देवप्रयाग में दर्दनाक सड़क हादसा: गहरी खाई में गिरी अनियंत्रित कार, दो की मौत

देवप्रयाग में दर्दनाक सड़क हादसा: गहरी खाई में गिरी अनियंत्रित कार, दो की मौत

पवित्र तीर्थस्थलों और खूबसूरत पहाड़ियों के लिए पूरी दुनिया में पहचाने जाने वाले उत्तराखंड के देवप्रयाग से एक दिल दहला देने वाली और दुखद खबर सामने आई है। पहाड़ी रास्तों पर सफर करना जितना रोमांचक और सुहाना होता है, उतनी ही जरा सी लापरवाही या वाहन का संतुलन बिगड़ना बड़े हादसों को दावत दे देता है। देवप्रयाग के पास एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में अनियंत्रित होकर एक तेज रफ्तार कार सीधे एक गहरी खाई में समा गई। इस भयानक हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और राहत-बचाव दलों के हाथ-पांव फूल गए। हादसे में कार के भीतर सवार दो यात्रियों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल होकर खाई में जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे। घटना की विकरालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एसडीआरएफ (SDRF) के जवानों को भारी मशक्कत करनी पड़ी और शवों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राफ्ट (Raft) कासहारा लेना पड़ा।

गहरी खाई में कैसे समाई कार? रूह कंपा देने वाला हादसा

प्राप्त शुरुआती विवरणों के मुताबिक, यह दुर्घटना देवप्रयाग के पास एक खतरनाक मोड़ पर उस समय घटी जब वाहन में सवार लोग किसी यात्रा या स्थानीय काम से सफर कर रहे थे। पहाड़ी रास्ते की संकीर्ण सड़कें, तीखे मोड़ और कई बार वाहन चालकों की छोटी सी चूक बड़े हादसों की वजह बन जाती है। इस मामले में भी कार अचानक चालक के नियंत्रण से बाहर हो गई और सड़क की रेलिंग या सुरक्षा दीवारों को तोड़ते हुए सैकड़ों फीट नीचे अलकनंदा या पास की गहरी नदी के किनारे जा गिरी। कार के खाई में गिरते ही उसके परखच्चे उड़ गए। गाड़ी की जोरदार आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण और राहगीर तुरंत मौके की तरफ दौड़े और अंदर फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की, लेकिन खाई की गहराई और दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण आम लोगों के लिए राहत कार्य चलाना बेहद कठिन साबित हो रहा था।

एसडीआरएफ (SDRF) की साहसिक कार्रवाई, राफ्ट के सहारे नदी पार कराए गए शव

हादसे की सूचना मिलते ही जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और स्थानीय पुलिस के साथ-साथ राज्य आपदा मोचन बल यानी एसडीआरएफ (SDRF) की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। पहाड़ी इलाके की भौगोलिक बनावट और अंधेरे या गहरी खाई के मुहाने पर बचाव कार्य करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। एसडीआरएफ के जवानों ने बिना समय गंवाए अपने आधुनिक बचाव उपकरणों, रस्सियों और लाइफ जैकेट के साथ खाई में उतरना शुरू किया। कार के भीतर से घायलों को बड़ी सावधानी से बाहर निकाला गया और एम्बुलेंस के जरिए तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं, इस भीषण हादसे में जान गंवाने वाले दोनों मृतकों के शवों को दुर्गम स्थान से निकाल कर नदी के उस पार पहुंचाने के लिए एसडीआरएफ ने विशेष रूप से राफ्ट (Raft) का इस्तेमाल किया। राफ्ट के सहारे शवों को नदी पार कराकर मुख्य मार्ग तक लाया गया, जहाँ से उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका।

पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ रहे सड़क हादसे, प्रशासन और चालकों के लिए गंभीर सबक

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में वाहन दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है। देवप्रयाग की यह घटना एक बार फिर से इस बात की याद दिलाती है कि पर्वतीय राजमार्गों पर गाड़ी चलाते समय कितनी अधिक सावधानी और सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है। ओवरस्पीडिंग, नशे में वाहन चलाना, थकान या पहाड़ी ड्राइविंग के नियमों की अनदेखी अक्सर इस तरह के भयानक हादसों को न्योता देती है। स्थानीय लोगों और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन को संवेदनशील और दुर्घटना संभावित (Black Spots) क्षेत्रों में क्रैश बैरियर और चेतावनी बोर्ड लगाने के काम में तेजी लानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की बहुमूल्य जिंदगियों को बचाया जा सके।

घायलों का चल रहा है इलाज, परिवारों में छाया मातम

इस दर्दनाक सड़क हादसे की खबर जैसे ही मृतकों और घायलों के परिजनों तक पहुँची, उनके घरों में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे अस्पताल के लिए रवाना हो चुके हैं। डॉक्टरों की टीम घायलों के बेहतर इलाज में जुटी हुई है, और कुछ घायलों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। देवप्रयाग और आसपास के पूरे इलाके में इस दुर्घटना के बाद से शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के शवों को उनके स्वजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है तथा इस बात की भी जांच की जा रही है कि आखिर दुर्घटना के वक्त कार की गति कितनी थी और क्या किसी तकनीकी खराबी के कारण यह अनियंत्रित हुई थी।