जो महिला मंत्री दूसरों को दिलाती थी इंसाफ, आज खुद कैमरे पर फूट-फूट कर रोई! सुनिए उत्तराखंड की मंत्री की दर्दभरी दास्तान
उत्तराखंड की सियासत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने अपने ही पति के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया। अल्मोड़ा जिले की सोमेश्वर सीट से भाजपा विधायक रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू पर घरेलू हिंसा, पहली शादी छिपाकर धोखा देने, अवैध संबंध रखने, जातिसूचक गालियां देने और जान से मारने की धमकी जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। अपनी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर खौफजदा कैबिनेट मंत्री ने सोशल मीडिया पर रोते हुए एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसने पूरे प्रदेश को चौंका दिया है।
देहरादून के कैंट थाने में 15 अक्टूबर को दर्ज कराई गई इस एफआईआर में मंत्री ने अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने बताया कि 6 जुलाई 2004 को उनकी शादी गिरधारी लाल साहू से हुई थी। आरोप है कि जब भी उन्होंने पति की गलत हरकतों का विरोध किया, तो उन्हें बेदर्दी से पीटा गया और जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। सोशल मीडिया पर जारी किए गए अपने भावुक वीडियो में रेखा आर्या ने रोते हुए खुलासा किया कि उनके सरकारी आवास पर कर्मचारियों के सामने ही उनके पति ने उन्हें जलील किया। इतना ही नहीं, पति पर यह भी आरोप है कि उसने मंत्री के जाली हस्ताक्षर कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए उन्हें एक कंपनी के निदेशक पद से हटाने की साजिश रची।
इस हाई-प्रोफाइल विवाद में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग ने मामले को और भी खौफनाक मोड़ दे दिया है। रेखा आर्या ने दावा किया है कि हाल ही में एक ऑडियो सामने आया है, जिसमें आरोपी पति किसी महिला के साथ मिलकर उनकी हत्या की साजिश रचता हुआ सुनाई दे रहा है। इस सनसनीखेज खुलासे और लगातार मिल रही धमकियों के कारण मंत्री गहरे मानसिक और शारीरिक तनाव से गुजर रही थीं। इसी बीच अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें फौरन इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। पुलिस अब हत्या की धमकी, धोखाधड़ी और उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोपों के आधार पर तफ्तीश में जुट गई है।
बता दें कि रेखा आर्या उत्तराखंड की कद्दावर महिला नेताओं में गिनी जाती हैं। वह सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार चुनाव जीतकर विधायक बनी हैं। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र बराकोटी को 5,293 वोटों के कड़े अंतर से शिकस्त दी थी और कुल 26,161 वोट हासिल किए थे। इससे पहले 2017 में भी उन्होंने बराकोटी को ही हराया था। 2012 में हार का स्वाद चखने के बाद 2014 के उपचुनाव में उन्होंने शानदार वापसी की थी। महिला सशक्तिकरण का चेहरा मानी जाने वाली एक मजबूत मंत्री का यूं न्याय के लिए गुहार लगाना, हर किसी को हैरान कर रहा है।