आ गई तारीख! अक्टूबर के आखिर में यूपी चुनाव के लिए मैदान में उतरेंगे अमित शाह
भारतीय राजनीति के केंद्र बिंदु और देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में सियासी पारा एक बार फिर चढ़ने लगा है। साल 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी सांगठनिक तैयारियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में भारतीय राजनीति के 'चाणक्य' कहे जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) अक्टूबर महीने के आखिरी दिनों में आधिकारिक तौर पर उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शाह 30 और 31 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित होने वाली पार्टी की महत्वपूर्ण प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में मुख्य रूप से शामिल होंगे और यहीं से मिशन 2027 के चुनावी अभियान का आक्रामक आगाज किया जाएगा। लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों से सबक लेते हुए भाजपा इस बार किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने जमीन से लेकर राज्य स्तर तक की कमियों को दूर करने के लिए एक खास रणनीति तैयार की है, जिसके तहत अगले कुछ महीनों का यह राजनीतिक गणित बेहद अहम माना जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि अक्टूबर के अंत में होने वाले इस दौरे के क्या मायने हैं और भाजपा का यह 3 महीने वाला चुनावी समीकरण किस तरह काम करेगा।
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक और आगामी चुनावों के लिए अमित शाह का लखनऊ दौरा
राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 30 और 31 अक्टूबर का यह दौरा उत्तर प्रदेश में बीजेपी की चुनावी दिशा और दशा तय करने वाला है। इस दो दिवसीय प्रवास के दौरान वे पार्टी के चुनिंदा वरिष्ठ पदाधिकारियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों, जिला प्रभारियों और राज्य सरकार के प्रमुख मंत्रियों के साथ मैराथन बैठकें करेंगे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति की समीक्षा करना, सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार की जमीनी हकीकत परखना और संगठन व सरकार के बीच बेहतर तालमेल बिठाना है। 2024 के लोकसभा चुनावों में यूपी के भीतर पार्टी को जो अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी, उसके पीछे के कारणों का गहराई से विश्लेषण किया जा चुका है। अब अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी उन सभी कमजोर सीटों और क्षेत्रों पर विशेष फोकस करेगी जहां विपक्षी दलों ने सेंधमारी की थी। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में न केवल चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा, बल्कि बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सीधे तौर पर शीर्ष नेतृत्व का संदेश भी दिया जाएगा।
क्या है वह '3 महीने वाला गणित'? जमीन पर किस तरह पार्टी को रीचार्ज करने की है योजना
राजनीतिक जानकारों के बीच इन दिनों इस बात की खासी चर्चा है कि भाजपा ने चुनाव से ठीक पहले के महीनों को ध्यान में रखकर एक विशेष '3 महीने का राजनीतिक गणित' तैयार किया है। इस रणनीति के तहत पार्टी का पूरा जोर निष्क्रिय हो चुके बूथों को दोबारा सक्रिय करने, नाराज मतदाताओं को मनाने और विपक्ष के चक्रव्यूह को भेदने पर रहेगा। अमित शाह के इस दौरे के बाद नवंबर और दिसंबर के महीनों में पार्टी के तमाम बड़े नेता राज्य के अलग-अलग हिस्सों में डेरा डालेंगे। इस तीन महीने के प्लान में मुख्य रूप से उन मतदाताओं और जातियों तक पहुंचना है जो पिछले कुछ समय से पार्टी से छिटक गए थे। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों और विधायकों के खिलाफ जनता में यदि किसी प्रकार की नाराजगी या एंटी-इम्बेंसी (Anti-incumbency) है, तो उसकी समय रहते थाह लेकर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि चुनाव की घोषणा से पहले ही संगठन का हर एक सिपाही पूरी तरह से प्रशिक्षित और युद्ध स्तर पर तैयार मिले।
टिकट वितरण से लेकर सांगठनिक फेरबदल तक: कड़े फैसलों और अनुशासन के दौर से गुजरेगी यूपी बीजेपी
सूत्रों का कहना है कि इस बार के चुनाव में टिकट वितरण की प्रक्रिया भी पूरी तरह से जमीनी रिपोर्ट और परफॉर्मेंस आधारित होगी। अमित शाह के नेतृत्व में होने वाली बैठकों में इस बात के स्पष्ट संकेत दिए जा सकते हैं कि किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी का प्रदर्शन लगातार कमजोर रहा है, वहां नए चेहरों को मौका देने और टिकटों में बड़े फेरबदल करने से भी पार्टी परहेज नहीं करेगी। इसके अलावा, युवाओं (Gen-Z) और नए मतदाताओं को अपने पाले में खींचने के लिए डिजिटल कैंपेन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विशेष पकड़ बनाने की हिदायत दी जाएगी। उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज रहने के लिए बीजेपी के लिए यह चुनाव साख का सवाल है, और अमित शाह की यह एंट्री इस बात का प्रमाण है कि पार्टी ने अपनी पूरी ताकत अभी से झोंक दी है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस चुनावी चाणक्य की रणनीति का क्या काट ढूंढ पाता है।