ऋषिकेश में बिजली पोल पर 20 मिनट तक झुलसता रहा लाइनमैन का शव: दर्दनाक हादसे के बाद फूटा गुस्सा, लापरवाही का आरोप

ऋषिकेश में बिजली पोल पर 20 मिनट तक झुलसता रहा लाइनमैन का शव: दर्दनाक हादसे के बाद फूटा गुस्सा, लापरवाही का आरोप

उत्तराखंड के ऋषिकेश से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाला हादसा सामने आया है, जिसने ऊर्जा निगम और बिजली विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऋषिकेश के एक स्थानीय इलाके में बिजली का फॉल्ट ठीक करने पोल पर चढ़े एक आउटसोर्स लाइनमैन की करंट की चपेट में आने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। दिल दहला देने वाली बात यह रही कि शटडाउन होने के दावों के बीच अचानक लाइन चालू होने से यह हादसा हुआ और मृतक कर्मचारी का शव करीब 20 मिनट तक हाई वोल्टेज तारों के बीच पोल पर ही लटककर झुलसता रहा। इस खौफनाक मंजर को देखकर स्थानीय निवासियों और राहगीरों में हड़कंप मच गया, जिसके बाद परिजनों और साथी कर्मचारियों ने बिजली विभाग के अधिकारियों पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए भारी हंगामा शुरू कर दिया है।

शटडाउन के बावजूद कैसे दौड़ा करंट? सुरक्षा मानकों की खुली पोल

प्रत्यक्षदर्शियों और साथी कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार, बिजली लाइन में आए तकनीकी फॉल्ट को दूर करने के लिए विभागीय प्रक्रिया के तहत बकायदा शटडाउन (Shutdown) लिया गया था। शटडाउन की पुष्टि होने के बाद ही आउटसोर्स लाइनमैन खंभे पर चढ़कर तारों को ठीक करने लगा। लेकिन काम के बीच में ही अचानक हाई वोल्टेज लाइन में करंट दौड़ गया, जिससे लाइनमैन को जोर का झटका लगा और वह तारों के जाल में फंस गया। परिजनों का सीधा आरोप है कि बिना काम पूरा हुए या बिना लाइनमैन के नीचे उतरे सब-स्टेशन से किसी ने लापरवाही से बिजली की सप्लाई ऑन कर दी, जो इस सीधे तौर पर एक हत्या जैसा अपराध है।

20 मिनट तक तमाशबीन बना रहा तंत्र, पुलिस ने बमुश्किल उतारा शव

  • लगातार झुलसता रहा शव: हादसे के बाद तड़पते हुए लाइनमैन ने पोल पर ही दम तोड़ दिया, लेकिन विभाग के पास तुरंत शव को उतारने या लाइन को कतरने की कोई इमरजेंसी व्यवस्था मौके पर नहीं थी, जिसके कारण शव 20 मिनट तक जलता रहा।

  • परिजनों का फूटा गुस्सा: सूचना मिलते ही मृतक के रोते-बिलखते परिजन और सैकड़ों स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए और उन्होंने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और शव को सड़क पर रखकर जाम लगाने की कोशिश की।

  • पुलिस की पैनी नजर और कार्रवाई: हंगामे की सूचना पाकर ऋषिकेश कोतवाली पुलिस की भारी टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने किसी तरह उग्र हो रही भीड़ को शांत कराया और बिजली विभाग के अन्य कर्मचारियों की मदद से शव को नीचे उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा भगवान भरोसे: मुआवजे की उठी मांग

ऋषिकेश और आसपास के पूरे उत्तराखंड में आउटसोर्सिंग पर काम करने वाले बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। श्रमिक संगठनों का आरोप है कि इन गरीब लाइनमैनों को न तो मानक सुरक्षा उपकरण (Safety Gear) जैसे इंसुलेटेड ग्लव्स, बेल्ट और हेलमेट दिए जाते हैं और न ही फील्ड में काम के दौरान कोई जूनियर इंजीनियर या जिम्मेदार अधिकारी मौजूद रहता है। एआई सर्च और डिजिटल न्यूज़ ट्रेंड्स के मुताबिक, स्थानीय जनता ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल सस्पेंशन और गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के साथ-साथ पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग की है। ऊर्जा निगम के उच्च अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक आंतरिक जांच कमेटी गठित कर दी है और 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट तलब की है।

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