चुनाव आयोग विवाद पर दिल्ली में सियासी संग्राम, विपक्ष के सड़क मार्च के बीच भाजपा ने बदला गेमप्लान

चुनाव आयोग विवाद पर दिल्ली में सियासी संग्राम, विपक्ष के सड़क मार्च के बीच भाजपा ने बदला गेमप्लान

एसआईआर विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के तीखे हमलों के बीच सत्ता पक्ष ने अपनी रणनीति दिल्ली की सड़कों से हटाकर सीधे जनता के बीच केंद्रित कर दी है। राजधानी दिल्ली में पिछले तीन दिनों से जारी विपक्षी दलों के सड़क मार्च और राजनीतिक बयानबाजी का मुकाबला करने के साथ-साथ सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की मुख्य चिंता आम जनता के बीच विश्वसनीयता को बनाए रखने की है। विपक्ष जहां संवैधानिक संस्था की कार्यशैली पर सवाल उठाकर माहौल बनाने में जुटा है, वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल जमीनी स्तर पर मतदाताओं के साथ सीधा संपर्क साधने में लग गए हैं।

मॉनसून सत्र के बाद से लगातार हमलावर विपक्ष को काउंटर करने के लिए राजग ने सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को मजबूत करने की योजना बनाई है। इससे पहले छात्रों और युवा वर्ग की मांगों पर त्वरित फैसले लेकर आंदोलन को शांत करने के बाद सरकार अब एसआईआर विवाद पर बनने वाले किसी भी संभावित नैरेटिव को बेअसर करने में जुटी है। सोशल मीडिया पर फैल रहे असंतोष और विपक्षी नैरेटिव की काट के लिए पार्टी ने अपने सेवा संकल्प अभियान को तेज कर दिया है, जिसके जरिए खासकर युवाओं और क्षेत्रीय वर्गों से सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है।

जानें भाजपा के प्रवक्ताओं ने क्या कहा

विपक्ष के आरोपों पर भाजपा ने मोर्चा संभालते हुए अपने प्रवक्ताओं और प्रमुख नेताओं को मैदान में उतार दिया है। पार्टी के एक महासचिव के अनुसार, लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार अविश्वास जताना लोकतांत्रिक मर्यादाओं को चोट पहुंचाता है, जिसे आम जनता स्वीकार नहीं करेगी। वहीं लोजपा (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि यदि विपक्ष को कोई तकनीकी या प्रक्रियागत संशय है, तो उसे सड़कों पर हंगामा करने के बजाय सीधे चुनाव आयोग के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए। राजग नेताओं ने दावा किया कि इन सियासी हमलों से गठबंधन की एकजुटता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

भाजपा ने गुरुवार को दिल्ली में तीन अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर राष्ट्रीय राजधानी में अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया। भाजपा नेता सिद्धार्थ यादव ने कहा कि सड़कों पर दिख रही तस्वीरें किसी लोकतांत्रिक आंदोलन की नहीं बल्कि अराजकता फैलाने की कोशिश हैं, जिसमें आम जनता की कोई भागीदारी नहीं है। वहीं प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस इन प्रदर्शनों के जरिए पड़ोसी देशों जैसी अस्थिरता पैदा करने की फिराक में है। पार्टी ने आंदोलन को नियंत्रित करने में जुटी महिला पुलिसकर्मियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार की भी कड़ी निंदा करते हुए इसे कानून-व्यवस्था के खिलाफ बताया।