बाबा नीम करौली के पावन कैंची धाम आश्रम से क्यों तेजी से गायब हो रही हैं गौरैया

बाबा नीम करौली के पावन कैंची धाम आश्रम से क्यों तेजी से गायब हो रही हैं गौरैया

उत्तराखंड की हसीन वादियों में नैनीताल के पास स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा नीम करौली के कैंची धाम आश्रम (Kainchi Dham Ashram) में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा का तांता हमेशा लगा रहता है। यहां आने वाले भक्त बाबा के दर्शन के साथ-साथ इस शांत और आध्यात्मिक घाटी की प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और यहां चहकने वाले पक्षियों का दीदार कर मंत्रमुग्ध हो जाते थे। लेकिन पिछले कुछ समय से कैंची धाम और उसके आसपास के इलाकों से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जिसने प्रकृति प्रेमियों और पर्यावरणविदों को गहरे संकट में डाल दिया है। कभी नीम करौली बाबा के इस पावन आश्रम के आसपास झुंड की शक्ल में चहकने वाली आम घरेलू गौरैया यानी हाउस स्पैरो (House Sparrow) की संख्या में लगातार भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। पर्यावरणविदों और पक्षी विशेषज्ञों की हालिया पड़ताल में जो चौंकाने वाली वजह सामने आई है, उसने यह बता दिया है कि किस तरह इंसानी दखलंदाजी और अनियोजित बदलावों ने इस आध्यात्मिक भूमि पर भी कुदरत के इन नन्हे जीवों का रहना दूभर कर दिया है।

आखिर क्या है कैंची धाम क्षेत्र में गौरैया के गायब होने की असली वजह? कंक्रीट के जंगल और बदलता शहरीकरण

कैंची धाम आश्रम के आसपास के क्षेत्रों में लगातार बढ़ते कंक्रीट के निर्माण कार्य, पक्के मकानों, होटल्स और होमस्टे की बेतहाशा बाढ़ को गौरैया के गायब होने का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, गौरैया एक ऐसा छोटा और संवेदनशील पक्षी है जो इंसानी बस्तियों के बिल्कुल पास, पुराने घरों की दीवारों के छेदों, छप्परों और पारंपरिक लकड़ियों के बीच अपने छोटे-छोटे घोंसले बनाकर रहना पसंद करती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी से कैंची धाम घाटी में पारंपरिक वास्तुकला वाले मकानों को गिराकर आधुनिक कांक्रीट और शीशे की बड़ी इमारतें बनाई गई हैं, उससे इन पक्षियों के छिपने और घोंसला बनाने की सुरक्षित जगहें पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। इसके अलावा, पहाड़ी इलाकों में लगातार बढ़ती पर्यटकों की भीड़, वाहनों का भारी शोर-शराब और प्लास्टिक कचरे का बढ़ता ढेर भी इन छोटे जीवों के प्राकृतिक आवास को नष्ट करने में मुख्य रूप से जिम्मेदार है।

आधुनिक खानपान और कीटनाशकों का घातक असर: कैसे छिन रहा है इन नन्हे पक्षियों का भोजन?

केवल आवास की कमी ही नहीं, बल्कि कैंची धाम और आसपास के ग्रामीण इलाकों में कृषि पद्धतियों में आए बदलाव और आधुनिक जीवनशैली का भी गौरैया के जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ा है। पहले के समय में लोग अपने घरों के आंगन में अनाज के दाने बिखेरते थे और खेतों में कीटनाशकों का इस्तेमाल कम होता था, जिससे इन पक्षियों को आसानी से छोटे कीड़े-मकोड़े और अनाज के दाने मिल जाते थे। लेकिन अब आधुनिक पैकेज्ड फूड कल्चर, साफ-सुथरे पक्के आंगन और खेतों में रासायनिक कीटनाशकों (Pesticides) के अंधाधुंध छिड़काव के कारण गौरैया को प्राकृतिक भोजन और विशेष रूप से उनके चूजों के लिए जरूरी प्रोटीनयुक्त कीट मिलने बंद हो चुके हैं। भोजन और पानी की तलाश में ये पक्षी अब इस क्षेत्र से पलायन करने पर मजबूर हो गए हैं या फिर दम तोड़ रहे हैं, जो पर्यावरण संतुलन के लिहाज से एक बेहद डरावनी तस्वीर पेश करता है।

बाबा नीम करौली की इस पावन धरा को बचाने के लिए क्या उठाये जा रहे हैं कदम? प्रकृति संरक्षण की उठी मांग

देश भर से कैंची धाम आने वाले लाखों भक्त और आध्यात्मिक अनुयायी इस बात से बेहद दुखी हैं कि बाबा नीम करौली की जिस पावन भूमि पर जीव-जंतुओं के प्रति अगाध प्रेम और करुणा का संदेश दिया जाता था, वहीं आज कुदरत के सबसे सुंदर नन्हे जीव संकट में पड़ गए हैं। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय संगठनों ने अब प्रशासन और आश्रम समिति से अपील की है कि कैंची धाम के आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बचाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं। घरों की छतों पर कृत्रिम घोंसले (Bird Nest Boxes) और पानी के सकोरे रखने के अभियानों को शुरू किया जा रहा है ताकि एक बार फिर से इस आध्यात्मिक घाटी में गौरैया की चहचहाहट लौट सके और कुदरत का यह अनमोल उपहार सुरक्षित रह सके।