पहले किया 'पास' फिर अचानक कर दिया 'फेल', उत्तराखंड की यूनिवर्सिटी का हैरान करने वाला कारनामा आया सामने
यूनिवर्सिटी प्रशासन की मनमानी और लचर कार्यप्रणाली किस तरह युवाओं के भविष्य पर भारी पड़ती है, इसका ताजा उदाहरण उत्तराखंड में देखने को मिला है। किसी विद्यार्थी का रिजल्ट बिना पुख्ता वजह के अचानक बदल देना और फिर RTI में उत्तर पुस्तिका मांगने पर उसे नष्ट कर देना, परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गहरा संकट खड़ा करता है।
हाल ही में राज्य सूचना आयोग ने श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की इस गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है।
क्या है पूरा मामला? पास से फेल करने का खेल
हरिद्वार के फेरूपुर क्षेत्र के निवासी और पेशे से वकील मनोज कुमार ने अपनी बेटी अवनी कश्यप (बीएससी बायो) के परीक्षा परिणाम में धांधली की शिकायत की थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रथम सेमेस्टर में छात्रा को वेबसाइट पर पास दिखाया गया था और परिवार ने मार्कशीट भी डाउनलोड कर ली थी। कुछ समय बाद विवि प्रशासन ने वह रिजल्ट हटाकर नया रिजल्ट अपलोड किया, जिसमें छात्रा को कई विषयों में फेल कर दिया गया। आगे के सेमेस्टर में भी अंकतालिका में ग्रेडिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए।
RTI अपील के दौरान ही बेच दी गईं उत्तर पुस्तिकाएं
जब पीड़ित परिवार ने इस गड़बड़ी के खिलाफ आरटीआई (RTI) लगाकर उत्तर पुस्तिकाओं की सर्टिफाइड कॉपियां मांगी, तो विश्वविद्यालय का एक और हैरान करने वाला कारनामा सामने आया।
मामले की सुनवाई चल ही रही थी कि विवि प्रशासन ने 25 दिसंबर 2025 को उन उत्तर पुस्तिकाओं को नीलाम करके नष्ट कर दिया। सूचना आयुक्त कुशलानंद ने इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि जब तक किसी मामले पर अंतिम फैसला न हो, तब तक संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाना कानूनी रूप से जरूरी था।