हाथ में जहर का असर और डिब्बे में बंद जिंदा कोबरा! रामनगर अस्पताल में सामने आया रोंगटे खड़े कर देने वाला नजारा

हाथ में जहर का असर और डिब्बे में बंद जिंदा कोबरा! रामनगर अस्पताल में सामने आया रोंगटे खड़े कर देने वाला नजारा

उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल जिले के अंतर्गत आने वाले रामनगर (Ramnagar) के संयुक्त चिकित्सालय में एक ऐसा हैरान और खौफ से भर देने वाला नजारा देखने को मिला, जिसने डॉक्टरों से लेकर वहां मौजूद मरीजों के होश उड़ा दिए। दरअसल, क्षेत्र के एक ग्रामीण इलाके में सांप के काटने (Snake Bite) के बाद एक युवक को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि पीड़ित के परिजन केवल मरीज को ही अस्पताल नहीं लाए, बल्कि वे अपने साथ प्लास्टिक के एक बड़े डिब्बे में उस पांच फीट लंबे जहरीले कोबरा सांप (Cobra Snake) को भी जिंदा पकड़कर सीधे इमरजेंसी वार्ड में घुस गए जिसने युवक को डसा था। डिब्बे के भीतर बंद किंग कोबरा को फुफकारते देख अस्पताल परिसर में अचानक भगदड़ और हड़कंप जैसी स्थिति पैदा हो गई।

डिब्बे में कोबरा देखकर भागे मरीज, डॉक्टरों के भी फूले हाथ-पांव

रामनगर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड (Emergency Ward) में तैनात डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों ने बताया कि अमूमन सर्पदंश के मरीज बेहोशी या गंभीर हालत में आते हैं, लेकिन इस तरह साक्षात काल (जहरीले सांप) को साथ लेकर अस्पताल पहुंचने की घटना ने सबको स्तब्ध कर दिया। परिजनों का तर्क था कि वे सांप को इसलिए साथ लाए हैं ताकि डॉक्टरों को यह पहचानने में कोई गलती न हो कि किस प्रजाति के सांप ने काटा है, जिससे सही एंटी-वेनम (Anti-Venom Injection) दिया जा सके। हालांकि, इस वजह से अस्पताल के वार्ड में भर्ती अन्य मरीज और उनके तीमारदार डर के मारे कमरों से बाहर भागने लगे, जिससे कुछ देर के लिए चिकित्सा सेवाएं भी प्रभावित हो गईं।

डॉक्टरों ने परिजनों को लगाई फटकार, कहा- 'यह जानलेवा लापरवाही है'

चिकित्सकों की सख्त चेतावनी: अस्पताल प्रबंधन और वरिष्ठ डॉक्टरों ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए सुरक्षाकर्मियों को बुलाया और सांप वाले डिब्बे को सुरक्षित दूरी पर रखवाया। डॉक्टरों ने पीड़ित के परिजनों को सख्त हिदायत और फटकार लगाते हुए कहा कि यह बेहद खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना कदम है। अगर अस्पताल के भीतर डिब्बे से कोबरा बाहर निकल जाता, तो वहां मौजूद सैकड़ों मरीजों और डॉक्टरों की जान गंभीर खतरे में पड़ सकती थी। डॉक्टरों ने साफ किया कि भारतीय अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाला एंटी-स्नेक वेनम पॉलीवलेंट (Polyvalent Antivenom) होता है, जो देश के सभी प्रमुख जहरीले सांपों के जहर के खिलाफ समान रूप से असरदार होता है, इसलिए सांप को पकड़कर लाना बिल्कुल भी जरूरी नहीं है।

वन्यजीव टीम को दी गई सूचना, कोबरा को सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया

अस्पताल प्रशासन ने इस अजीबोगरीब स्थिति की जानकारी तुरंत स्थानीय वन विभाग और 'सेव द स्नेक एंड वाइल्डलाइफ वेलफेयर सोसाइटी' की रेस्क्यू टीम को दी। सूचना मिलते ही सर्प विशेषज्ञ तुरंत रामनगर अस्पताल पहुंचे और उन्होंने परिजनों के कब्जे से डिब्बे में बंद अति जहरीले मोनोकल्ड कोबरा (Monocled Cobra) को अपने नियंत्रण में लिया। वन विभाग की टीम ने सांप को अस्पताल परिसर से दूर ले जाकर सुरक्षित प्राकृतिक आवास (जंगल) में मुक्त कर दिया, जिसके बाद डॉक्टरों और तीमारदारों ने राहत की सांस ली।

सही समय पर इलाज मिलने से बची युवक की जान, हालत अब स्थिर

इस पूरे ड्रामे के बीच डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए सर्पदंश से पीड़ित युवक का इलाज शुरू किया। युवक के शरीर में जहर का असर तेजी से फैल रहा था, जिसे देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तुरंत एंटी-वेनम की हाई डोज दी। रामनगर और हल्द्वानी के सीमावर्ती क्षेत्रों में बरसात के मौसम के कारण सांपों के निकलने की घटनाएं काफी बढ़ जाती हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने स्थानीय जनता से अपील की है कि सर्पदंश की स्थिति में सांप को पकड़ने या झाड़-फूंक के चक्कर में समय बर्बाद करने के बजाय सीधे मरीज को नजदीकी सरकारी अस्पताल लेकर आएं, ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके।

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