे समय से बकाएदार बने हुए थे। अब प्रशासन ने कानूनी शिकंजा कसते हुए इनकी जमीनों और कमर्शियल संपत्तियों को कुर्क करके नीलामी की प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है।
नीलामी प्रक्रिया और आरसी रिकवरी का पूरा प्लान: कैसे मिलेगा पीड़ित होमबॉयर्स को उनका डूबा हुआ पैसा?
जिला प्रशासन और विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, नीलामी के इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरी तरह से पारदर्शी और कानूनी दायरे में रहकर अंजाम दिया जा रहा है। जिन 9 बड़े बिल्डरों की संपत्तियों की नीलामी की सूची तैयार की गई है, उनकी संपत्तियों का वैल्यूएशन (Valuation) कराया जा चुका है और जल्द ही इनकी सार्वजनिक ई-बोली (E-Auction) लगाई जाएगी। इस नीलामी से जो भी राजस्व प्राप्त होगा, उसे जिला प्रशासन के आरसी रिकवरी अकाउंट में जमा किया जाएगा और फिर तहसीलदार कार्यालय के माध्यम से उन तमाम होमबॉयर्स के खातों में सीधे पैसे भेजे जाएंगे जिनकी शिकायतें लंबे समय से लंबित पड़ी थीं। प्रशासन के इस सख्त एक्शन से उन अन्य बेईमान बिल्डरों को भी एक कड़ी चेतावनी मिल गई है जो अभी तक आम जनता की गाढ़ी कमाई दबाकर बैठे हुए थे।
घर खरीदारों में जगी नई उम्मीद, प्रशासन के इस ऐतिहासिक फैसले की हो रही चहुंओर सराहना
सालों-साल अदालतों के चक्कर काटने और थाने-चौकी के धक्के खाने के बाद आखिरकार जब जिला प्रशासन ने खुद आगे बढ़कर डिफॉल्टर बिल्डरों पर यह बड़ा हंटर चलाया है, तो गाजियाबाद के पीड़ित होमबॉयर्स ने राहत की सांस ली है। इस फैसले के सामने आने के बाद से सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के बीच डीएम और जिला प्रशासन की इस कार्रवाई की भूरी-भूरी प्रशंसा की जा रही है। जानकारों का मानना है कि यदि इसी प्रकार देश के अन्य जिलों में भी प्रशासन सख्त कदम उठाने लगे, तो रियल एस्टेट सेक्टर में हो रही धोखाधड़ी पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है। फिलहाल गाजियाबाद प्रशासन की इस मुहिम पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं क्योंकि यह देश भर के होमबॉयर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।