जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के नियम बदले, 2 साल पुराने मामलों में अब काटना होगा कोर्ट का चक्कर!

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के नियम बदले, 2 साल पुराने मामलों में अब काटना होगा कोर्ट का चक्कर!

यूपी के नागरिकों के लिए एक बेहद जरूरी खबर है। अगर आप अपने या परिवार के किसी सदस्य का पुराना जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की तैयारी कर रहे हैं, तो अब यह प्रक्रिया पहले जैसी आसान नहीं रही। 

उत्तर प्रदेश में जन्म-मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव लागू कर दिया गया है। नए नियमों के मुताबिक, अब आप केवल प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काटकर पुराने प्रमाण पत्र नहीं बनवा सकेंगे। इसके लिए अब कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा। यह बदलाव सीधे तौर पर उन लोगों को प्रभावित करेगा जिन्होंने समय रहते पंजीकरण नहीं कराया था। 

नए नियमों के अनुसार, प्रमाण पत्र के लिए देरी से किए गए आवेदनों को अलग-अलग समय सीमा के आधार पर बांटा गया है। यदि जन्म या मृत्यु की घटना हुए एक साल बीत चुका है, लेकिन यह अवधि दो साल से कम है, तो आवेदक को सीधे प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा। ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट (DM), उपजिलाधिकारी (SDM) या किसी अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा मामले का सत्यापन किया जाएगा। उनके आधिकारिक आदेश के बाद ही पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।

2 साल से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य

सबसे बड़ा और सख्त बदलाव दो साल से अधिक पुराने मामलों के लिए किया गया है। अगर जन्म या मृत्यु को दो साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, तो अब प्रशासनिक अधिकारियों का आदेश काम नहीं आएगा। ऐसे मामलों में प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अब 'प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट' (First Class Judicial Magistrate) का आदेश अनिवार्य कर दिया गया है। कोर्ट के आदेश के बिना ऐसे किसी भी मामले का पंजीकरण अब संभव नहीं होगा।

केंद्रीय पोर्टल पर भी हुआ नया अपडेट

नई व्यवस्था को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करने के लिए नगर निकायों और केंद्रीय जन्म-मृत्यु पंजीकरण पोर्टल के सिस्टम में भी बदलाव कर दिए गए हैं। अब जब भी कोई आवेदक दो साल से पुराने मामले को पोर्टल पर दर्ज करने का प्रयास करेगा, तो पोर्टल अनिवार्य रूप से न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की जानकारी और कॉपी मांगेगा। इसके बिना ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं होगी और आवेदकों को पहले अदालत से आदेश प्राप्त करना ही होगा।

क्यों किया गया यह बड़ा बदलाव?

यह नई व्यवस्था 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969' में किए गए हालिया संशोधन के तहत लागू की गई है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य देरी से होने वाले पंजीकरण प्रक्रिया में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकना, दस्तावेजों के सत्यापन को मजबूत करना और पूरी व्यवस्था को सख्त कानूनी निगरानी के दायरे में लाना है ताकि सही और प्रामाणिक आंकड़े ही दर्ज हो सकें।