स्पीकर के नोटिस से 20 बागी सांसदों पर संकट: कोलकाता बैठक से 10 नदारद, मांगा 2 हफ्ते का वक्त

स्पीकर के नोटिस से 20 बागी सांसदों पर संकट: कोलकाता बैठक से 10 नदारद, मांगा 2 हफ्ते का वक्त

तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) से हाथ मिलाने वाले 20 लोकसभा सांसदों के सामने कानूनी और राजनीतिक संकट गहरा गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा दल-बदल विरोधी कानून के तहत जारी अयोग्यता नोटिस का जवाब देने के लिए तय दो सप्ताह की मोहलत गुरुवार को खत्म हो गई। समयसीमा समाप्त होते ही इन सांसदों ने अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए स्पीकर से दो सप्ताह का अतिरिक्त समय देने की गुहार लगाई है। अगर स्पीकर राहत देते हैं, तो यह इस कानूनी खींचतान में सांसदों को मिला चौथा सेवा विस्तार होगा।

नोटिस की मियाद पूरी होने के बीच कोलकाता के एक निजी होटल में वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय की अगुवाई में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक का मुख्य मकसद आगे की कानूनी लड़ाई और राजनीतिक रणनीति तय करना था, लेकिन 20 में से केवल 10 सांसद ही पहुंचे। आधे सांसदों के गैरहाजिर रहने से राजनीतिक गलियारों में बागी खेमे के भीतर ही नई फूट की चर्चाएं तेज हो गईं। अनुपस्थित रहने वाले प्रमुख चेहरों में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार, माला रॉय, जून मालिया, पार्थ भौमिक, मिताली बाग, कालीपद सोरेन, अभिनेता देव और असीत माल शामिल रहे।

बैठक में मौजूद नेताओं ने दरार की अटकलों को खारिज करते हुए सफाई दी कि गैरहाजिर सदस्यों से फोन पर बात हुई थी; कुछ नेता विदेश में हैं तो कुछ पारिवारिक कारणों या क्षेत्रीय कार्यक्रमों में फंसे थे। सांसद शताब्दी रॉय ने इसे तवज्जो न देते हुए कहा कि कौन आया और कौन नहीं, यह अहम नहीं है। वहीं सांसद शर्मिला सरकार ने आंतरिक मतभेद से इनकार किया और अभिनेत्री व सांसद रचना बनर्जी ने इसे दुर्गा पूजा से पहले का सामान्य मेल-मिलाप करार दिया। बैठक में सुदीप बंद्योपाध्याय के साथ अबू ताहिर, खलीलुर रहमान, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, प्रसून बनर्जी, बापी हलदर और अरूप चक्रवर्ती मौजूद रहे।

पूरा विवाद दल-बदल विरोधी कानून के तहत दायर याचिकाओं से जुड़ा है, जिसमें सांसदों पर पार्टी लाइन तोड़ने और NCPI के साथ जाने को लेकर अलग-अलग आरोप लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में तृणमूल के ममता बनर्जी खेमे की कानूनी पहल के बाद स्पीकर कार्यालय ने यह नोटिस जारी किए थे। इससे पहले सांसदों ने 4 हफ्ते मांगे थे लेकिन उन्हें 2 हफ्ते ही दिए गए थे। TMC के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी पहले ही कह चुके हैं कि एक साल के भीतर इन सभी 20 सांसदों की सदस्यता रद्द हो सकती है और उनकी सीटों पर उपचुनाव होंगे। अब सबकी निगाहें लोकसभा स्पीकर के फैसले पर टिकी हैं कि क्या उन्हें जवाब के लिए और मोहलत मिलती है या कार्रवाई आगे बढ़ती है।