संभल हिंसा अपडेट: मुख्य आरोपियों पर 27 जुलाई को दर्ज होंगे विवेचकों के बयान, कोर्ट जल्द सुना सकती है बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की भीषण हिंसा (Sambhal Violence) के मामले में कानूनी और पुलिसिया कार्रवाई अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। पूरे उत्तर प्रदेश की नजरें अब इस मामले पर टिकी हैं, क्योंकि आगामी 27 जुलाई को मामले की जांच कर रहे विवेचकों (Investigating Officers) के बयान कोर्ट के समक्ष दर्ज किए जाने हैं। कानूनी जानकारों के मुताबिक, यह प्रक्रिया पूरी होते ही मुख्य आरोपियों पर चल रहे मुकदमों में कोर्ट का कोई बड़ा और सख्त फैसला सामने आ सकता है। पुलिस प्रशासन इस पूरी कार्यवाही को लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
27 जुलाई को कोर्ट में क्या होगा? विवेचकों के बयानों की अहमियत
संभल हिंसा की गहराई से जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) और स्थानीय पुलिस ने इस मामले में कड़े इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक सबूत जुटाए हैं। 27 जुलाई को होने वाली सुनवाई के दौरान, विवेचक अदालत के सामने चार्जशीट (Charge Sheet) के प्रमुख बिंदुओं और आरोपियों के खिलाफ मिले पुख्ता गवाहों व सबूतों को सिलसिलेवार तरीके से रखेंगे। कानूनी भाषा में कहें तो विवेचकों का बयान किसी भी केस को अंतिम अंजाम या सजा तक पहुंचाने में रीढ़ की हड्डी माना जाता है। इनके बयानों के आधार पर ही कोर्ट आरोपियों की संलिप्तता और उन पर लगने वाली धाराओं की गंभीरता को तय करेगी।
मुख्य आरोपी वारिस पर लगा रासुका (NSA), साठा की संपत्ति होगी कुर्क
पुलिस ने जांच के दायरे को बढ़ाते हुए हिंसा के मुख्य आरोपियों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। हाल ही में दो मौतों और भीषण उपद्रव के मुख्य आरोपी मोहम्मद वारिस पर शासन के निर्देश के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA/रासुका) के तहत बड़ी कार्रवाई की गई है। लखनऊ स्थित एडवाइजरी बोर्ड के समक्ष जिला प्रशासन की दलीलों के बाद वारिस की जेल में रहने की अवधि बढ़ा दी गई है।
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विदेशी कनेक्शन आया सामने: पुलिस पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि नामजद आरोपी वारिस को अवैध हथियार मुहैया कराए गए थे, जिसके तार सीधे तौर पर दुबई में छिपे कुख्यात गैंगस्टर शारिक साठा से जुड़े हुए हैं।
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जल्द होगी कुर्की: पुलिस प्रशासन अब इस हिंसा के मास्टरमाइंड शारिक साठा के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को खंगालने के साथ-साथ उसकी संपत्तियों को कुर्क करने की कानूनी तैयारी पूरी कर चुका है। इससे पहले मामले में मुल्ला अफरोज और मोहम्मद गुलाम पर भी रासुका लगाई जा चुकी है।
4025 पन्नों की चार्जशीट और 199 गवाहों की लंबी फेहरिस्त
इस पूरे मामले में पुलिस की तत्परता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एसआईटी (SIT) ने हिंसा से जुड़े 6 मुख्य मुकदमों में अदालत के समक्ष 4,025 पन्नों की भारी-भरकम चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में समाजवादी पार्टी के स्थानीय सांसद जिया उर रहमान बर्क और जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली समेत कई प्रमुख लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।
इसके साथ ही, घटना की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग ने भी अपनी 450 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है, जिसमें 60 सरकारी अधिकारियों सहित कुल 199 गवाहों के बयान और साक्ष्य दर्ज किए गए हैं। अब जबकि 27 जुलाई को विवेचकों के बयान भी दर्ज होने जा रहे हैं, तो यह साफ है कि कानूनी शिकंजा पूरी तरह से कस चुका है और उपद्रवियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।