खुद को 'जर्मनी का राजा' बताने वाले शेफ पर मुकदमा शुरू, नाम रखा है 'पीटर द फर्स्ट'
यूरोप के दिल कहे जाने वाले देश जर्मनी से एक बेहद अजीबोगरीब, सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। एक पूर्व शेफ, जिसने खुद को जर्मनी का स्वयंभू राजा घोषित कर दिया था और खुद को 'पीटर द फर्स्ट' (Peter the First) का नाम दिया था, उसके खिलाफ अब देश की अदालत में आपराधिक मुकदमा आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है। यह शख्स न केवल खुद को राजा मानता था, बल्कि उसने जर्मन संविधान और वहां की लोकतांत्रिक सरकार को पूरी तरह से नकारते हुए अपनी खुद की एक समानांतर सरकार और साम्राज्य खड़ा कर लिया था। उसने अपने अलग झंडे, करेंसी, आईडी कार्ड और यहां तक कि अपनी एक समानांतर बैंक प्रणाली भी बना ली थी। जर्मन न्याय प्रणाली और सुरक्षा एजेंसियों ने जब इस अवैध साम्राज्य के काले कारनामों पर शिकंजा कसा, तो पूरे देश में हड़कंप मच गया। अब इस स्वयंभू राजा और उसके सहयोगियों पर तख्तापलट की साजिश, धोखाधड़ी और असंवैधानिक गतिविधियों को अंजाम देने के गंभीर आरोपों के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है।
'शेफ' से लेकर 'किंग पीटर द फर्स्ट' बनने की पूरी कहानी और साम्राज्य का खाका
इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु पीटर फिट्ज़ेक नामक एक पूर्व शेफ है, जिसने वर्षों पहले अपना कुकिंग का काम छोड़कर कट्टरपंथी और चरमपंथी विचारधारा का रास्ता चुन लिया था। उसने जर्मनी में 'राइशबर्गर' (Reichsbürger) आंदोलन से प्रेरणा लेते हुए 'किंगडम ऑफ जर्मनी' नाम से एक संगठन बनाया और खुद को उसका सम्राट यानी 'पीटर द फर्स्ट' घोषित कर दिया। इस शख्स ने पूर्वी जर्मनी के एक छोटे से इलाके में जमीन खरीदकर वहां अपना तथाकथित 'शाही दरबार' सजाया था। पीटर का दावा था कि आधुनिक जर्मन देश कानूनी रूप से अस्तित्व में ही नहीं है और केवल उसका साम्राज्य ही असली जर्मनी का प्रतिनिधित्व करता है। उसने अपने हजारों समर्थकों और अनुयायियों को इस बात के लिए राजी कर लिया कि वे जर्मन सरकार को टैक्स देना बंद कर दें और उसके साम्राज्य का हिस्सा बनें।
बैंक, करेंसी और आईडी कार्ड: कैसे चलाई जा रही थी समानांतर सरकार
यह केवल किसी व्यक्ति का पागलपन या मानसिक भ्रम नहीं था, बल्कि यह बड़े पैमाने पर फैलाया गया एक अवैध और संगठित नेटवर्क था। पीटर फिट्ज़ेक ने अपने साम्राज्य में चलाने के लिए 'इंजेल' (Engel) नाम की एक नई समानांतर करेंसी जारी कर रखी थी। इसके साथ ही उसने समर्थकों के लिए 'किंगडम ऑफ जर्मनी' के फर्जी पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और पहचान पत्र जारी किए थे। हद तो तब हो गई जब उसने जर्मन बैंकिंग कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए अपना खुद का एक समानांतर बैंक खोल लिया। इस अवैध बैंक में सैकड़ों समर्थकों ने अपने जीवन की गाढ़ी कमाई और करोड़ों यूरो इस उम्मीद में जमा करवा दिए कि उन्हें जर्मन सरकार के टैक्स और कड़े नियमों से आजादी मिल जाएगी। इस वित्तीय धोखाधड़ी और टैक्स चोरी ने देश की केंद्रीय वित्तीय एजेंसियों के कान खड़े कर दिए।
तख्तापलट की साजिश, पुलिस छापेमारी और अदालत में कानूनी शिकंजा
जर्मनी की आंतरिक गुप्तचर एजेंसी (Federal Office for the Protection of the Constitution) और विशेष पुलिस बल ने जब इस साम्राज्य के बढ़ते नेटवर्क और तख्तापलट की साजिशों की जांच की, तो बड़े खुलासे हुए। पुलिस की स्वाट टीमों ने देश भर में पीटर के दर्जनों ठिकानों, आश्रमों और संपत्तियों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान भारी मात्रा में अवैध दस्तावेज, फर्जी करेंसी, अनधिकृत बैंकिंग रिकॉर्ड और चरमपंथी साहित्य बरामद किया गया। जर्मन अभियोजकों ने अदालत के समक्ष आरोपी पीटर फिट्ज़ेक के खिलाफ गबन, बिना लाइसेंस के बैंकिंग कारोबार चलाने, धोखाधड़ी करने और देश की संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने के कई संगीन आरोप तय किए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो आरोपी को कई वर्षों की कठोर कारावास की सजा भुगतनी पड़ सकती है।
कौन हैं 'राइशबर्गर' और क्यों जर्मन सरकार के लिए सिरदर्द बन चुका है यह नेटवर्क
जर्मनी में खुद को राजा या स्वतंत्र नागरिक घोषित करने वाले ये लोग 'राइशबर्गर' यानी 'साम्राज्य के नागरिक' आंदोलन से जुड़े हुए हैं। इस विचारधारा को मानने वाले लोग द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने आधुनिक जर्मन गणराज्य और उसके कानूनों को नहीं मानते। उनका मानना है कि 1871 का जर्मन साम्राज्य आज भी कानूनी रूप से अस्तित्व में है। पिछले कुछ वर्षों में इस नेटवर्क के तार पूर्व सैन्य अधिकारियों, दक्षिणपंथी चरमपंथियों और साजिश की थ्योरियों पर यकीन करने वाले लोगों से जुड़े पाए गए हैं। जर्मन सरकार और सुरक्षा बल इस आंदोलन को लोकतंत्र और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानते हैं। पीटर द फर्स्ट के खिलाफ चल रहा यह ऐतिहासिक मुकदमा इस बात का संकेत है कि सरकार किसी भी सूरत में समानांतर व्यवस्था को फलने-फूलने नहीं देगी।