तेल बाजार का नया बादशाह चीन! ईरान संकट में बिना मैदान में उतरे बदल दिया दुनिया का खेल

तेल बाजार का नया बादशाह चीन! ईरान संकट में बिना मैदान में उतरे बदल दिया दुनिया का खेल

दशकों तक वैश्विक तेल बाजार (Global Oil Market) और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा केवल मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) के युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव और ओपेक (OPEC) के फैसलों से तय होती रही है। यूक्रेन युद्ध के बाद इस खेल में रूस की भी बड़ी एंट्री हुई। लेकिन हाल ही में ईरान संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से उपजे ताजा वैश्विक ऊर्जा संकट ने दुनिया के सामने एक चौंकाने वाला नया सच लाकर खड़ा कर दिया है। इस बार तेल बाजार पर सबसे बड़ा और निर्णायक असर किसी खाड़ी देश का नहीं, बल्कि उस देश का दिखा जो संकट को सुलझाने वाली किसी भी आधिकारिक वार्ता की मेज पर मौजूद ही नहीं था—वह देश है चीन।

संकट से पहले ही चीन ने चुपचाप जमा कर लिया था 'एक अरब बैरल' कच्चे तेल का विशाल भंडार

चीन की दूरगामी ऊर्जा कूटनीति पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि बीजिंग ने इस संकट की तैयारी सालों पहले ही शुरू कर दी थी। चीन पिछले कई वर्षों से अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना कर रहे रूस और ईरान से बेहद रियायती दरों (Discounted Rates) पर लगातार कच्चा तेल खरीद रहा था। ऊर्जा विशेषज्ञों का अनुमान है कि आज चीन के पास अपने रणनीतिक (Strategic) और व्यावसायिक भंडारों में 1 अरब बैरल (One Billion Barrels) से भी अधिक कच्चा तेल सुरक्षित मौजूद है। यही वजह है कि जब होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण अचानक वैश्विक आपूर्ति ठप हुई, तो चीन को अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगे दामों पर अतिरिक्त तेल खरीदने की जरूरत ही नहीं पड़ी, बल्कि उसने अपने इसी विशाल भंडार से घरेलू जरूरतें पूरी करना शुरू कर दिया।

चीन की 'अदृश्य रणनीति': आयात में 30 लाख बैरल प्रतिदिन की भारी कटौती, बाजार को मिली राहत

जब दुनिया भर के देश तेल की किल्लत से त्राहि-त्राहि कर रहे थे, तब चीन ने वैश्विक बाजार में आक्रामक प्रतिस्पर्धा करने के बजाय चुपचाप पीछे हटने की रणनीति अपनाई:

  • मांग में कमी: चीन ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल के अपने नियमित आयात में लगभग 30 लाख बैरल प्रतिदिन तक की भारी कटौती कर दी।

  • कीमतों पर ब्रेक: इतनी बड़ी मात्रा में चीन की मांग अचानक घटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार को भारी राहत मिली। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने (क्रैश या आउट ऑफ कंट्रोल होने) से बच गईं। चीन की यह रणनीति बाजार को संभालने वाली एक 'अदृश्य ताकत' बन गई।

चीन में 'इलेक्ट्रिक व्हीकल' (EV) क्रांति ने वैश्विक तेल बाजार की कमर तोड़ी

चीन का दबदबा सिर्फ उसके विशाल तेल गोदामों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके ऑटोमोबाइल सेक्टर में आई अभूतपूर्व ईवी क्रांति भी इसके पीछे की मुख्य वजह है। आज चीन के घरेलू बाजार में बिकने वाली कुल नई यात्री कारों में से लगभग आधी गाड़ियां या तो पूरी तरह इलेक्ट्रिक (EV) हैं या फिर हाइब्रिड तकनीक से लैस हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, चीन के इस विशाल इलेक्ट्रिक वाहन बेड़े ने अकेले पिछले वर्ष ही वैश्विक स्तर पर प्रतिदिन 10 लाख बैरल तेल की खपत और मांग को हमेशा के लिए कम कर दिया है।

2027 में पलट जाएगा पूरा समीकरण: किल्लत की जगह होगी अधिक आपूर्ति की चिंता

ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह बैकफुट पर रहना कुछ ही समय के लिए है। जैसे ही ईरान संकट पूरी तरह थमेगा और तेल की कीमतें नीचे आएंगी, चीन अपने खाली हुए भंडारों को दोबारा भरने के लिए फिर से दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार बनकर बाजार में लौटेगा। आईईए (IEA) ने पहले ही चेतावनी दी है कि साल 2027 तक वैश्विक तेल बाजार का समीकरण पूरी तरह बदलने वाला है। 2027 तक दुनिया में तेल की कमी की चिंता खत्म हो जाएगी और उसकी जगह 'अत्यधिक आपूर्ति' (Over Supply) की नई चुनौती पैदा होगी। उस समय खाड़ी देशों का अतिरिक्त तेल बाजार में कितना टिक पाएगा, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि चीन कितनी बड़ी मात्रा में खरीदारी करता है।

भारत के लिए राहत, सीख और भविष्य की चुनौती

चीन द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार से दूरी बनाने का सीधा और बड़ा फायदा भारत समेत दुनिया के अन्य विकासशील देशों को मिला, क्योंकि तेल की कीमतें नियंत्रण में रहीं और भारत का आयात बिल बढ़ने से बच गया। हालांकि, रक्षा और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लिए यह स्थिति एक बहुत बड़ी सीख है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए चीन की तरह ही अपने 'रणनीतिक तेल भंडार' (Strategic Petroleum Reserves) को और व्यापक रूप देना होगा। भारत को कुछ हफ्तों के बजाय कई महीनों का बैकअप तेल भंडार तैयार करना होगा, ताकि भविष्य में होने वाले किसी भी वैश्विक संकट के समय देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके।