दिल्ली में पूरे दिन इंतजार करते रहे हरीश रावत, पार्टी छोड़ने की अटकलों पर तोड़ी चुप्पी; कह दी बड़ी बात

दिल्ली में पूरे दिन इंतजार करते रहे हरीश रावत, पार्टी छोड़ने की अटकलों पर तोड़ी चुप्पी; कह दी बड़ी बात

उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय तक शीर्ष पर रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को इन दिनों पार्टी के भीतर ही अप्रत्याशित स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। अपनी 'जनसंवाद यात्रा' और 'धन्यवाद यात्रा' को लेकर उठे विवाद के बाद अपना पक्ष रखने दिल्ली पहुंचे वरिष्ठ नेता को गुरुवार को दिनभर शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के लिए इंतजार करना पड़ा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों में व्यस्तता के कारण आलाकमान के नेताओं से उनकी सीधी बातचीत नहीं हो सकी। अब शुक्रवार को उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा के साथ उनकी मुलाकात की संभावना जताई जा रही है।

हाईकमान द्वारा जनसंवाद यात्रा को लेकर स्पष्टीकरण मांगे जाने से आहत हरीश रावत पहले ही सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि छह दशकों के लंबे राजनीतिक सफर में उनसे इस तरह कभी जवाब-तलब नहीं किया गया। इसके बाद उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें भी तेज हो गई थीं। हालांकि, दिल्ली के वसंत कुंज स्थित आवास पर दिन बिताते हुए रावत ने इन कयासों पर विराम लगा दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार से कभी अलग नहीं हो सकते और अंतिम समय में कांग्रेस के तिरंगे झंडे में ही लिपटकर जाना चाहते हैं।

दरअसल, उत्तराखंड कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं ने हाईकमान से शिकायत की थी कि हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा प्रदेश संगठन के समानांतर एक अलग शक्ति प्रदर्शन है। इसके बाद प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने उनसे स्थिति स्पष्ट करने को कहा, जबकि संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इस पर सख्त रुख अपनाया। कभी एक फोन कॉल पर 10 जनपथ और पार्टी संगठन के दरवाजे खुलवाने वाले कद के नेता के लिए 60 साल के राजनीतिक सफर में यह पहला मौका है जब उन्हें अपनी ही पार्टी में स्पष्टीकरण देने के लिए इंतजार की घड़ी देखनी पड़ रही है।