मातृशक्ति के सशक्तिकरण की गूंज, लोकगीतों के जरिए नरेंद्र मोदी के प्रति जताया आभार
उत्तराखंड की हसीन वादियों और देवभूमि के आध्यात्मिक परिवेश में इन दिनों राजनीति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पहाड़ी संस्कृति और अपनी विशिष्ट परंपराओं के लिए पूरे देश में मशहूर उत्तराखंड में हाल ही में आयोजित एक भव्य महिला संवाद कार्यक्रम के दौरान मातृशक्ति का एक अदभुत और अभूतपूर्व रूप देखने को मिला। राज्य के विभिन्न दूरदराज के पहाड़ी जिलों से भारी संख्या में पहुंची महिलाओं ने एक मंच पर एकत्रित होकर न केवल अपने अधिकारों और सामाजिक उत्थान पर खुलकर चर्चा की, बल्कि पारंपरिक लोकगीतों और लोकनृत्यों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के प्रति अपना गहरा आभार भी व्यक्त किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और उनके राजनीतिक व आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति देना था। जब पहाड़ी महिलाओं ने अपनी लोक संस्कृति की शैली में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की सराहना की, तो पूरा सभागार तालियों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से गूंज उठा। इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आज देश की नारी शक्ति हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है और देश के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनका जुड़ाव कितना मजबूत और भावनात्मक हो चुका है।
देवभूमि उत्तराखंड की मातृशक्ति और पारंपरिक लोकगीतों के जरिए आभार जताने का अनूठा अंदाज
भारत के पर्वतीय राज्यों में महिलाओं का जीवन हमेशा से काफी संघर्षपूर्ण और श्रमसाध्य रहा है, जहां वे खेतों में काम करने से लेकर जंगल से घास-लकड़ी लाने तक की जिम्मेदारियां निभाती हैं। ऐसे में पिछले कुछ वर्षों के दौरान केंद्र और राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के जीवन को आसान बनाने के लिए जो योजनाएं शुरू की गई हैं, उन्होंने इन पहाड़ी महिलाओं के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। उत्तराखंड के इस महिला संवाद कार्यक्रम में जब महिलाओं ने अपनी स्थानीय बोलियों और पारंपरिक लोकगीतों के माध्यम से अपनी बात रखी, तो उन्होंने बताया कि कैसे उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, नल से जल योजना और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उनके जीवन से संघर्ष का बोझ कम हुआ है। महिलाओं ने पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थाप पर ऐसे गीत गाए जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उनके मन का सम्मान और स्नेह साफ झलक रहा था। लोक संस्कृति के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त करने की यह अनूठी शैली इस बात का प्रमाण है कि सरकारी नीतियां जब धरातल पर उतरती हैं, तो आम जनता के दिलों में किस तरह की आत्मीय जगह बना लेती हैं। इस सम्मेलन में महिलाओं ने न केवल अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आगे आने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों की समीक्षा
किसी भी समाज का वास्तविक विकास तब तक संभव नहीं है जब तक वहां की आधी आबादी यानी महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से पूरी तरह सशक्त न किया जाए। उत्तराखंड में आयोजित हुए इस महिला संवाद के मंच पर इस बात पर विशेष रूप से मंथन किया गया कि पिछले कुछ वर्षों में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के जरिए कैसे हजारों महिलाओं ने लखपति दीदी बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों और आसान ऋण योजनाओं के कारण अब ग्रामीण महिलाएं केवल घरेलू कामकाज तक सीमित नहीं रही हैं, बल्कि वे छोटे-छोटे कुटीर उद्योगों, हैंडीक्राफ्ट, होमस्टे संचालन और कृषि आधारित व्यवसायों से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं। संवाद के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि आज देश की महिलाएं पंचायतों से लेकर संसद तक और छोटे व्यवसायों से लेकर स्टार्टअप्स तक हर जगह अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवा रही हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होने से जहां एक ओर पलायन की समस्या पर लगाम लगी है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं का आत्मविश्वास भी सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
उत्तराखंड के विकास में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और भविष्य का उज्ज्वल दृष्टिकोण
उत्तराखंड राज्य के गठन से लेकर इसके आज तक के सफर में राज्य की महिलाओं ने हमेशा एक रीढ़ की हड्डी की तरह काम किया है, क्योंकि राज्य आंदोलन से लेकर पर्वतीय अर्थव्यवस्था को संभालने तक में मातृशक्ति का योगदान अतुलनीय रहा है। आज जब राज्य में आधारभूत संरचनाओं, सड़कों, कनेक्टिविटी और पर्यटन का तेजी से विकास हो रहा है, तो उसमें सबसे बड़ा प्रत्यक्ष लाभ महिलाओं को ही मिल रहा है क्योंकि सुगम रास्ते बनने से उनके दैनिक जीवन की कठिनाइयां कम हुई हैं। इस महिला संवाद सम्मेलन में महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे न केवल अपने परिवार और समाज को आगे बढ़ाएंगी, बल्कि राज्य के विकास में भी अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगी। कार्यक्रम के अंत में सभी महिलाओं ने एक स्वर में यह विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश और प्रदेश का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित है और महिलाओं का यह सशक्तिकरण आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बनेगा। देवभूमि की इन महिलाओं का यह उत्साह और जोश यह बता रहा है कि जब देश की नारी शक्ति को सही दिशा और मजबूत समर्थन मिलता है, तो वे किसी भी असंभव दिखने वाले लक्ष्य को हासिल करने की क्षमता रखती हैं।