'कांग्रेस में वो गधे घोड़े थे', भाजपा प्रवक्ता मनवीर चौहान की टिप्पणी से मचा सियासी बवाल

'कांग्रेस में वो गधे घोड़े थे', भाजपा प्रवक्ता मनवीर चौहान की टिप्पणी से मचा सियासी बवाल

भारतीय राजनीति में बयानों के तीर और जुबानी जंग का सिलसिला कभी थमने का नाम नहीं लेता है। चुनाव हो या सामान्य दिन, राजनीतिक दलों के प्रवक्ता और नेता एक-दूसरे पर छींटाकशी करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देते। इसी कड़ी में उत्तराखंड की राजनीति से एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने राज्य के सियासी गलियारों में भारी भूचाल ला दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश प्रवक्ता मनवीर चौहान द्वारा विपक्षी पार्टी कांग्रेस को लेकर की गई एक आपत्तिजनक और विवादित टिप्पणी ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक चौपालों तक पर आग लगा दी है। मनवीर चौहान ने कांग्रेस पार्टी के आंतरिक कलह, नेताओं के दल-बदल और संगठन की स्थिति पर कटाक्ष करते हुए एक ऐसा बयान दिया, जिसके बाद कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं और बीजेपी पर शालीनता की सारी हदें पार करने का गंभीर आरोप लगा रहे हैं। इस बयानबाजी के बाद दोनों दलों के बीच का शीत युद्ध अब एक खुले और आक्रामक राजनीतिक संघर्ष में बदल चुका है।

आखिर क्या था बीजेपी प्रवक्ता मनवीर चौहान का वह बयान जिस पर मचा बवाल?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और राजनीतिक चर्चा के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए बीजेपी प्रवक्ता मनवीर चौहान ने कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और नेताओं के पाला बदलने की संस्कृति पर तीखा व्यंग्य कसा था। अपनी बात को रखते हुए उन्होंने तंज कसा कि जो लोग आज कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आ रहे हैं या जो कांग्रेस के भीतर बचे हुए हैं, उसमें जनता को यह तय करना चाहिए कि "कांग्रेस में वो गधे थे या घोड़े"। उनके इस रूपक (Metaphor) और शब्द-चयन का इस्तेमाल करते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया। हालांकि उनका मुख्य उद्देश्य यह जताना था कि कांग्रेस पार्टी अपने नेताओं को संभाल नहीं पा रही है और वहां क्षमतावान नेताओं की भारी कमी हो गई है, लेकिन जिस भाषा शैली का उन्होंने प्रयोग किया, उसने विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार और पार्टी पर हमला करने का एक बड़ा हथियार थमा दिया।

कांग्रेस ने किया तीखा पलटवार, कहा- बीजेपी की भाषा संस्कृति का पतन

बीजेपी प्रवक्ता के इस बयान के सामने आने के तुरंत बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं ने एक सुर में आक्रामक रुख अपनाते हुए भारतीय जनता पार्टी पर करारा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सत्ता के नशे में चूर बीजेपी के नेता अब अपनी भाषा की मर्यादा पूरी तरह भूल चुके हैं और वे लगातार विपक्ष के नेताओं तथा जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों का अपमान करने पर उतारू हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार राज्य की विफलताओं, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था के मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की अशोभनीय और ओछी बयानबाजी का सहारा ले रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि भाजपा नेताओं ने अपनी इस सामंती और अहंकारी भाषा शैली को नहीं बदला, तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा और जगह-जगह बीजेपी नेताओं का पुतला दहन किया जाएगा।

उत्तराखंड की राजनीति में बढ़ रहा है भाषा की मर्यादा का संकट

पिछले कुछ समय से उत्तराखंड के राजनीतिक परिदृश्य में लगातार इस तरह के बयान सामने आ रहे हैं जो राजनीतिक शिष्टाचार और गरिमा के अनुकूल नहीं कहे जा सकते। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वैचारिक लड़ाइयाँ होना लोकतंत्र की खूबसूरती है, लेकिन जब बहस के स्तर को गिराकर व्यक्तिगत या अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाने लगता है, तो आम जनता के बीच भी एक बहुत ही गलत संदेश जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि नेताओं को अपनी जनता के सामने एक आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए, लेकिन राजनीतिक रोटियां सेकने के चक्कर में भाषाई संयम को तार-तार किया जा रहा है। मनवीर चौहान के इस बयान ने एक बार फिर से इस बात को रेखांकित कर दिया है कि किस प्रकार चुनावी और राजनीतिक नफे-नुकसान के लिए राजनेता शब्दों की किसी भी सीमा को लांघने से गुरेज नहीं करते हैं।

पार्टी बचाव की मुद्रा में, आगामी दिनों में और तेज होगा सियासी घमासान

विवाद के तूल पकड़ने और कांग्रेस पार्टी द्वारा आक्रामक तेवर अपनाने के बाद अब बीजेपी संगठन और खुद प्रवक्ता मनवीर चौहान पर भी दबाव बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों से राजनीतिक तापमान तो जरूर बढ़ता है, लेकिन मूल जनसमस्याएं पीछे छूट जाती हैं। जैसे-जैसे राज्य में आगामी राजनीतिक गतिविधियां और चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे इस प्रकार के जुबानी हमले और तीखे वार-पलटवार देखने को मिलने की पूरी संभावना है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी इस विवाद पर आधिकारिक रूप से क्या सफाई पेश करती है या यह मामला आने वाले दिनों में और कौन सा नया राजनीतिक मोड़ लेता है।