2027 का सेमीफाइनल या प्रतिष्ठा की जंग; उधमसिंह नगर में भाजपा को लगा तगड़ा झटका, कांग्रेस का दोहरा कब्जा!

2027 का सेमीफाइनल या प्रतिष्ठा की जंग; उधमसिंह नगर में भाजपा को लगा तगड़ा झटका, कांग्रेस का दोहरा कब्जा!

उत्तराखंड के तराई अंचल उधमसिंह नगर में हुए नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दोहरी जीत दर्ज की है। किच्छा नगर पालिका में कांग्रेस ने निरंतर तीसरी बार अपनी बादशाहत बरकरार रखी, वहीं पहली बार गठित हुई सिरौलीकलां नगर पालिका की अध्यक्ष की कुर्सी पर भी अपना परचम लहरा दिया। नई मंडी समिति परिसर में हुई मतगणना के बाद घोषित नतीजों में किच्छा से कांग्रेस के राजेश प्रताप सिंह ने भाजपा उम्मीदवार संदीप अरोरा को 6,147 मतों के बड़े अंतर से मात दी। 

राजेश प्रताप को कुल 19,091 वोट मिले, वहीं भाजपा के संदीप अरोरा 12,944 मतों पर सिमट गए। राजेश ने चारों राउंड की गिनती में निरंतर बढ़त बनाए रखी। किच्छा के कुल 20 वार्डों में भी कांग्रेस का दबदबा दिखा, जहां उसने 10 सीटों पर जीत हासिल की, वहीं भाजपा के खाते में 6 और निर्दलीयों के पाले में 4 वार्ड गए।

उधर, पहली बार नगर पालिका के रूप में चुनाव मैदान में उतरी सिरौलीकलां में अध्यक्ष पद पर कांग्रेस प्रत्याशी राशिदा ने परचम लहराया। राशिदा को कुल 5,434 वोट मिले और उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय उम्मीदवार फरीन जहां (3,661 वोट) को 1,773 मतों से शिकस्त दी। सिरौलीकलां के वार्डों में भी कांग्रेस ने पूरी तरह क्लीन स्वीप कर दिया। वार्ड 1 से कांग्रेस की सना ने निर्दलीय मेहनाज को हराया, वार्ड 2 में कांग्रेस के फरियाद शाह ने अब्दुल वाहिद को मात दी, वार्ड 3 में कांग्रेस की रुखसार ने अदीबा को पराजित किया और वार्ड 4 में कांग्रेस के मो. शारिक ने निर्दलीय मो. अब्दुल सिराज को शिकस्त देकर जीत हासिल की। इसके साथ ही नए बोर्ड के गठन के साथ सिरौलीकलां पालिका पर पूरी तरह कांग्रेस का एकतरफा कब्जा हो गया है।

राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, इस दोहरे मुकाबले को किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ और पूर्व भाजपा विधायक राजेश शुक्ला के बीच आगामी विधानसभा इलेक्शन के सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा था। साल 2018 में किच्छा पालिका के सीमा विस्तार में सिरौलीकलां को शामिल किया गया था, मगर बाद में शासन ने इसे अलग पालिका बना दिया। कांग्रेस ने इसके विरुद्ध हाईकोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी। बाद में 7 अक्टूबर को शासन द्वारा दोनों पालिकाओं के अलग-अलग चुनाव कराने की अधिसूचना जारी होने के बाद कांग्रेस ने इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई बना लिया था।

इस पूरे चुनाव में किच्छा सीट पर कांग्रेस के राजेश प्रताप सिंह और भाजपा के संदीप अरोरा के बीच कांटे की टक्कर थी, वहीं सिरौलीकलां में भाजपा ने अपना अधिकृत प्रत्याशी नहीं उतारा था। भाजपा की ओर से पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने पूरी ताकत झोंक दी थी। मतदान के दिन विधायक तिलकराज बेहड़ और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के बीच तीखी नोकझोंक और हाथापाई तक की नौबत आ गई थी, जिसने इस मुकाबले को बेहद हाई-प्रोफाइल बना दिया था। चुनाव को व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से जोड़ने का सीधा नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा और दोनों ही सीटों पर मिली एकतरफा जीत ने तराई की सियासत में विधायक तिलकराज बेहड़ का राजनीतिक कद और ज्यादा मजबूत कर दिया है।