पाक सेना का 'डर्टी गेम'! कारगिल का सच बताने पर घिरे मौलाना फजलुर रहमान, लश्कर को मिला नया टारगेट

पाक सेना का 'डर्टी गेम'! कारगिल का सच बताने पर घिरे मौलाना फजलुर रहमान, लश्कर को मिला नया टारगेट

पाकिस्तान की सियासत और मिलिट्री एस्टेब्लिशमेंट में इस वक्त जबरदस्त भूचाल आया हुआ है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान द्वारा 1999 के कारगिल युद्ध को लेकर पाकिस्तानी सेना की पोल खोलने के बाद रावलपिंडी (सैन्य मुख्यालय) बौखला गया है। अपनी भयंकर फजीहत से तिलमिलाई पाकिस्तानी सेना ने अब मौलाना फजलुर रहमान को खामोश करने और उन्हें सीधे तौर पर धमकाने के लिए एक नया 'डर्टी गेम' (घिनौना खेल) शुरू कर दिया है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस बार सेना ने सीधे सामने आने के बजाय आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उससे जुड़े विंग्स के कंधों पर बंदूक रखकर मौलाना को ठिकाने लगाने या डराने का एक बड़ा खुफिया प्लान तैयार किया है।

कारगिल के सच से थर्रार्इ सेना: मौलाना ने खोली थी पोल

दरअसल, हाल ही में एक सार्वजनिक रैली में मौलाना फजलुर रहमान ने वो सच उगल दिया था, जिसे पाकिस्तानी सेना पिछले 27 सालों से अपने देश की जनता से छुपा रही थी। मौलाना ने दहाड़ते हुए कहा था कि कारगिल की जंग में पाकिस्तान की सेना ने अपने ही सैकड़ों मृत सैनिकों के शवों (जनाजों) को अपनाने से इनकार कर दिया था और उन्हें 'हिंदुओं' (भारतीय सेना) के रहमोकरम पर लावारिस छोड़ दिया था। मौलाना ने सैन्य जनरलों को ललकारते हुए पूछा था कि हिम्मत है तो मुल्क को बताएं कि कारगिल में असल में कितने जवान मारे गए थे? इस बेबाक खुलासे ने पाकिस्तानी सेना की साख को पूरी दुनिया के सामने मिट्टी में मिला दिया है।

लश्कर के जरिए 'साइलेंट ऑपरेशन': क्या है सेना का नया प्लान?

सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और आईएसआई (ISI) के आला अफसर मौलाना के इस तेवर से बेहद असहज हैं। चूंकि मौलाना पाकिस्तान के एक बेहद रसूखदार धार्मिक और राजनीतिक नेता हैं, इसलिए उन पर सीधे तौर पर कोई भी कानूनी या सैन्य कार्रवाई करने से देश में गृहयुद्ध जैसे हालात बन सकते हैं। यही वजह है कि पाकिस्तानी सेना ने अपने पुराने आजमाए हुए हथकंडे यानी 'आतंकी प्रॉक्सी' का सहारा लिया है। खुफिया रिपोर्ट्स की मानें तो लश्कर-ए-तैयबा और उसके मुखौटा संगठनों को मौलाना फजलुर रहमान के खिलाफ एक्टिव कर दिया गया है। इस प्लान के तहत मौलाना को 'देशद्रोही' और 'शहीदों का अपमान करने वाला' बताकर उनके खिलाफ फतवे जारी करवाने और उन्हें गंभीर सुरक्षा धमकियां देने की स्क्रिप्ट तैयार की गई है, ताकि वे डरकर सेना के खिलाफ बोलना बंद कर दें।

चारों तरफ से घिरी पाकिस्तानी फौज: अब आर-पार की लड़ाई

पाकिस्तान में इस वक्त आर्थिक बदहाली और राजनीतिक अस्थिरता के बीच सेना की तानाशाही के खिलाफ गुस्सा चरम पर है। मौलाना फजलुर रहमान ने सेना को खुली चुनौती देते हुए पहले ही कह दिया था कि "वर्दी उतारो, पार्टी बनाओ और चुनाव लड़ो"। अब जब कारगिल के सच ने सेना की रही-सही इज्जत भी उतार दी है, तो रावलपिंडी के जनरलों के पास अपनी खीझ मिटाने के लिए सिर्फ धमकियों का ही रास्ता बचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेना का यह नया 'डर्टी गेम' उलटा भी पड़ सकता है, क्योंकि मौलाना के समर्थक पूरे पाकिस्तान में फैले हुए हैं और अगर उन्हें जरा सा भी नुकसान पहुंचता है, तो पाकिस्तान की हुकूमत और सेना दोनों ताश के पत्तों की तरह ढह सकती हैं।

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