400 वर्ग किलोमीटर में फैला कच्चा तेल, रूस के इस प्रतिबंधित जहाज ने समंदर में मचाई तबाही

400 वर्ग किलोमीटर में फैला कच्चा तेल, रूस के इस प्रतिबंधित जहाज ने समंदर में मचाई तबाही

ओमान के मरीन बॉर्डर के पास एक खतरनाक समुद्री दुर्घटना सामने आई है जहां लगभग 400 वर्ग किलोमीटर के विशाल दायरे में कच्चा तेल फैल गया है। इस वीभत्स घटना ने पर्यावरणविदों और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। यह पूरा हादसा तब शुरू हुआ जब रूस का कच्चा तेल लेकर जा रहा एक भारी-भरकम टैंकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जितने बड़े क्षेत्रफल में पूरा चेन्नई शहर बसा हुआ है, लगभग उतने ही बड़े समुद्री हिस्से पर इस समय काले तेल की परत तैर रही है।

इस पूरे मामले के केंद्र में कैरोलिन बेजेंगी नाम का वही टैंकर है जिसके जरिए यह भयानक रिसाव हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस रूसी जहाज पर पश्चिमी देशों की सख्त पाबंदियां लगी हुई हैं। हादसे से कुछ दिन पहले ही यानी 8 जून को जहाज के क्रू ने यमन के दक्षिणी बंदरगाह मुकल्ला के करीब शिप में गंभीर तकनीकी खराबी आने की बात सार्वजनिक की थी। इन तमाम चौंकाने वाली बातों के बीच कच्चे तेल के इस बेकाबू रिसाव ने पानी के भीतर रहने वाले जीवों के अस्तित्व पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ नुकसान का खुलासा

ओमान के पर्यावरण विभाग ने इस हृदयविदारक घटना के तुरंत बाद अंतरिक्ष से ली गई सैटेलाइट तस्वीरों का बारीकी से अध्ययन शुरू कर दिया है। ताजा तकनीकी विश्लेषण में यह बात खुलकर सामने आई है कि तेल का यह जहरीला साम्राज्य अब तक करीब 390 वर्ग किलोमीटर के दायरे को अपने आगोश में ले चुका है। सबसे डरावनी बात यह है कि यह दायरा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। समंदर की सतह पर फैल रहा यह काला जहर अब मूक जलीय जीवों के लिए काल बनता जा रहा है।

ऑयल स्पिल क्या है और इसका भूगोल

दुनियाभर में कच्चे तेल का बड़े पैमाने पर व्यापार सुरक्षित समुद्री रास्तों के जरिए ही किया जाता है। हालांकि जब कभी किसी तकनीकी खामी या दुर्घटना के कारण समंदर में चल रहे जहाजों से लीकेज शुरू होता है, तो इसे ऑयल स्पिल कहा जाता है।

जानकारों का मानना है कि इस तरह के रिसाव का असर केवल ऊपरी पानी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह धीरे-धीरे पूरे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर देता है। पानी के घनत्व में हल्का होने के कारण कच्चा तेल सबसे पहले सतह पर तैरने लगता है और फिर लहरों तथा हवा के सहारे दूर-दूर तक फैल जाता है।

समुद्री जीवों और इकोसिस्टम पर चौतरफा मार

तोरित रूप से साफ-सफाई के प्रयास किए जाने के बावजूद समंदर की यह चोट आसानी से नहीं भरती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पानी में घुलने वाले जहरीले रसायन और तेल के छोटे-छोटे कण मछलियों, कछुओं और समुद्री स्तनधारियों के शरीर से चिपक जाते हैं। इसके संपर्क में आने वाले पक्षियों के पंख अपनी प्राकृतिक सुरक्षा खो देते हैं जिससे उनका उड़ना और शिकार करना दूभर हो जाता है। इसके अलावा पानी की सतह पर फैली तेल की यह परत सूरज की रोशनी और ऑक्सीजन के कुदरती आदान-प्रदान को पूरी तरह रोक देती है जिससे जलीय वनस्पतियां भी दम तोड़ने लगती हैं।