85% वोटों की गिनती पूरी: नेतनयाहू गुट 53 सीटों पर, आइजनकोट गुट 48 और अरब दल 19 पर

85% वोटों की गिनती पूरी: नेतनयाहू गुट 53 सीटों पर, आइजनकोट गुट 48 और अरब दल 19 पर

मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक हलचल के केंद्र में रहने वाले इजरायल से इस वक्त एक बहुत बड़ी और अहम राजनीतिक खबर सामने आ रही है। देश भर में हुए बहुप्रतीक्षित आम चुनाव के बाद अब तक कुल डाले गए मतों में से 85 फीसदी से अधिक वोटों की गिनती पूरी की जा चुकी है। चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए इन ताजा और आधिकारिक आंकड़ों ने इजरायल की राजनीति में एक बार फिर कड़े मुकाबले के संकेत दे दिए हैं। देश की जनता ने किस पार्टी और किस नेता के हाथों में देश की बागडोर सौंपने का मन बनाया है, इसकी तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ होने लगी है। शुरुआती रुझानों और आंकड़ों के मुताबिक, इजरायल की संसद यानी नेसेट (Knesset) में बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल करने के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है, जिससे हर राउंड की गिनती के साथ राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है।

बेंजामिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गुट 53 सीटों पर मजबूत पकड़ के साथ सबसे आगे

अब तक सामने आए 85 प्रतिशत चुनावी परिणामों के अनुसार, देश के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे अनुभवी नेता बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) का दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों का गठबंधन कुल 53 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। नेतन्याहू के इस राजनीतिक खेमे ने देश की सुरक्षा, यहूदी राष्ट्र की मजबूती और आर्थिक सुधारों के मुद्दों को अपने चुनाव प्रचार का मुख्य आधार बनाया था, जिसका असर उनके पारंपरिक वोट बैंक पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। हालांकि, इजरायली संसद (नेसेट) में सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत के जादुई आंकड़े (61 सीटें) से नेतन्याहू गुट अभी भी कुछ कदम दूर है। यदि अंतिम परिणाम और शेष बचे वोटों की गिनती में यही रुझान बरकरार रहता है, तो नेतन्याहू को सरकार के गठन के लिए छोटे क्षेत्रीय दलों या अन्य गुटों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

गादी आइजनकोट गुट 48 सीटों के साथ कड़ी टक्कर में, सत्ता की चाबी के लिए संघर्ष जारी

चुनावी मैदान में नेतन्याहू के धुर विरोधियों और मध्यमार्गी-उदारवादी ताकतों का प्रतिनिधित्व करने वाला गादी आइजनकोट (Gadi Eisenkot) गुट बेहद शानदार प्रदर्शन करते हुए 53 सीटों के मुकाबले 48 सीटों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुका है। पूर्व सैन्य प्रमुख और राजनीतिक मोर्चे पर तेजी से उभरते चेहरे के रूप में देखे जाने वाले आइजनकोट के इस प्रदर्शन ने राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया है। शहरी इलाकों और युवा मतदाताओं के एक बड़े वर्ग ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया है, जिससे यह साफ हो गया है कि इजरायल की जनता मौजूदा राजनीतिक गतिरोध से पार पाने के लिए नए विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। दोनों प्रमुख गुटों के बीच सीटों का यह करीबी अंतर यह तय कर रहा है कि आखिरी कुछ प्रतिशत वोटों की गिनती ही इजरायल के अगले प्रधानमंत्री का भविष्य तय करेगी।

अरब दलों के पास 19 सीटों का मजबूत आधार, त्रिशंकु संसद के बन रहे हैं पूरे आसार

इजरायली चुनाव के इस ताजा आंकड़ों में सबसे दिलचस्प पहलू अरब राजनीतिक दलों (Arab Parties) का प्रदर्शन रहा है, जो वर्तमान गिनती के अनुसार 19 सीटों पर आगे चल रहे हैं। इजरायल की राजनीति में हमेशा से 'किंगमेकर' की भूमिका निभाने वाले ये अरब दल इस बार भी सरकार के गठन या गिराने में निर्णायक साबित हो सकते हैं। चूँकि न तो नेतन्याहू का गुट और न ही आइजनकोट का गुट अपने दम पर स्पष्ट बहुमत के जादुई आंकड़े (61) तक आसानी से पहुंच पा रहा है, इसलिए संसद के इस त्रिशंकु (Hung Parliament) समीकरण में इन 19 सीटों का महत्व कई गुना बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी भी गठबंधन को स्थिर सरकार चलानी है, तो उसे इन छोटे और क्षेत्रीय दलों के साथ बहुत ही सावधानी से मोलभाव करना होगा।

इजरायल के आंतरिक राजनीतिक भविष्य और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर इस चुनाव का असर

85 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें अंतिम और बचे हुए 15 प्रतिशत वोटों के नतीजों पर टिकी हुई हैं। इजरायल का यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब पूरा देश और क्षेत्र गहरी सुरक्षा चुनौतियों, क्षेत्रीय संघर्षों और कूटनीतिक दबावों से गुजर रहा है। चुनाव के अंतिम परिणाम न केवल देश की घरेलू नीतियों और न्यायपालिका सुधारों की दिशा तय करेंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इजरायल के रुख को भी गहराई से प्रभावित करेंगे। आने वाले कुछ ही घंटों में निर्वाचन आयोग द्वारा सभी सीटों के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे, जिसके बाद साफ हो जाएगा कि क्या नेतन्याहू एक बार फिर सत्ता पर काबिज होने में कामयाब होते हैं या इजरायल की राजनीति में कोई नया इतिहास लिखा जाता है।