दुनिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील में पलटी 114 यात्रियों से भरी नाव, 15 की मौत
जिम्बाब्वे से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां की प्रसिद्ध करिबा झील (Lake Kariba) में मंगलवार को एक भयंकर नाव हादसा हो गया। क्षमता से अधिक यात्रियों को ले जा रही एक नाव खराब मौसम के बीच तेज लहरों का शिकार होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 20 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। गोताखोरों और प्रशासन की रेस्क्यू टीम लगातार बचाव कार्य में जुटी है।
कैसे हुआ यह खौफनाक हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय पुलिस के अनुसार, यह हादसा खराब मौसम की वजह से हुआ। मौसम खराब होने के बावजूद नाव को सामान्य रूप से रवाना कर दिया गया था। बीच झील में पहुंचने पर नाव तेज लहरों से टकराई, जिससे उसका इंजन अचानक बंद हो गया और वह बेकाबू होकर पलट गई। यह नाव मुख्य रूप से उत्तरी शहर करिबा और झील के बीच स्थित कई द्वीपों तथा मछली पकड़ने वाले शिविरों (Fishing Camps) के बीच परिवहन का काम करती थी।
ओवरलोडिंग बनी काल: क्षमता 90 की, सवार थे 119 लोग
दुर्घटना के पीछे मौसम के साथ-साथ घोर लापरवाही भी सामने आई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस नाव में सिर्फ 90 यात्रियों को बैठाने की क्षमता थी। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर इसमें कम से कम 114 वयस्क यात्री और 5 क्रू मेंबर्स (कुल 119 लोग) सवार थे। क्षमता से ज्यादा वजन होने के कारण नाव लहरों का सामना नहीं कर पाई। हालांकि, राहत की बात यह है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 60 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
क्या है दुनिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील 'करिबा' की खासियत? (Facts About Lake Kariba)
जिस करिबा झील में यह भीषण हादसा हुआ है, वह भौगोलिक और ऐतिहासिक रूप से बेहद खास है। जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे से करीब 300 किलोमीटर (185 मील) उत्तर-पूर्व में स्थित यह झील कई खूबियां समेटे हुए है:
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दुनिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झील: क्षेत्रफल के लिहाज से करिबा झील दुनिया की सबसे विशाल मानव निर्मित (Man-made) झील है। यह लगभग 5,400 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैली हुई है।
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भौगोलिक स्थिति: यह अफ्रीका की सबसे प्रसिद्ध झीलों में से एक है, जो जिम्बाब्वे और जाम्बिया देश की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित है।
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निर्माण का इतिहास: इस झील का निर्माण अफ्रीका की प्रमुख जाम्बेजी नदी पर करिबा बांध (Kariba Dam) बनने के बाद हुआ था। इस बांध का निर्माण कार्य 1950 के दशक में शुरू हुआ था और 1960 के दशक की शुरुआत में इस झील में पानी भरने की प्रक्रिया पूरी की गई थी।