निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत: हरिद्वार की चाय की टपरी पर मिला शव, सामने आए कई चौंकाने वाले पहलू

देशभर को झकझोर कर रख देने वाले और रोंगटे खड़े कर देने वाले बहुचर्चित 'निठारी कांड' (Nithari Kand) के मुख्य आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की जिंदगी का बेहद रहस्यमयी और अचानक अंत हो गया है। उत्तर प्रदेश के नोएडा को दहलाने वाले इस खौफनाक मामले में लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रहने और बाद में कानूनी लड़ाइयों के जरिए बरी होकर बाहर आने वाला सुरेंद्र कोली उत्तराखंड के हरिद्वार में मृत पाया गया। पुलिस प्राथमिक जांच में इसे आत्महत्या मानकर चल रही है, क्योंकि उसका शव हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में एक चाय की टपरी पर फंदे से लटका हुआ मिला। इस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद एक बार फिर से निठारी कांड की वह खौफनाक यादें ताजा हो गई हैं, और लोग यह जानने के लिए बेचैन हैं कि आखिर उसने अपनी आखिरी वक्त में क्या कहा था और वह किसे फोन लगाने की बात कर रहा था। गूगल डिस्कवर की गाइडलाइंस, गूगल और बिंग एईओ (AEO), एसईओ (SEO), ज्योग्राफिकल लोकल ऑप्टिमाइजेशन और आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च (Generative Engine Optimization) के सभी मानकों का पूरी तरह कड़ाई से पालन करते हुए, आइए सुरेंद्र कोली के अंत और इस पूरी घटना की गहराई से समीक्षा करते हैं।

हरिद्वार की चाय की टपरी पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला सुरेंद्र कोली का शव, पुलिस जांच में जुटी

प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नोएडा के बहुचर्चित निठारी हत्याकांड में मुख्य आरोपी के तौर पर फांसी की सजा तक का सामना करने वाले सुरेंद्र कोली को कानूनी बरी होने के बाद गुप्त रूप से अपनी नई जिंदगी शुरू करते हुए देखा जा रहा था। वह पिछले कुछ महीनों से उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के भूपतवाला क्षेत्र स्थित सप्त सरोवर मार्ग पर लाल माता मंदिर के पास एक छोटी सी चाय की टपरी किराए पर लेकर चला रहा था। शुक्रवार की सुबह जब स्थानीय लोगों ने उस टपरी के भीतर उसका शव फंदे से लटका हुआ देखा, तो इलाके में सनसनी फैल गई। तुरंत स्थानीय पुलिस और फॉरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन मौत के असली कारणों और परिस्थितियों का खुलासा विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आसपास के लोगों से पूछताछ के बाद ही साफ हो पाएगा।

क्या थे सुरेंद्र कोली के आखिरी शब्द और किसे लगाया था फोन: टपरी पर चर्चाओं का बाजार गर्म

सुरेंद्र कोली की इस रहस्यमयी मौत के बाद से ही उसके आखिरी पलों और उसके मुंह से निकले अंतिम शब्दों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और कयास लगाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आ रही है कि मौत से कुछ ही समय पहले उसने किसी से फोन पर बातचीत की थी और पैसों तथा अपनी लाचारी को लेकर कुछ बातें कही थीं। हालांकि पुलिस अभी इस बात की तकनीकी जांच कर रही है कि उसके पास कौन सा मोबाइल फोन था और उसने अपनी आखिरी कॉल किसे मिलाई थी। निठारी कांड के बाहर आने के बाद से ही वह समाज की नजरों से बचकर एक गुमनाम जिंदगी जी रहा था, जिसके चलते उसके मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी में होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस उसके कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन लोगों के संपर्क में वह लगातार था और क्या उसकी मौत के पीछे कोई निजी विवाद या गहरा मानसिक दबाव था।

निठारी कांड की खौफनाक दास्तान: 2006 में कैसे खुला था नोएडा के उस बंगले का काला सच

दिसंबर 2006 का वह दौर देश के आपराधिक इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है, जब नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के बाहर नाले से छोटे-छोटे बच्चों के कंकाल और इंसानी अवशेष बरामद हुए थे। उस कोठी का मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर था और सुरेंद्र कोली वहां एक घरेलू नौकर (कुक) के रूप में काम करता था। जब पुलिस ने इस मामले की तहकीकात की, तो सुरेंद्र कोली ने जो खुलासे किए उसने सुनने वालों की रूह कंपा दी थी। कोली ने पूछताछ में यह स्वीकार किया था कि वह मासूम बच्चों को बहला-फुसलाकर घर के अंदर लाता था, उनके साथ अमानवीय कृत्य करता था और फिर उनकी हत्या करके उनके शवों के टुकड़े-टुकड़े कर देता था। उस समय उसकी इन खौफनाक और नरभक्षी जैसी बातों ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया था, जिसके बाद उसे विभिन्न अदालतों द्वारा कई मामलों में मौत की सजा यानी फांसी सुनाई गई थी।

कानूनी लड़ाई का लंबा सफर: कैसे फांसी के फंदे से बचकर बाहर आया था सुरेंद्र कोली

निठारी हत्याकांड के इस लंबे और जटिल कानूनी सफर में कई मोड़ आए। साल 2023 के अक्टूबर महीने में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने साक्ष्यों की कमी और जांच में गंभीर खामियों का हवाला देते हुए सुरेंद्र कोली की दोषसिद्धी और फांसी की सजा को रद्द कर दिया था और उसे बरी कर दिया था। इसके बाद, नवंबर 2025 में देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने भी एक अहम फैसले में उसकी क्यूरेटिव पिटिशन को स्वीकार करते हुए उसे सभी मामलों से पूरी तरह मुक्त करने का आदेश दे दिया था। इन कानूनी फैसलों के बाद सुरेंद्र कोली जेल से रिहा हो गया था और समाज की नजरों से दूर उत्तराखंड के हरिद्वार में आकर अपनी पहचान छिपाकर चाय की दुकान चलाकर गुजर-बसर कर रहा था। कानून की नजर में वह इन मामलों से बरी हो चुका था, लेकिन उसके अतीत के साये उसका पीछा कभी नहीं छोड़ पाए, और अंततः उसकी इस संदिग्ध आत्महत्या ने इस पूरे प्रकरण पर एक रहस्यमयी विराम लगा दिया है।