अब सरकारी नौकरी खा गया AI, खुद सरकार ने 25000 नौकरियों पर चलाई कैंची, 2035 तक और बुरा हाल
सरकारी नौकरियों को हमेशा से स्थायित्व और सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार माना जाता रहा है, लेकिन अब तकनीक के तेजी से बदलते दौर में यह धारणा पूरी तरह से ध्वस्त होती दिख रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक ऑटोमेशन की लहर ने अब कॉर्पोरेट और प्राइवेट सेक्टर के साथ-साथ सरकारी विभागों में भी अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में सरकार की ओर से प्रशासनिक और क्लर्क स्तर की लगभग 25,000 सरकारी नौकरियों को खत्म करने या उनके कैडर को समाप्त करने का एक बेहद चौंकाने वाला फैसला सामने आया है। इस फैसले के बाद से न केवल सरकारी सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं में हड़कंप मच गया है, बल्कि रोजगार के भविष्य को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभिन्न रिपोर्टों और तकनीकी विश्लेषकों का अनुमान है कि वर्ष 2035 तक एआई का प्रभाव सरकारी ढांचे पर इतना व्यापक हो जाएगा कि लाखों पार पारंपरिक सरकारी पद इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे।
सरकारी विभागों में AI और डिजिटल ऑटोमेशन का बढ़ा दबदबा, 25 हजार पदों पर क्यों गिरी गाज?
सरकार द्वारा 25,000 पदों पर कैंची चलाने के पीछे का मुख्य कारण प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरी तरह से डिजिटल बनाना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल बढ़ाना है। पहले जिन फाइलों की प्रोसेसिंग, डेटा एंट्री, रिकॉर्ड कीपिंग और पत्राचार में दर्जनों कर्मचारियों और क्लर्कों की आवश्यकता होती थी, अब वही काम उन्नत AI एल्गोरिदम और क्लाउड-बेस्ड मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए कुछ ही सेकंडों में संपन्न हो रहे हैं। सरकार का मानना है कि ऑटोमेशन से न केवल काम की गति में अभूतपूर्व सुधार हुआ है, बल्कि करदाताओं के पैसे की भारी बचत भी हो रही है और भ्रष्टाचार पर लगाम लग रही है। जिन पदों को समाप्त या फ्रीज किया जा रहा है, उनमें मुख्य रूप से जूनियर असिस्टेंट, डेटा एंट्री ऑपरेटर्स, फाइल प्रोसेसर, लोअर डिविजन क्लर्क (LDC) और विभिन्न विभागों के रूटिन एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ शामिल हैं। सरकार का साफ संकेत है कि आने वाले समय में केवल उन्हीं नौकरियों को बनाए रखा जाएगा जिनमें मानवीय सोच, त्वरित निर्णय क्षमता और जटिल विश्लेषणात्मक कौशल की आवश्यकता होगी।
2035 तक का डरावना अनुमान: क्या सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं का भविष्य खतरे में है?
विभिन्न श्रम संगठनों और नीति निर्माताओं द्वारा किए गए गहन अध्ययन से संकेत मिलता है कि वर्ष 2035 तक सरकारी सेवा का ढांचा पूरी तरह से बदल जाएगा। आने वाले एक दशक में लगभग 40% पारंपरिक सरकारी नौकरियों के एआई द्वारा संचालित होने या पूरी तरह से समाप्त होने की आशंका जताई गई है। सरकारी भर्ती बोर्ड और लोक सेवा आयोग अब पुराने पैटर्न पर आधारित ग्रुप C और Group B के नियमित पदों के लिए बड़ी भर्तियां निकालने से बच रहे हैं। इसके बजाय, साइबर सुरक्षा, एआई डेटा एनालिटिक्स, रोबोटिक्स एडमिनिस्ट्रेशन और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों की संविदा (कांट्रैक्ट) या विशेषज्ञ स्तर पर सीधी नियुक्तियां बढ़ाई जा रही हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि जिस सुरक्षा और पेंशन की उम्मीद में वे सालों-साल पढ़ाई में लगाते थे, वह अवसर तेजी से सिकुड़ रहा है। शिक्षाविदों और करियर काउंसलर्स का कहना है कि अब छात्रों को केवल रटंत विद्या और पारंपरिक विषयों के भरोसे रहने के बजाय अपनी डिजिटल और तकनीकी दक्षताओं (Up-skilling) को तेजी से बढ़ाना होगा।
एआई क्रांति के बीच प्रशासनिक सुधार या व्यापक बेरोजगारी? जानिए नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों की राय
सरकारी नौकरियों में हो रही इस कटौती ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ जहां अर्थशास्त्री और नीति निर्माता इसे प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस (e-Governance) की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सामाजिक कार्यकर्ताओं और ट्रेड यूनियनों ने इसे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी का कारण बनने की चेतावनी दी है। जानकारों का कहना है कि जब सरकारें ही रोजगार देने से हाथ खींच लेंगी और इंसानी श्रम की जगह मशीनों को प्राथमिकता देंगी, तो देश में बढ़ती युवा आबादी के सामने आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को AI को अपनाने के साथ-साथ कर्मचारियों की री-स्किलिंग (Re-skilling) और नए तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार सृजन पर भी समान ध्यान देना चाहिए। 2035 का भारत और वैश्विक परिदृश्य पूरी तरह से ऑटोमेटेड होगा, जहां सिर्फ वही लोग सर्वाइव कर पाएंगे जो AI के साथ मिलकर काम करने की क्षमता रखते हैं।