तालिबान के हाथ से निकला एक पूरा जिला! बागी लड़ाकों के अचानक हमले से हिली काबुल सरकार, पाक सीमा के पास हड़कंप

तालिबान के हाथ से निकला एक पूरा जिला! बागी लड़ाकों के अचानक हमले से हिली काबुल सरकार, पाक सीमा के पास हड़कंप

अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान सरकार को अब तक का सबसे बड़ा और तगड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान सीमा के बेहद करीब स्थित एक पूरे जिले पर बागी लड़ाकों ने अचानक धावा बोलकर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया है। इस भीषण और रणनीतिक हमले ने काबुल में बैठी तालिबान सरकार की सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। सीमावर्ती इलाके में हुए इस बड़े उलटफेर के बाद से न सिर्फ अफगानिस्तान बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी हड़कंप मच गया है। दोनों देशों की सीमाओं पर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

रात के अंधेरे में हुआ चौतरफा हमला, तालिबान लड़ाकों को पीछे हटना पड़ा

सैन्य सूत्रों और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, बागी लड़ाकों (संभावित रेजिस्टेंस फोर्सेज) ने इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिले को निशाना बनाने के लिए पहले से ही पूरी प्लानिंग कर रखी थी। भारी हथियारों से लैस विद्रोहियों ने रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए तालिबान के ठिकानों, चौकियों और प्रशासनिक भवनों पर चौतरफा हमला बोल दिया। अचानक हुए इस भारी और अप्रत्याशित हमले से तालिबान के स्थानीय लड़ाके संभल नहीं पाए। कई घंटों तक चली भीषण गोलीबारी और आमने-सामने की जंग के बाद तालिबानी सुरक्षाबलों को भारी नुकसान उठाते हुए वहां से पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

पाकिस्तान सीमा के पास कब्जा, क्यों बढ़ी काबुल की टेंशन?

जिस जिले पर बागी लड़ाकों ने कब्जा किया है, वह पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है। भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से यह इलाका बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस जिले के हाथ से निकलने का सीधा मतलब यह है कि अब बागी गुटों को एक मजबूत बेस मिल गया है, जहां से वे अपने ऑपरेशंस को आसानी से ऑपरेट कर सकते हैं। इसके अलावा, पाकिस्तान सीमा के नजदीक होने के कारण हथियारों की तस्करी और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट मिलने का खतरा भी बढ़ गया है। काबुल में बैठी तालिबान सरकार के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि यह उनकी कानून-व्यवस्था और खुफिया तंत्र की एक बहुत बड़ी नाकामी को दर्शाती है।

काबुल से भेजी गई अतिरिक्त कुमुक, दोबारा कब्जे के लिए भारी जंग के आसार

इस बड़े झटके के बाद काबुल में तालिबान के शीर्ष कमांडरों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई है। सूत्रों के मुताबिक, खोए हुए जिले को दोबारा अपने नियंत्रण में लेने के लिए तालिबान सरकार ने भारी संख्या में अपने विशेष कमांडो और बख्तरबंद गाड़ियों को सीमावर्ती इलाके की तरफ रवाना कर दिया है। पूरे जिले की घेराबंदी कर दी गई है और आने वाले घंटों में बागी लड़ाकों तथा तालिबान के बीच एक और भीषण और खूनी संघर्ष होने के आसार जताए जा रहे हैं। इस सैन्य हलचल के कारण स्थानीय नागरिकों में भारी खौफ है और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।

क्या तालिबान के खिलाफ खड़ा हो रहा है कोई नया फ्रंट?

जब से अफगानिस्तान में तालिबान की दोबारा सत्ता वापसी हुई है, तब से नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट (NRF) और आईएसकेपी (ISKP) जैसे गुट लगातार उन्हें चुनौती देते रहे हैं। लेकिन किसी पूरे जिले पर कब्जा जमा लेना यह साबित करता है कि बागी लड़ाकों की ताकत और रणनीति अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुकी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बगावत को तुरंत नहीं कुचला गया, तो अफगानिस्तान के अन्य हिस्सों में भी तालिबान विरोधी सुर और तेज हो सकते हैं, जिससे देश एक बार फिर गृहयुद्ध की आग में झुलस सकता है।

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