मिडिल ईस्ट में जंग का ख़ौफ़... और भारत ने ले लिया ऐतिहासिक फ़ैसला! टूट गए तेल आयात के सारे रिकॉर्ड
वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और युद्ध के अनिश्चित हालातों के बीच भारत की ऊर्जा रणनीति (Energy Strategy) पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन गई है। इसे भारत की कूटनीतिक समझदारी कहें या चतुर स्ट्रेटजी, लेकिन मौजूदा वैश्विक संकट में यह नीति पूरी तरह कारगर साबित हो रही है।
मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जहाजों पर हो रहे हमलों के बीच भारत ने एक बार फिर अपने जहाजों का रुख अपने पुराने और भरोसेमंद दोस्त रूस की ओर मोड़ दिया है।
खाड़ी देशों से आयात 27% घटा, रूस से खरीदारी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
चालू वित्त वर्ष (2026-27) की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के ताजा आंकड़े भारत के इस रणनीतिक बदलाव की पुष्टि करते हैं।
दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश भारत ने मिडिल ईस्ट से होने वाले क्रूड ऑयल आयात में करीब 27 प्रतिशत की बड़ी कटौती दर्ज की है, जो घटकर अब औसतन 15.5 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) रह गया है।
इसके ठीक उलट, रूस और कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स (CIS) से भारत का तेल आयात 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.6 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया है।
जून में बना नया रिकॉर्ड: भारत के कुल तेल आयात में आधा हिस्सा अकेले रूस का
अकेले जून महीने की बात करें तो भारत ने रूसी कच्चे तेल का अब तक का सबसे बड़ा ऑल-टाइम रिकॉर्ड आयात किया है-!
- रिकॉर्ड खरीदारी: भारत ने जून में रूस से रोजाना रिकॉर्ड 2.64 मिलियन (26.4 लाख) बैरल क्रूड ऑयल खरीदा, जो मई की तुलना में 37.4% अधिक है।
- 50% की हिस्सेदारी: जून में भारत के कुल 5.24 मिलियन बैरल प्रति दिन के कुल तेल आयात में अकेले रूस का योगदान लगभग आधा (50%) रहा।
- तिमाही हिस्सेदारी में उछाल: अप्रैल से जून तिमाही के दौरान भारत के कुल क्रूड ऑयल इंपोर्ट मिक्स में रूस का दबदबा पिछले साल के 38% से बढ़कर 41% पहुंच गया है, जबकि मिडिल ईस्ट की हिस्सेदारी 41.4% से गिरकर महज 31% पर सिमट गई है।
क्यों बदलनी पड़ी भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति?
शुरुआत में अमेरिका के साथ कूटनीतिक संतुलन और पाबंदियों के दबाव के चलते भारत ने रूसी तेल की खरीद में थोड़ी कटौती की थी और खाड़ी देशों से आपूर्ति बढ़ाई थी। हालांकि, ईरान-इजरायल तनाव, लाल सागर संकट और यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा जहाजों पर हमलों से मिडिल ईस्ट से आने वाली सप्लाई चेन प्रभावित हो गई।
जैसे ही अमेरिका ने रूसी तेल पर मिलने वाली अस्थायी छूट को आगे बढ़ाया, भारत ने तुरंत अवसर का फायदा उठाते हुए रूसी तेल की सप्लाई फिर बढ़ा दी, ताकि देश में ईंधन की कमी न हो और महंगाई को नियंत्रित रखा जा सके।