देहरादून विरासत फेस्ट में छाया ट्यूनीशिया का स्टॉल, टूटे मिरर से बने लैंप के साथ सेल्फी ले रहे लोग

देहरादून विरासत फेस्ट में छाया ट्यूनीशिया का स्टॉल, टूटे मिरर से बने लैंप के साथ सेल्फी ले रहे लोग

पहाड़ियों की रानी देहरादून की हसीन वादियों में इन दिनों संस्कृति, कला और संगीत का महाकुंभ यानी 'विरासत फेस्टिवल' (Virasat Festival Dehradun) पूरे परवान पर है। शहर के प्रसिद्ध दून स्कूल परिसर में आयोजित इस सांस्कृतिक महोत्सव में देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के कोने-कोने से आए हस्तशिल्पकार अपनी अनूठी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बार के आयोजन में अंतरराष्ट्रीय पवेलियन के भीतर उत्तर अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया (Tunisia) से आए एक विशेष स्टॉल ने दूनवासियों का सारा ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस स्टॉल पर टूटे हुए और बेकार पड़े शीशों (Broken Mirrors) तथा रंग-बिरंगे कांच के टुकड़ों से हाथों द्वारा तराश कर बनाए गए डिजाइनर लैंप्स और होम डेकोर आइटम्स मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन अनूठे लैंप्स की चमक और उनकी आकर्षक बनावट को देखने तथा उनके साथ सेल्फी लेने के लिए युवाओं और कला प्रेमियों की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं।

देहरादून के दून स्कूल में सजे विरासत फेस्टिवल में विदेशी संस्कृति और कला का अद्भुत संगम

देहरादून का विरासत फेस्टिवल हर साल अपनी भव्यता और पारंपरिक विविधता के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार का आकर्षण वैश्विक कला (Global Art) का यह अनूठा संगम है। ट्यूनीशियाई स्टॉल पर प्रवेश करते ही आगंतुकों को उत्तरी अफ्रीका की प्राचीन संस्कृति और पारंपरिक शिल्प कौशल की सोंधी खुशबू का अहसास होने लगता है। इस स्टॉल पर सजे हुए हस्तशिल्प उत्पाद इस बात का जीता-जागता उदाहरण हैं कि कैसे साधारण और बेकार समझकर फेंकी जाने वाली चीजों से भी बेहद खूबसूरत और बेशकीमती कलाकृतियां तैयार की जा सकती हैं। ट्यूनीशिया से आए कलाकारों ने देहरादून के स्थानीय लोगों को अपनी इस पारंपरिक कला के इतिहास और उसे बनाने की बारीक तकनीकों से रूबरू कराया, जिससे दून के कला प्रेमियों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।

टूटे शीशों और वेस्ट मटेरियल से कैसे तैयार होते हैं ये जादुई लैंप? जानिए ट्यूनीशियाई कारीगरों का हुनर

इस स्टॉल की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) वे लैंप और झूमर हैं, जिन्हें पूरी तरह से रीसायकल किए गए वेस्ट मटेरियल और टूटे हुए शीशों के टुकड़ों से सजाया गया है। ट्यूनीशियाई कारीगरों ने बताया कि वे बेकार पड़े कांच के टुकड़ों, टूटे हुए आईनों और धातु के फ्रेम को आपस में जोड़कर बेहद जटिल ज्यामितीय पैटर्न (Geometric Patterns) तैयार करते हैं। जब इन लैंप्स के भीतर जलती हुई रोशनी डाली जाती है, तो टूटे हुए शीशों के परावर्तन से पूरे टेंट के भीतर एक जादुई और सतरंगी रोशनी फैल जाती है, जो देखने वाले की पलकें झपकने नहीं देती। पर्यावरण संरक्षण और 'वेस्ट टू वेल्थ' (Waste to Wealth) के इस बेहतरीन कॉन्सेप्ट ने दून के पर्यावरणविदों और डिजाइनर्स का भी दिल जीत लिया है, जो इस कला को देखने के लिए बार-बार इस स्टॉल का रुख कर रहे हैं।

सेल्फी जोन बना ट्यूनीशियाई स्टॉल: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा देहरादून विरासत फेस्ट का यह रंग

जैसे ही शाम ढलती है और देहरादून के मौसम में ठंडक घुलती है, वैसे ही दून स्कूल के इस विरासत फेस्ट में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। ट्यूनीशियाई स्टॉल पर जगमगाते इन चमकीले और कलात्मक लैंप्स के सामने खड़े होकर सेल्फी (Selfie) लेने और रील्स बनाने का क्रेज युवाओं के सिर चढ़कर बोल रहा है। इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #VirasatFestival2026 और #TunisianArtDehradun जैसे हैशटैग्स के साथ इन लैंप्स की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। देहरादून के स्थानीय कॉलेज के छात्रों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इतनी अनोखी और खूबसूरत सजावट नहीं देखी, जहां कचरे या टूटे कांच को इतनी खूबी के साथ कला में बदल दिया गया हो।

स्थानीय हस्तशिल्प और ग्लोबल आर्ट का यह मेल स्थानीय कलाकारों के लिए भी बन रहा है प्रेरणा

इस अंतरराष्ट्रीय स्टॉल की सफलता ने न केवल ट्यूनीशियाई संस्कृति को देहरादून के लोगों के करीब पहुंचाया है, बल्कि स्थानीय पहाड़ी हस्तशिल्पकारों और युवा उद्यमियों के लिए भी सीखने के नए रास्ते खोले हैं। उत्तराखंड के पारंपरिक ऐपण (Aipan) कला, रिंगाल के सामान और स्थानीय ऊनी उत्पादों के बीच इस तरह की वैश्विक कलाओं की मौजूदगी से पूरा मेला परिसर एक लघु विश्व का रूप ले चुका है। दूनवासी इस बात से बेहद उत्साहित हैं कि उन्हें अपने ही शहर में बैठकर उत्तरी अफ्रीका की इस प्राचीन और समृद्ध कला का अनुभव करने का अवसर मिल रहा है। फेस्ट के आयोजकों का मानना है कि इस तरह के सांस्कृतिक आदान-प्रदान से देहरादून की वैश्विक पहचान और अधिक मजबूत होती है।

विरासत फेस्टिवल के बचे हुए दिनों में आने वाले पर्यटकों के लिए खास अपील

देहरादून के सांस्कृतिक इतिहास में एक मील का पत्थर बन चुके इस विरासत फेस्ट के कुछ ही दिन और शेष बचे हैं, और ट्यूनीशियाई स्टॉल पर उमड़ती भीड़ को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले सप्ताहांत (Weekend) में यहाँ पैर रखने की भी जगह नहीं मिलेगी। यदि आप भी देहरादून या आसपास के क्षेत्रों में रहते हैं और कला, संगीत के साथ-साथ इस विदेशी हस्तशिल्प के अद्भुत नजारों का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो दून स्कूल का यह प्रांगण आपके लिए इस हफ्ते की सबसे बेहतरीन जगह है। टूटे आईनों से बनी इन जगमगाती कृतियों की रोशनी और ट्यूनीशियाई मेहमाननवाजियों का यह सफर दूनवासियों के दिलों में लंबे समय तक एक मीठी याद बनकर बसा रहेगा।