चंपावत में रचा गया इतिहास: हाथों में 'बग्वाल की ढाल' और CM धामी का वो फैसला जिसने जीत लिया पूरे उत्तराखंड का दिल
उत्तराखंड में शासन को आम जनता और दूरस्थ इलाकों तक पहुंचाने के लिए CM पुष्कर सिंह धामी ने एक बड़ी पहल की है। रविवार को राज्य मंत्रिमंडल की मीटिंग राजधानी देहरादून से बाहर, भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे चंपावत जिले के बनबसा में आयोजित की गई। एनएचपीसी परिसर में हुई इस ऐतिहासिक मीटिंग के जरिए प्रदेश सरकार ने यह साफ संदेश दिया है कि अब सीमांत क्षेत्र भी विकास की मुख्यधारा से सीधे जुड़ेंगे। चंपावत में यह पहली बार है जब पूरी सरकार इस तरह ग्राउंड जीरो पर पहुंची।
हाथों में दिखी देवीधुरा की पारंपरिक ढाल
इस खास कैबिनेट मीटिंग में न सिर्फ अहम फैसले लिए गए, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और विरासत की शानदार झलक भी देखने को मिली। CM पुष्कर सिंह धामी और उनके कैबिनेट मंत्रियों के हाथों में देवीधुरा की मशहूर बग्वाल परंपरा में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक ढाल ‘फर्रा’ या ‘छन्तोली’ नजर आई। बता दें कि देवीधुरा की बग्वाल राज्य की एक विशिष्ट पहचान है, जिसमें पत्थरों की मार से बचने के लिए बांस या रिंगाल की खपच्चियों से बनी इस छतरीनुमा ढाल का उपयोग किया जाता है। कैबिनेट में इसका प्रदर्शन स्थानीय हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के एक बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
अब सिर्फ देहरादून तक सीमित नहीं रहेगी सरकार
मीटिंग के दौरान सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में कैबिनेट की मीटिंगें केवल देहरादून के वातानुकूलित कमरों तक सीमित नहीं रहेंगी। सरकार अब प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जाकर ऐसी मीटिंगें करेगी। इस कदम से स्थानीय समस्याओं, क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और वहां के विकास की वास्तविक संभावनाओं को सीधे शासन के सामने रखने में बड़ी मदद मिलेगी। जब सरकार खुद जनता के बीच जाएगी, तो जन अपेक्षाओं को समझना और उन पर तुरंत फैसले लेना काफी आसान हो जाएगा।
सीमांत क्षेत्रों का विकास ही असली लक्ष्य
CM ने जोर देते हुए कहा कि सीमांत इलाके केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि राज्य की सुरक्षा, संस्कृति और विकास के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण हैं। सरकार का सीधा फोकस इन इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने, पर्यटन को बढ़ावा देने और कनेक्टिविटी सुधारने पर है। धामी सरकार की यह प्रतिबद्धता है कि चाहे मैदानी इलाके हों या फिर दूरस्थ सीमांत गांव, पूरे उत्तराखंड का एक समान और संतुलित विकास सुनिश्चित किया जाए।