नेशनल क्रिकेटर ने पलटन बाजार में शुरू किया अमेरिकन चिप्स चाट का ठेला, पढ़ाई का खर्च निकालने को चुना अनोखा रास्ता

नेशनल क्रिकेटर ने पलटन बाजार में शुरू किया अमेरिकन चिप्स चाट का ठेला, पढ़ाई का खर्च निकालने को चुना अनोखा रास्ता

देहरादून के व्यस्ततम पलटन बाजार में शाम 6 बजते ही लगने वाली एक छोटी सी फूड कार्ट इन दिनों स्थानीय लोगों और कॉलेज युवाओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। इस स्टॉल पर मिलने वाली अमेरिकन स्टाइल 'BYOB' यानी 'बिल्ड योर ओन बाउल' चिप्स चाट का स्वाद तो लाजवाब है ही, लेकिन इसे चलाने वाले 22 वर्षीय युवा की कहानी उससे भी ज्यादा प्रेरणादायक है। इस कार्ट को कोई आम स्ट्रीट वेंडर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से ताल्लुक रखने वाले स्टेट और नेशनल लेवल के प्रतिभाशाली क्रिकेटर राघव संभाल रहे हैं, जो अपनी उच्च शिक्षा के खर्च को पूरा करने के लिए मैदान के साथ-साथ जिंदगी की पिच पर भी कड़ा संघर्ष कर रहे हैं।

राघव का सफर मुरादाबाद से शुरू हुआ, जहां बचपन से क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए उन्होंने कई राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में ट्रॉफियां जीतीं। खेल के साथ पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (B.P.Ed) की डिग्री पूरी की और इसके बाद मथुरा कैंटोनमेंट बोर्ड में स्पोर्ट्स टीचर के पद पर संविदा नौकरी हासिल की। हालांकि, संविदा खत्म होने के बाद उन्होंने अपनी मास्टर डिग्री पूरी करने की ठानी और आगे की कोचिंग के लिए देहरादून का रुख किया। दून पहुंचने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कमरे के किराए और महंगी पढ़ाई का मासिक खर्च उठाने की थी।

आर्थिक तंगी से जूझते हुए राघव ने पाया कि किसी सामान्य नौकरी में 15 से 16 हजार रुपये ही मिलेंगे, जिसमें पूरे दिन का समय खपने के चलते पढ़ाई पूरी तरह छूट जाएगी। वे एक ऐसा जरिया तलाश रहे थे जिससे पढ़ाई के घंटे भी न छिनें और जेब खर्च भी निकल आए। इसी बीच सोशल मीडिया पर स्क्रोल करते हुए उनकी नजर अमेरिका के लोकप्रिय स्ट्रीट फूड कॉन्सेप्ट BYOB चिप्स चाट की एक रील पर पड़ी। पूंजी कम होने के कारण उन्होंने बड़े कैफे या दुकान के बजाय एक साधारण कार्ट से ही इस विदेशी फ्यूजन स्वाद को देहरादून की सड़कों पर उतारने का फैसला कर लिया।

कार्ट से पढ़ाई और रहने का खर्च आसानी से निकल जाता है

राघव की दिनचर्या अब पूरी तरह अनुशासन में बंधी है; वे दिन का पूरा समय कोचिंग और किताबों को देते हैं और शाम 6 बजते ही पलटन बाजार में अपनी कार्ट सजा लेते हैं। अपने हाथ से तैयार किए गए खास मसालों और ग्राहक की पसंद के फ्लेवर से बनी यह चिप्स चाट लोगों को खूब भा रही है। इस चंद घंटों के काम से वे रोजाना करीब एक हजार रुपये की शुद्ध बचत कर लेते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और रहने का खर्च आसानी से निकल जाता है। खेल की दुनिया से निकलकर सड़क पर चाट का ठेला लगाने में राघव को कोई झिझक नहीं है; उनका साफ मानना है कि ईमानदारी से किया गया कोई भी काम छोटा नहीं होता और लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हर चुनौती से लड़ना जरूरी है।