कांवड़ यात्रियों के लिए बदले नियम! दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर जाने पर लगा बैन- पढ़ें नया फरमान
आगामी पवित्र कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुचारु और विघ्न-रहित बनाने के लिए प्रशासन ने इस बार बेहद कड़े और अभूतपूर्व बदलाव किए हैं।
नए प्रशासनिक दिशानिर्देशों के तहत कांवड़ यात्रियों (शिवभक्तों) के दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) पर प्रवेश और पैदल चलने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवाजाही को ध्यान में रखते हुए गाजियाबाद जिले में 21 वैकल्पिक मार्ग (Alternate Routes) निर्धारित किए गए हैं, जहां मरम्मत, सुंदरीकरण और सुरक्षा व्यवस्था का काम युद्धस्तर पर जारी है।
शीर्ष अधिकारियों की हाई-लेवल बैठक: 1 हफ्ते में गड्ढा-मुक्त होंगी सड़कें
कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) की संयुक्त अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय वर्चुअल समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा के वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों सहित मंडलायुक्त, आईजी, डीआईजी और जिलाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में कड़े निर्देश दिए गए कि कांवड़ मार्गों पर गड्ढा-मुक्त सड़कें, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छ पेयजल, नियमित सफाई और बैरिकेडिंग से जुड़े सभी जरूरी इंतजाम एक सप्ताह के भीतर हर हाल में पूरे कर लिए जाएं।
एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा घेरा: तैनात रहेंगे 'एक्सप्रेसवे मित्र'
गाजियाबाद के एडीएम (सिटी) विकास कश्यप ने बताया कि जहां भी स्थानीय कांवड़ मार्ग एक्सप्रेसवे से मिलते हैं, उन सभी कटों पर 'एक्सप्रेसवे मित्र' और पुलिस बल की विशेष तैनाती रहेगी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी श्रद्धालु गलती से भी एक्सप्रेसवे पर न जा सके। शासन का स्पष्ट लक्ष्य है कि कांवड़ यात्रा के दौरान आम नागरिकों के दैनिक यातायात को भी बिना किसी बाधा के संचालित रखा जाए।
3 सुपर जोन और 1275 CCTV: सुरक्षा का ऐसा होगा त्रि-स्तरीय ढांचा
कांवड़ यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं:
- जोनल विभाजन: पूरे कांवड़ मार्ग को 3 सुपर जोन, 11 जोन और 24 सेक्टरों में बांटा गया है।
- तकनीकी निगरानी: पूरे रूट की 1275 सीसीटीवी कैमरों और हाई-टेक ड्रोन कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी की जाएगी।
- तगड़ी नाकेबंदी: 193 संवेदनशील स्थानों पर 1,437 पुलिसकर्मियों की तैनाती रहेगी और 17 स्थायी बैरियर बनाए जाएंगे।
- शिविर व्यवस्था: श्रद्धालुओं के विश्राम के लिए 157 कांवड़ शिविर (सेवा शिविर) और 12 भव्य स्वागत (प्रवेश) द्वार बनाए जा रहे हैं।