170KMpH की रफ्तार से टकराएगा तूफान अर्नब, अगले 13 घंटे में आएगी आफत

170KMpH की रफ्तार से टकराएगा तूफान अर्नब, अगले 13 घंटे में आएगी आफत

कुदरत का भयंकर कहर भारत के तटीय राज्यों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफान 'अर्नब' अब एक अति भीषण चक्रवाती तूफान (Extremely Severe Cyclonic Storm) में तब्दील हो चुका है और 170 किलोमीटर प्रति घंटे की खौफनाक रफ्तार से तट से टकराने के लिए तैयार है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 13 घंटे पूरे पूर्वी तटीय क्षेत्र के लिए बेहद नाजुक और आफत भरे साबित होने वाले हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बेहद गंभीर चेतावनी जारी करते हुए ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के तटीय जिलों में रेड अलर्ट घोषित कर दिया है।

आसमान में छाए घने काले बादलों, समुद्र में उठती कई फीट ऊंची लहरों और तूफानी हवाओं के तांडव ने तटीय आबादी की नींद उड़ा दी है। प्रशासन ने संभावित तबाही को देखते हुए आपातकालीन तैयारियां तेज कर दी हैं, ताकि जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

महातूफान अर्नब का भीषण लैंडफॉल और तटीय इलाकों में रेड अलर्ट: जानिए अगले 13 घंटे में कितना बड़ा खतरा मंडराने वाला है?

मौसम विभाग के रेडार डेटा और उपग्रह चित्रों से मिली ताजा जानकारी के मुताबिक तूफान अर्नब की गति लगातार तीव्र होती जा रही है। यह चक्रवात पिछले कुछ घंटों के दौरान उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा की ओर तेजी से बढ़ा है और इसके लैंडफॉल के समय 150 से 170 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की पूरी संभावना है। इतनी तेज रफ्तार हवाएं विशालकाय पेड़ों को जड़ से उखाड़ने, बिजली के खंभों को धराशायी करने, पक्के मकानों को नुकसान पहुंचाने और मोबाइल टावरों को पूरी तरह ध्वस्त करने में सक्षम हैं।

तूफान के साथ होने वाली अति-मूसलाधार बारिश से निचले इलाकों में भीषण जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने का अंदेशा जताया गया है। मौसम विभाग ने अगले 13 घंटे के दौरान समुद्र में 10 से 15 फीट ऊंची ज्वारीय लहरें (Storm Surge) उठने की आशंका जताई है, जिससे तटीय गांवों और रिहाइशी बस्तियों के पानी में समा जाने का बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

एनडीआरएफ, भारतीय नौसेना की तैनाती और युद्ध स्तर पर खाली कराए जा रहे तटीय इलाके

चक्रवात अर्नब के आसन्न खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह से हाई अलर्ट पर आ चुका है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 40 से अधिक टीमों को संवेदनशील जिलों में पहले ही तैनात कर दिया गया है, जबकि राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और अग्निशमन सेवाएं भी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सड़कों पर उतर चुकी हैं। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल (Coast Guard) के जहाजों तथा हेलीकॉप्टरों को स्टैंडबाय पर रखा गया है ताकि किसी भी आकस्मिक बचाव अभियान को बिना देरी के अंजाम दिया जा सके।

स्थानीय प्रशासन की मदद से निचले और कच्चे मकानों में रहने वाले लाखों लोगों को सुरक्षित चक्रवात आश्रय स्थलों (Cyclone Shelters) में स्थानांतरित करने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है और सभी बंदरगाहों पर खतरे के महानिशान वाले सिग्नल लगा दिए गए हैं। बिजली और संचार व्यवस्था को बहाल रखने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीमों का गठन किया गया है।

ट्रेनों का परिचालन रद्द, उड़ानों पर ब्रेक और आम जनता के लिए विशेष एडवाइजरी

महातूफान के भयानक असर को देखते हुए भारतीय रेलवे ने तटीय मार्गों से गुजरने वाली 100 से अधिक एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों को अस्थायी रूप से रद्द कर दिया है। इसके साथ ही विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर और कोलकाता जाने वाली कई उड़ानों के समय में बदलाव किया गया है या फिर उन्हें पूरी तरह रद्द कर दिया गया है। सड़क यातायात भी सुरक्षा के लिहाज से रोक दिया गया है ताकि सड़कों पर पेड़ या पोल गिरने से कोई बड़ी दुर्घटना न हो।

आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने आम नागरिकों से पक्के मकानों के भीतर रहने, खिड़कियों और शीशों से दूर रहने, पीने के पानी और सूखे भोजन का स्टॉक रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की मार्मिक अपील की है। अगले 13 घंटे केवल मौसम के लिहाज से ही नहीं, बल्कि लाखों जिंदगियों की सुरक्षा के नजरिए से अत्यंत परीक्षा भरे रहने वाले हैं। सरकारी मशीनरी स्थिति पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है।