दिल्ली: शेल्टर तोड़ने वाले JE के खिलाफ जांच के आदेश, CM रेखा गुप्ता ने जागृति मिश्रा को दी ₹5 लाख की मदद
राजधानी दिल्ली में कड़ाके की ठंड और बारिश के बीच बेघर लोगों के लिए बनाए गए एक रैन बसेरे (शेल्टर होम) को बिना किसी पूर्व सूचना और मानवीय संवेदनशीलता के ढहाए जाने का मामला अब काफी गर्मा गया है। इस अमानवीय घटना पर कड़ा संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार ने संबंधित जूनियर इंजीनियर (JE) के खिलाफ उच्चस्तरीय विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पीड़ित जागृति मिश्रा से मुलाकात कर उनकी बेबसी और नुकसान की भरपाई के लिए ₹5 लाख की आर्थिक सहायता राशि देने का ऐलान किया है। सरकार के इस त्वरित एक्शन से जहां अधिकारियों में हड़कंप मच गया है, वहीं आम नागरिकों को न्याय की एक नई उम्मीद मिली है।
बिना किसी नोटिस के शेल्टर ढहाने पर हड़कंप, JE के खिलाफ सख्त जांच के आदेश
दिल्ली के संबंधित इलाके में बेघर और जरूरतमंद लोगों को आशियाना देने वाले शेल्टर होम पर अचानक बुलडोजर चला दिया गया था। आरोप है कि संबंधित विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) ने प्रशासनिक नियमों और इंसानी संवेदनाओं को ताक पर रखकर यह कार्रवाई की। जब यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया और स्थानीय लोगों ने हंगामा शुरू किया, तो शासन-प्रशासन के होश उड़ गए। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए साफ शब्दों में कहा है कि कड़ाके की ठंड में किसी भी गरीब या जरूरतमंद का आशियाना छीनना पूरी तरह से गैर-कानूनी और अक्षम्य अपराध है। मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पीड़िता जागृति मिश्रा से मिलीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, ₹5 लाख की आर्थिक मदद का ऐलान
इस दुखद हादसे में अपना सब कुछ गंवाने वाली पीड़िता जागृति मिश्रा की आपबीती सुनकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बेहद भावुक हो गईं। मुख्यमंत्री ने खुद उनसे मुलाकात की और उनका हाल-चाल जाना। संकट की इस घड़ी में संबल प्रदान करते हुए मुख्यमंत्री ने तुरंत ₹5 लाख का मुआवजा स्वीकृत किया ताकि जागृति मिश्रा और उनका परिवार दोबारा से अपनी जिंदगी को पटरी पर ला सके। इसके साथ ही प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि पीड़िता और शेल्टर में रहने वाले अन्य सभी प्रभावित परिवारों को तुरंत पास के ही एक सुरक्षित और सर्वसुविधायुक्त सरकारी रैन बसेरे में शिफ्ट किया जाए, जहां उन्हें भोजन, गर्म कपड़े और चिकित्सा सहायता निर्बाध रूप से मिलती रहे।
बेघरों के आशियाने पर बुलडोजर कार्रवाई से प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
दिल्ली में हुई इस बुलडोजर कार्रवाई ने नगर निगम और पीडब्ल्यूडी जैसे नागरिक निकायों की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों और समाजसेवियों का आरोप है कि कड़ाके की ठंड और प्रतिकूल मौसम में जब शेल्टर होम ही बेसहारा लोगों की एकमात्र उम्मीद होते हैं, तब इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाई करना अधिकारियों की तानाशाही को दिखाता है। इस घटना के बाद से ही सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था, जिसके बाद सरकार को मामले में सीधी दखल देनी पड़ी और जांच बिठानी पड़ी।
जवाबदेही तय करने और दिल्ली में शेल्टर होम सुरक्षा पर नए दिशा-निर्देश जारी
इस संवेदनशील घटना से सबक लेते हुए दिल्ली सरकार ने पूरे शहर के सभी रैन बसेरों और बेघर कल्याण केंद्रों की सुरक्षा समीक्षा करने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव और संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि भविष्य में किसी भी शेल्टर या अस्थाई राहत केंद्र को हटाने से पहले उच्च अधिकारियों की लिखित अनुमति अनिवार्य होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आश्वस्त किया है कि दिल्ली सरकार हर गरीब और असहाय नागरिक के साथ मजबूती से खड़ी है और किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की मनमानी से आम जनता के अधिकारों का हनन नहीं होने दिया जाएगा।