उत्तराखंड में कुदरत का भयानक रूप! अचानक बंद करने पड़े इन मशहूर ट्रैक के दरवाजे, पर्यटकों में हड़कंप
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बिगड़े मौसम, मूसलाधार बारिश और भारी बर्फबारी के बाद गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन ने बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। चोटियों पर बर्फ की मोटी चादर बिछने और रास्तों में जानलेवा फिसलन बढ़ने के कारण पार्क क्षेत्र के भीतर सभी प्रमुख ट्रैक रूटों पर आम पर्यटकों, ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों की आवाजाही को अगले आदेश तक पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रशासन ने ये फरमान ट्रेकिंग दलों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया है ताकि किसी भी तरह के अनहोनी या हादसे से बचा जा सके।
26 और 27 सितंबर को हुई भारी बर्फबारी ने बिगाड़े हालात
पार्क प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक बीते 26 और 27 सितंबर को उच्च हिमालयी बेल्ट में मौसम ने अचानक करवट ली थी। इस दौरान अत्यधिक बारिश के साथ-साथ जबरदस्त हिमपात दर्ज किया गया। दिन पर दिन हुई बर्फबारी से गंगोत्री-गौमुख-तपोवन मार्ग, ऐतिहासिक गरतांग गली और खूबसूरत केदारताल ट्रैक समेत पार्क के भीतर पड़ने वाले तमाम रास्ते खतरनाक और जोखिम भरे हो गए हैं। चोटियों पर जमी बर्फ और सर्द हवाओं के चलते पर्वतारोहण अभियानों पर निकले दलों के सामने भी गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
फिसलन और मार्ग अवरुद्ध होने का गंभीर खतरा
पार्क के अधिकारियों का कहना है कि भारी हिमपात के कारण कई दुर्गम स्थानों पर पगडंडियां बर्फ से ढक चुकी हैं। तापमान में भारी गिरावट की वजह से रास्तों पर बर्फ जम गई है जिससे फिसलन बेतहाशा बढ़ चुकी है और कहीं-कहीं भूस्खलन व रास्ते टूटने का खतरा भी मंडरा रहा है। ऐसे हालात में जरा सी लापरवाही किसी भी पर्वतारोही या पर्यटक के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग और पार्क प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से गेट बंद कर दिए हैं और किसी भी दल को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
मौसम सामान्य होने और ट्रैक दुरुस्त होने के बाद ही मिलेगी अनुमति
उत्तरकाशी जिले के इस ऊंचाई वाले राष्ट्रीय उद्यान में हर साल देश-विदेश से हजारों साहसिक पर्यटक गौमुख ग्लेशियर, तपोवन और ऐतिहासिक लकड़ी के पुल वाले गरतांग गली का रुख करते हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि जब तक पूरे क्षेत्र में मौसम पूरी तरह साफ नहीं हो जाता और वन विभाग की टीमें रास्तों का जमीनी मुआयना कर उन्हें सुरक्षित घोषित नहीं कर देतीं, तब तक यह पाबंदी लागू रहेगी। पर्यटकों से अपील की गई है कि वे मौसम का पूर्वानुमान और प्रशासन के दिशा-निर्देशों को देखकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं।