नोएडा में क्यों नहीं ढहता BJP का 'अभेद्य किला', 2012 से 2022 तक के रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े खोल रहे सियासी राज

नोएडा में क्यों नहीं ढहता BJP का 'अभेद्य किला', 2012 से 2022 तक के रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े खोल रहे सियासी राज

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछने से पहले ही दिल्ली से सटी हाई-प्रोफाइल नोएडा सीट सियासी चर्चाओं के केंद्र में आ गई है। साल 2008 के परिसीमन के बाद वजूद में आई विधानसभा क्षेत्र संख्या 61 (गौतम बुद्ध नगर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा) अब तक भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य दुर्ग साबित हुई है।

इस सीट के गठन के बाद से भगवा दल ने यहां तीन आम विधानसभा चुनाव और एक उपचुनाव जीतकर क्लीन स्वीप किया है। सबसे हैरान करने वाला पहलू हर बार बढ़ता हुआ जीत का विशाल अंतर रहा है, जहां प्रमुख विपक्षी दल कभी भी भाजपा के करीब फटकने में नाकाम रहे हैं। चेहरे बदलने के बावजूद भाजपा का दबदबा बरकरार रहा, जबकि समाजवादी पार्टी पिछले तीन दंगल से लगातार दूसरे स्थान पर सिमटती रही है।

2012 में डॉ. महेश शर्मा ने रचा इतिहास, त्रिकोणीय दंगल में खुला भाजपा का खाता

नोएडा विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनावी मुकाबला साल 2012 में देखने को मिला था। यह मुकाबला भाजपा, बसपा और सपा के बीच त्रिकोणीय सियासी जंग में बदल गया था। भाजपा के उम्मीदवार डॉ. महेश कुमार शर्मा ने 77,319 वोट हासिल कर नोएडा के पहले विधायक बनने का गौरव हासिल किया।

उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बहुजन समाज पार्टी के ओमदत्त शर्मा (49,643 वोट) को 27,676 मतों के अंतर से शिकस्त दी। इस मुकाबले में सपा के सुनील चौधरी 42,071 वोटों के साथ तीसरे पायदान पर रहे, जबकि कांग्रेस के वीएस चौहान को 25,482 मत मिले और वे चौथे स्थान पर रहे।

2014 उपचुनाव: विमला बाथम की एकतरफा जीत, सपा की चुनौती पस्त

साल 2014 के आम चुनाव में डॉ. महेश शर्मा के गौतम बुद्ध नगर से सांसद निर्वाचित होने के बाद नोएडा सीट खाली हुई। उसी वर्ष हुए उपचुनाव में भाजपा ने विमला बाथम पर दांव आजमाया, जिन्होंने जीत के अंतर को दोगुने से भी अधिक बढ़ा दिया। विमला बाथम को 1,00,433 वोट मिले, जबकि सपा प्रत्याशी काजल शर्मा 41,481 वोट ही जुटा सकीं। भाजपा ने यह उपचुनाव रिकॉर्ड 58,952 मतों के अंतर से अपने नाम किया। इस चुनाव में बसपा ने मैदान छोड़ दिया था, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र अवाना महज 17,212 वोटों पर सिमट कर अपनी जमीन खोते दिखे।

2017 में पंकज सिंह की धमाकेदार एंट्री, लाख पार पहुंचा जीत का फासला

2017 के चुनावी रण में भाजपा ने नई रणनीति के तहत केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को चुनावी मैदान में उतारा। नेतृत्व का यह प्रयोग बेहद असरदार साबित हुआ। पंकज सिंह ने 1,62,417 रिकॉर्ड वोट बटोरे, जबकि सपा के सुनील चौधरी 58,401 वोटों पर ही टिक सके। पंकज सिंह ने 1,04,016 मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज कर भाजपा की हैट्रिक पूरी की। वहीं 2012 में दूसरे स्थान पर रही बसपा इस बार तीसरे पायदान पर खिसक गई और उसके उम्मीदवार रविकांत को केवल 27,365 वोट मिले।

2022 का चुनावी रण: पंकज सिंह ने 1.81 लाख वोटों से रचा सबसे बड़ा कीर्तिमान

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर पंकज सिंह पर भरोसा जताया, तो सपा ने भी सुनील चौधरी को दोबारा मैदान में उतारा। इस बार नतीजा और भी ऐतिहासिक रहा। पंकज सिंह ने अकेले 2,44,319 वोट अपने नाम किए, जबकि सपा के सुनील चौधरी को 62,806 वोट मिले। पंकज सिंह ने 1,81,513 वोटों के प्रचंड अंतर से जीत हासिल की, जो नोएडा के चुनावी इतिहास में दर्ज अब तक का सबसे बड़ा अंतर है। यह अंतर सपा प्रत्याशी को मिले कुल वोटों से भी करीब तीन गुना अधिक था। दूसरी तरफ बसपा के कृपा राम शर्मा को 16,292 और कांग्रेस प्रत्याशी पंखुड़ी पाठक को 13,494 वोटों से ही संतोष करना पड़ा।