देश की दूसरी सबसे लंबी रेल सुरंग तैयार! ऋषिकेश-कर्णप्रयाग प्रोजेक्ट में आया बड़ा अपडेट
उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय भूगोल को सुगम बनाने की दिशा में भारतीय रेलवे ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग न्यू ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। परियोजना की अत्यंत महत्वपूर्ण एस्केप सुरंग-1 (Escape Tunnel-1) का खुदाई कार्य शुक्रवार को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।
इस अहम सफलता के साथ परियोजना में अब तक कुल 41 सुरंगों के निर्माण का कार्य संपन्न हो चुका है। अपनी 10.847 किलोमीटर की पूरी लंबाई में आपस में जुड़ने के बाद यह सुरंग अब भारतीय रेलवे नेटवर्क की दूसरी सबसे लंबी रेल सुरंग के रूप में स्थापित हो चुकी है।
खारी-बनिहाल टनल-49 के बाद देश की दूसरी सबसे लंबी सुरंग
भारतीय रेलवे के इतिहास में अब तक की सबसे लंबी सुरंग का कीर्तिमान जम्मू-कश्मीर में उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना के कटरा-बनिहाल सेक्शन में दर्ज है। वहां खारी और बनिहाल स्टेशनों के बीच निर्मित टनल-49 की कुल लंबाई 12.895 किलोमीटर है। अब ऋषिकेश-कर्णप्रयाग प्रोजेक्ट की यह 10.847 किमी लंबी एस्केप टनल-1 देश में दूसरे पायदान पर आ गई है, जो सामरिक और नागरिक दोनों दृष्टिकोण से उत्तराखंड के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।
मेन बाउंड्री थ्रस्ट और कमजोर चट्टानों के बीच जीता इंजीनियरिंग का दंगल
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस सुरंग का निर्माण कार्य पूरा करना किसी बड़ी तकनीकी चुनौती से कम नहीं था। पूरी टनल हिमालय के अत्यंत संवेदनशील, अत्यधिक मुड़ी हुई और भ्रंश (Fault Lines) वाली चट्टानों के बीच से होकर गुजरती है। निर्माण के दौरान कई स्थानों पर चट्टानों में बड़े पैमाने पर दरारें, भूस्खलन और अत्यधिक टूट-फूट की गंभीर स्थिति सामने आई। विशेषकर मेन बाउंड्री थ्रस्ट (MBT) के निकट मोटे माइलोनाइट जोन के उभरने से भूगर्भीय चुनौतियां चरम पर पहुंच गई थीं। इन तमाम अवरोधों को पार करते हुए अंतिम ब्रेकथ्रू हासिल करना भारतीय इंजीनियरों की उच्च तकनीकी दक्षता, आधुनिक मशीनरी और दृढ़ संकल्प का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
ढालवाला से नीर गड्डू तक जुड़ी निकास सुरंग, 24 घंटे जुटे हैं 1000 कर्मी
परियोजना प्रबंधक निशीथ शर्मा ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि ढालवाला से नीर गड्डू के बीच इस 10 किलोमीटर से अधिक लंबी निकास सुरंग का ब्रेकथ्रू होना निर्माण कार्य की रफ्तार को नई दिशा देगा। प्रोजेक्ट को तय समयसीमा में धरातल पर उतारने के लिए लगभग एक हजार तकनीकी विशेषज्ञ और श्रमिक 24 घंटे निरंतर कार्य कर रहे हैं। सुरक्षा के कड़े मानकों और आधुनिक अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग गाइडलाइंस का पालन करते हुए ड्रिलिंग और लाइनिंग के कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है।
125 किमी लंबे ट्रैक पर होंगी 28 मुख्य सुरंगे, अगले एक साल में 5 और ब्रेकथ्रू
उप महाप्रबंधक (सिविल) ओपी मालगुड़ी ने स्पष्ट किया कि 125 किलोमीटर लंबी यह परियोजना केवल पटरियां बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देवभूमि के गढ़वाल क्षेत्र की आर्थिकी और पर्यटन को बदलने का माध्यम है। पूरी परियोजना में कुल 28 मुख्य सुरंगे शामिल हैं, जिनमें से रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने अब तक 22 सुरंगों का ढांचा तैयार कर लिया है। रेलवे का लक्ष्य है कि अगले एक वर्ष के भीतर शेष बचे 5 ब्रेकथ्रू भी पूरे कर लिए जाएं, जिससे योग नगरी ऋषिकेश सीधे कर्णप्रयाग से सुपरफास्ट रेल नेटवर्क के जरिए जुड़ जाएगी।