इन्फ्लुएंसर नीतू बिष्ट कौन हैं? हल्द्वानी में मां काली बनकर बाजार में घूमीं

इन्फ्लुएंसर नीतू बिष्ट कौन हैं? हल्द्वानी में मां काली बनकर बाजार में घूमीं

सोशल मीडिया की दुनिया से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और गरमागरम विवाद से जुड़ी खबर सामने आ रही है। इंटरनेट पर अपने डेली व्लॉग्स (Daily Vlogs), शॉर्ट्स और रील्स के जरिए लाखों फॉलोअर्स के दिलों पर राज करने वाली जानी-मानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, मॉडल और व्लॉगर नीतू बिष्ट (Neetu Bisht) एक नए बखेड़े में फंस चुकी हैं। उत्तराखंड के प्रसिद्ध शहर हल्द्वानी (Haldwani) से सामने आए एक हालिया वीडियो ने सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। नीतू बिष्ट हाल ही में उत्तराखंड के इस प्रमुख शहर के एक व्यस्त बाजार में पारंपरिक और पौराणिक स्वरूप यानी मां काली का गेटअप धारण करके घूमती हुई नजर आईं थीं। उनके इस रूप और उससे जुड़ी गतिविधियों को कैमरे में कैद करके जैसे ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रील के रूप में अपलोड किया गया, वैसे ही इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया और देखते ही देखते यह मामला एक बड़ा विवाद बन गया।

बाजार में बच्चों से बातचीत और मोमोज खाने वाले दृश्यों पर भड़के लोग, वीडियो को लेकर क्यों मचा है भारी बवाल?

विवाद की मुख्य वजह वह दृश्य बताए जा रहे हैं जो वायरल हो रही रील के भीतर फिल्माए गए हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि नीतू बिष्ट मां काली के स्वरूप में बाजार के बीचों-बीच मौजूद हैं और वहां खड़े कुछ छोटे बच्चों से बातचीत कर रही हैं। वह बच्चों से उन्हें नमस्कार करने के लिए कह रही हैं और यह पूछती नजर आ रही हैं कि क्या उन्हें इस रूप से डर तो नहीं लग रहा है। इसके अलावा, वीडियो के एक अन्य हिस्से में उन्हें इसी वेशभूषा में सड़क किनारे खड़े होकर मोमोज खाते हुए भी दिखाया गया है। हिंदू संगठनों और स्थानीय नागरिकों का यह कड़ा आरोप है कि आस्था के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक मां काली के पवित्र स्वरूप को इस तरह एक सामान्य मार्केट में घूमते हुए और फास्ट फूड (मोमोज) खाते हुए दिखाना सीधे तौर पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है। आलोचकों का कहना है कि सिर्फ लाइक्स, व्यूज और पब्लिसिटी स्टंट के लिए इस तरह के संवेदनशील धार्मिक स्वरूपों का इस्तेमाल करना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

हिंदू संगठनों और करणी सेना का फूटा गुस्सा, हल्द्वानी कोतवाली पहुंचकर दर्ज कराई गई शिकायत और एफआईआर की मांग

इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर तेजी से उठने लगे हैं। करणी सेना और विभिन्न हिंदू संगठनों के तमाम कार्यकर्ता तथा पदाधिकारी भारी संख्या में इकट्ठा होकर हल्द्वानी कोतवाली पुलिस स्टेशन पहुंचे। वहां उन्होंने जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए पुलिस प्रशासन को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नीतू बिष्ट के खिलाफ संबंधित धाराओं में तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए और उनके इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस प्रशासन ने इस मामले में जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त शिकायती पत्र के आधार पर मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और तथ्यों की सत्यता परखने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इंटरनेट संस्कृति और रील्स की अंधी दौड़: कंटेंट क्रिएशन की आड़ में कहां जा रही है मर्यादा?

इस पूरी घटना ने एक बार फिर डिजिटल कंटेंट क्रिएशन और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की जिम्मेदारी को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। आज के दौर में जब हर कोई रातों-रात वायरल होने और अधिक से अधिक व्यूज पाने की होड़ में लगा हुआ है, तब कई बार संवेदनशीलता और सामाजिक-धार्मिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया जाता है। जानकारों का मानना है कि कलाकारों और डिजिटल क्रिएटर्स को अपनी रचनात्मकता का दायरा तय करते समय सार्वजनिक भावनाओं का पूरा सम्मान करना चाहिए ताकि इस तरह के अनावश्यक विवादों और तनाव से बचा जा सके। फिलहाल, नीतू बिष्ट के इस वायरल वीडियो और उस पर मिल रही प्रतिक्रियाओं को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है और सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस इस मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाती है।