उत्तराखंड चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस को बहुत बड़ी राहत और धमाकेदार जीत
उत्तराखंड की राजनीति, आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और स्थानीय निकाय के रण से इस वक्त कांग्रेस पार्टी के खेमे से एक बहुत बड़ी, उत्साहजनक और राहत भरी खबर सामने आ रही है। साल 2027 में होने वाले आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सूबे के राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिहाज से कांग्रेस पार्टी के लिए यह जीत किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। राज्य के ऊधम सिंह नगर जिले के अंतर्गत आने वाली महत्वपूर्ण किच्छा और सिरौली कलां नगर पालिका परिषद के बहुप्रतीक्षित चुनाव परिणामों में कांग्रेस पार्टी ने अपने दोनों प्रत्याशियों को शानदार जीत दिलाते हुए दोनों सीटों पर पूरी ताकत के साथ अपना कब्जा जमा लिया है। इस चुनावी सफलता के बाद से कांग्रेस कार्यकर्ताओं के भीतर भारी उत्साह और जश्न का माहौल देखने को मिल रहा है, वहीं विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और लंबे कानूनी संघर्ष के बाद हुई इस मतगणना के नतीजे आने के बाद से राज्य की राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि किच्छा और सिरौली कलां के इस निकाय चुनाव में कांग्रेस ने कैसे बाजी मारी और इसके 2027 के विधानसभा चुनावों पर क्या बड़े राजनीतिक मायने हो सकते हैं।
किच्छा और सिरौली कलां नगर पालिका चुनाव परिणाम: कांग्रेस उम्मीदवारों ने दर्ज की धमाकेदार जीत, जानिए किसको कितने वोटों से मिली मात
प्राप्त चुनाव परिणामों के अनुसार, ऊधम सिंह नगर जिले की चर्चित किच्छा नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार राजेश प्रताप सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी को करारी शिकस्त दी है। कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह को कुल 19,508 वोट मिले, जबकि उनके मुख्य मुकाबले में खड़े भारतीय जनता पार्टी समर्थित या मैदान में उतरे प्रत्याशी संदीप अरोड़ा सोनू को 13,431 वोटों से संतोष करना पड़ा। इस तरह कांग्रेस उम्मीदवार ने एक बड़े अंतर यानी लगभग 6,077 वोटों के भारी अंतर से इस सीट पर शानदार जीत हासिल की। वहीं दूसरी ओर, सिरौली कलां नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद पर भी कांग्रेस पार्टी की महिला प्रत्याशी राशिदा बेगम ने अपनी मजबूत पकड़ बनाते हुए जीत का परचम लहराया। सिरौली कलां में मुख्य मुकाबला निर्दलीय प्रत्याशी फरहीन जहां के साथ था, जिन्हें राशिदा बेगम ने 1,763 मतों के अंतर से शिकस्त दी। इन दोनों ही सीटों पर कांग्रेस की इस दोहरी जीत ने पार्टी के स्थानीय संगठन में एक नई ऊर्जा भर दी है।
क्या था पूरा कानूनी विवाद: हाईकोर्ट की रोक से लेकर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश तक का पूरा घटनाक्रम
इन दोनों नगरपालिकाओं का यह चुनाव और इसके नतीजे लंबे समय से कानूनी दांव-पेच और विवादों के साये में अटके हुए थे। निकाय चुनावों की प्रक्रिया के दौरान स्थानीय स्तर पर उठे विवादों और याचिकाओं के चलते मामला पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट तक जा पहुंचा था, जहां अदालत ने मतगणना और चुनावी परिणामों पर रोक लगा दी थी। इस कानूनी अड़चन के कारण लंबे समय तक परिणाम घोषित नहीं हो सके थे, जिससे जनता और प्रत्याशियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। इसके बाद मामला देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए ऐतिहासिक हस्तक्षेप किया और एक सप्ताह के भीतर वोटों की गिनती कराकर परिणाम घोषित करने के कड़े निर्देश दिए। शीर्ष अदालत के इन निर्देशों के बाद प्रशासन ने ऊधम सिंह नगर के मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े और चाक-चौबंद इंतजामों के बीच बैलेट बॉक्स खुलवाए, जिसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो गया तथा कांग्रेस के दोनों उम्मीदवार विजयी घोषित किए गए।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले क्या हैं इस जीत के मायने: उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस को मिलेगा कितना बड़ा बूस्ट
उत्तराखंड की राजनीति में स्थानीय निकाय चुनावों को हमेशा से आगामी विधानसभा चुनावों का 'सेमीफाइनल' माना जाता है। किच्छा सीट का राजनीतिक महत्व इस लिहाज से भी बहुत ज्यादा है क्योंकि यह क्षेत्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और जमीनी समीकरणों के केंद्र में आता है। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद प्रदेश कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं ने इसे जनता की जीत करार देते हुए कहा है कि यह परिणाम इस बात का स्पष्ट संदेश है कि राज्य की जनता अब बदलाव चाहती है और आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। एक तरफ जहां पार्टी के भीतर अक्सर अंदरूनी कलह और बयानबाजी की खबरें सुर्खियां बनती रहती हैं, वहीं इस धरातलीय जीत ने पार्टी नेतृत्व को एकजुट होकर आगे बढ़ने का एक मजबूत मंच प्रदान कर दिया है। बहरहाल, स्थानीय निकाय की इन दो सीटों पर मिली इस बड़ी सफलता ने उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों का पारा पूरी तरह से हाई कर दिया है और आने वाले दिनों में सियासी दलों की गतिविधियां और अधिक तेज होने की पूरी उम्मीद है।