'ना तेल बिकेगा, ना कुछ बचेगा...', ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने दिया दुनिया को हिला देने वाला बयान

'ना तेल बिकेगा, ना कुछ बचेगा...', ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने दिया दुनिया को हिला देने वाला बयान

मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग अब पूरी तरह बेकाबू होती दिख रही है। गुरुवार तड़के अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार 12वीं रात भीषण हवाई हमले किए। दोनों देशों के बीच संघर्ष का दायरा अब सैन्य ठिकानों से निकलकर नागरिक बुनियादी ढांचे (Civilian Infrastructure) तक पहुँच गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में तीसरे विश्व युद्ध जैसा ख़तरा मंडराने लगा है।

CENTCOM का दावा: वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए स्ट्राइक जरूरी

अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस नए हमले की आधिकारिक पुष्टि की है।

CENTCOM का आधिकारिक बयान: "कमांडर इन चीफ (राष्ट्रपति) के निर्देशों पर अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर नए सिरे से सटीक हमले शुरू किए हैं। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजरने वाले नागरिक नाविकों व वाणिज्यिक जहाजों को डराने-धमकाने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह से नेस्तनाबूत करना है।"

ट्रंप की सीधी चेतावनी: "एक हमला हुआ तो एक पुल या बिजली संयंत्र तबाह होगा"

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है। बुधवार को उन्होंने ईरान को खुले तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका अब 'जैसे को तैसा' नीति के तहत सीधा प्रहार करेगा।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अब से यदि ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी भी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट या ड्रोन से हमला किया जाता है, तो इसके जवाब में अमेरिकी वायुसेना ईरान के किसी प्रमुख बिजली संयंत्र (Power Plant) या बड़े पुल को बमबारी कर नष्ट कर देगी।

ईरान का कड़ा पलटवार: "ना तेल बिकेगा, ना कोई इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित रहेगा"

अमेरिकी धमकियों पर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान की रक्षा नीति 'ईंट का जवाब पत्थर से' देने की है। यदि ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ तो इसमें अमेरिका का साथ देने वाले देशों को भी सीधे तौर पर निशाना बनाया जाएगा।

ईरान ने कहा कि इस युद्ध का नया समीकरण साफ़ है- या तो सब कुछ या कुछ भी नहीं! अगर इस क्षेत्र से ईरान अपना तेल नहीं बेच पाएगा, तो कोई भी दूसरा देश यहाँ से तेल नहीं बेच सकेगा।

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